कर्नाटक
सरकारी स्कूलों को मिलेगी नई पहचान, निजी संस्थानों से सहयोग की अपील
Ratna Netam
4 Nov 2026 7:51 PM IST

x
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने निजी स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और कॉरपोरेट कंपनियों से सरकारी स्कूलों के विकास में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों को इसमें भागीदारी निभानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने शुरुआती चरण में 1,000 सरकारी स्कूलों को निजी संस्थानों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। आगे इस पहल के माध्यम से 2,000 स्कूलों तक पहुंचने की योजना है।बुधवार, 4 नवंबर को बेंगलुरु में 'नम्मा शाले नम्मा जवाबदारी' (हमारा स्कूल, हमारी जिम्मेदारी) कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने निजी शैक्षणिक संस्थानों से ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों को गोद लेने या उनके विकास में साझेदार बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी संस्थानों के बीच सहयोग से ग्रामीण बच्चों को बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के बड़े निजी शिक्षण संस्थानों के पास बेहतर बुनियादी ढांचा, शैक्षणिक अनुभव और आधुनिक संसाधन मौजूद हैं। यदि इन संसाधनों का कुछ हिस्सा सरकारी स्कूलों के विकास के लिए उपलब्ध कराया जाए, तो ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय बदलाव लाया जा सकता है।
पहले चरण में 1,000 सरकारी स्कूलों को मिलेगा सहयोग
डीके शिवकुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने शुरुआत में 1,000 सरकारी स्कूलों को निजी संस्थानों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद इस मॉडल का विस्तार करते हुए 2,000 स्कूलों को लाभ पहुंचाने की योजना बनाई गई है।इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूल भवनों का निर्माण या मरम्मत कराना नहीं है, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है।सरकारी स्कूलों में कक्षाओं की स्थिति सुधारने, पुस्तकालय विकसित करने, कंप्यूटर उपलब्ध कराने, विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित करने और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे कार्यों में निजी संस्थानों की भागीदारी उपयोगी साबित हो सकती है।मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में भी शहरों के अच्छे स्कूलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए दूर जाने की आवश्यकता कम होगी।
निजी स्कूलों से एक-एक सरकारी स्कूल गोद लेने की अपील
मुख्यमंत्री ने निजी स्कूल प्रबंधन से अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार कम से कम एक सरकारी स्कूल के विकास की जिम्मेदारी लेने पर विचार करें।उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले निजी संस्थान सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इससे शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का लाभ मिलेगा।कर्नाटक सरकार पहले भी निजी शिक्षण संस्थानों और कंपनियों से इस तरह के सहयोग का आग्रह कर चुकी है। अगस्त में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भी डीके शिवकुमार ने कॉरपोरेट कंपनियों से ग्रामीण शिक्षा में निवेश करने और सरकारी स्कूलों के विकास में योगदान देने की अपील की थी।
CSR फंड से बेहतर होंगी स्कूलों की सुविधाएं
राज्य सरकार इस योजना में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व यानी CSR फंड की भूमिका को महत्वपूर्ण मान रही है।कंपनियां अपने CSR कार्यक्रमों के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों में आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस तरह के संसाधनों का उपयोग ग्रामीण सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने में किया जा सकता है।सरकार चाहती है कि निजी कंपनियां और शिक्षण संस्थान स्कूलों की जरूरतों का आकलन करके विकास कार्यों में सहयोग करें।इसमें नए कमरों का निर्माण, पुराने भवनों की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, खेल सामग्री, कंप्यूटर तथा डिजिटल शिक्षण उपकरण उपलब्ध कराने जैसे कार्य शामिल हो सकते हैं।हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निजी संस्थानों से मिलने वाली सहायता का उपयोग कितनी पारदर्शिता से किया जाता है और उसका लाभ विद्यार्थियों तक किस हद तक पहुंचता है।
ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने पर भी जोर
सरकार की इस पहल का एक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारकर शहरों की ओर होने वाले पलायन को कम करना भी है।कई परिवार बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर रुख करते हैं। इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और गांवों के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या प्रभावित हो सकती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में ही बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने घरों से दूर नहीं जाना पड़े।बेंगलुरु जिले में कुछ निजी संस्थानों और कंपनियों ने स्कूलों के विकास में सहयोग की पहल की है। इनमें प्रेस्टीज और एम्बेसी जैसे संस्थानों का भी उल्लेख किया गया है। सरकार अब इस मॉडल को राज्य के अन्य जिलों तक पहुंचाना चाहती है।
तकनीकी शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा
कर्नाटक सरकार सरकारी स्कूलों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा देना चाहती है।राज्य सरकार ने इससे पहले छठी कक्षा से विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से संबंधित शिक्षा उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर काम करने की बात कही थी।इसके साथ ही सरकारी स्कूलों को कर्नाटक पब्लिक स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।इन प्रयासों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक तकनीक और नए कौशल से परिचित कराना है।
सरकारी और निजी संस्थानों की साझेदारी से बदलाव की उम्मीद
शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी और निजी संस्थानों का सहयोग विद्यार्थियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। निजी स्कूलों के पास उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों और अनुभव का उपयोग सरकारी स्कूलों की व्यवस्था मजबूत करने में किया जा सकता है।हालांकि, शिक्षाविदों के दृष्टिकोण से केवल भवन और उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए योग्य शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित पढ़ाई, विद्यार्थियों की उपस्थिति और सीखने के परिणामों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि निजी संस्थानों की भागीदारी से सरकारी स्कूलों की सार्वजनिक जिम्मेदारी कमजोर न हो। स्कूलों का प्रशासन, विद्यार्थियों के अधिकार और शिक्षा की समान उपलब्धता सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बने रहनी चाहिए।फिलहाल, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की इस पहल से ग्रामीण सरकारी स्कूलों में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप निजी संस्थानों को जोड़ा जाता है और विकास कार्यों की नियमित निगरानी होती है, तो हजारों विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है।अब देखना होगा कि राज्य सरकार कितनी तेजी से 1,000 स्कूलों को निजी संस्थानों से जोड़ पाती है और इस योजना का वास्तविक लाभ ग्रामीण विद्यार्थियों तक कब पहुंचता है।
Next Story





