
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक जर्मन महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु के सेंट मार्था हॉस्पिटल को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। महिला ने आरोप लगाया है कि अस्पताल उसके जन्म और जैविक माता-पिता से जुड़ी जानकारी देने से इनकार कर रहा है, जिससे उसे मानसिक और भावनात्मक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यह मामला जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की सिंगल जज बेंच के समक्ष आया, जहां वेस्ट जर्मनी के विस्बाडेन की रहने वाली 48 वर्षीय अनीता वीसेंट की रिट याचिका पर सुनवाई हुई।
अनीता ने अपनी याचिका में बताया कि उनका जन्म भारत में हुआ था और बाद में उन्हें एक जर्मन दंपति लुट्ज़ जोआचिम वीसेंड और सिग्रिड वीसेंड ने गोद लिया था। यह गोद लेने की प्रक्रिया 1978 में सेंट मार्था हॉस्पिटल के माध्यम से हुई थी। इसके बाद बैंगलोर सेशंस कोर्ट ने 9 अगस्त 1978 को गार्जियन्स एंड पैट्रन्स एक्ट, 1890 की धाराओं के तहत दंपति को उनकी कानूनी अभिभावकता प्रदान की थी।
याचिका के अनुसार, अनीता का जन्म 3 मार्च 1978 को हुआ था और उनकी मां का निधन 26 मार्च 1978 को स्वास्थ्य कारणों से हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि रिकॉर्ड में उनके पिता का केवल अस्पष्ट उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण बच्चे को अस्पताल में छोड़ा गया था, लेकिन वास्तविक माता-पिता की पहचान स्पष्ट नहीं की गई है।
अनीता का कहना है कि वे कई बार भारत आकर अपने जैविक माता-पिता की जानकारी प्राप्त करने के लिए सेंट मार्था हॉस्पिटल गईं, लेकिन उन्हें कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका दावा है कि वे वर्षों से अपनी असली पहचान और परिवार की खोज में लगी हुई हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि गोद लेने की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे सरेंडर लेटर, माता-पिता की सहमति और मेडिकल रिकॉर्ड को छिपाया गया या उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके अलावा, यह भी दावा किया गया कि संबंधित संस्थाओं ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में लापरवाही बरती है।
महिला ने आशंका जताई है कि गोद लेने की प्रक्रिया में हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 के प्रावधानों का उल्लंघन भी हुआ हो सकता है।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट मार्था हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई में अस्पताल से विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी।





