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कर्नाटक में CM पद की दावेदारी पर बोले जी. परमेश्वर, कहा- मुख्यमंत्री का पद खाली नहीं

Kavita2
12 Oct 2026 11:05 AM IST
कर्नाटक में CM पद की दावेदारी पर बोले जी. परमेश्वर, कहा- मुख्यमंत्री का पद खाली नहीं
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तुमकुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने रविवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का पद खाली नहीं है, इसलिए फिलहाल इस पद के लिए दावेदारी का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि राजनीति में धार्मिक नेताओं का आशीर्वाद और लोगों की इच्छाएं अपनी जगह हैं, लेकिन राजनीतिक फैसले पार्टी की परंपराओं, नियमों और व्यवस्था के अनुसार लिए जाते हैं।

डॉ. जी. परमेश्वर रविवार को तुमकुरु के जूनियर कॉलेज ग्राउंड में आयोजित तुमकुरु दशहरा समारोह का उद्घाटन करने पहुंचे थे। कार्यक्रम में सिद्धागंगा मठ के श्री सिद्धलिंग स्वामीजी समेत कई धार्मिक नेता मौजूद थे। उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे मुख्यमंत्री बनने को लेकर धार्मिक नेताओं की ओर से दिए जा रहे आशीर्वाद के बारे में सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चा पर स्थिति स्पष्ट की।

मुख्यमंत्री पद खाली नहीं, इसलिए दावेदारी का सवाल नहीं

पत्रकारों से बातचीत में डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि वर्तमान में मुख्यमंत्री का पद खाली नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी की बात करना उचित नहीं है। उनके इस बयान को कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

उन्होंने इस विषय पर किसी तरह की राजनीतिक अटकल को आगे बढ़ाने के बजाय पद की मौजूदा स्थिति पर जोर दिया। उनका कहना था कि जब मुख्यमंत्री का पद रिक्त ही नहीं है, तो उस पद के लिए दावेदारी का प्रश्न नहीं उठता।

कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद और नेतृत्व को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। ऐसे माहौल में उपमुख्यमंत्री का यह बयान उनके रुख को स्पष्ट करता है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में मुख्यमंत्री पद को लेकर भविष्य की किसी राजनीतिक संभावना पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की।

धार्मिक नेताओं के आशीर्वाद पर क्या बोले परमेश्वर?

डॉ. जी. परमेश्वर से जब पूछा गया कि धार्मिक नेता उन्हें मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद दे रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि स्वामीजी का आशीर्वाद देना और लोगों की ओर से अपनी इच्छा व्यक्त करना स्वाभाविक है।

उन्होंने धार्मिक नेताओं के आशीर्वाद को सम्मान के साथ स्वीकार करने की बात कही, लेकिन साथ ही राजनीति की प्रक्रिया को अलग बताया। उनके अनुसार, धार्मिक आशीर्वाद और लोगों की व्यक्तिगत इच्छाएं अपनी जगह हैं, जबकि राजनीतिक निर्णयों का आधार पार्टी की परंपराएं और नियम होते हैं।

परमेश्वर की इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट हुआ कि वह धार्मिक नेताओं के आशीर्वाद को राजनीतिक पद के दावे के रूप में पेश नहीं करना चाहते। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राजनीतिक पद को लेकर निर्णय तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाता है।

राजनीति में पार्टी के नियम और परंपराएं महत्वपूर्ण

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति की अपनी परंपराएं, नियम और पार्टी प्रणाली होती है। इनका पालन करना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति को राजनीतिक जिम्मेदारी दिए जाने का फैसला केवल व्यक्तिगत इच्छाओं या आशीर्वाद के आधार पर नहीं होता, बल्कि पार्टी की व्यवस्था के अनुसार लिया जाता है।

उनकी यह टिप्पणी मुख्यमंत्री पद से जुड़े सवाल के जवाब में आई। उन्होंने यह संकेत दिया कि राजनीति में पदों को लेकर चर्चा करते समय संगठनात्मक प्रक्रिया को ध्यान में रखना चाहिए।

डॉ. जी. परमेश्वर कर्नाटक सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री पद को लेकर उनसे सवाल किए जाना स्वाभाविक था। हालांकि, उन्होंने फिलहाल मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी ओर से कोई दावेदारी पेश नहीं की और पद खाली नहीं होने की बात दोहराई।

तुमकुरु दशहरा समारोह में पहुंचे थे उपमुख्यमंत्री

डॉ. जी. परमेश्वर रविवार को तुमकुरु के जूनियर कॉलेज ग्राउंड में आयोजित तुमकुरु दशहरा समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सिद्धागंगा मठ के श्री सिद्धलिंग स्वामीजी सहित कई धार्मिक नेता मौजूद थे।

धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री पद से जुड़ा सवाल सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई। पत्रकारों ने धार्मिक नेताओं की ओर से उन्हें मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद दिए जाने के बारे में पूछा, जिस पर उन्होंने अपना पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि स्वामीजी का आशीर्वाद देना और लोगों का अपनी इच्छा जाहिर करना सामान्य बात है, लेकिन राजनीति में पद और जिम्मेदारियां पार्टी की व्यवस्था के अनुसार तय होती हैं।

बयान से अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश

डॉ. जी. परमेश्वर के बयान को मुख्यमंत्री पद से जुड़ी चर्चाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री का पद खाली नहीं है और इसलिए अभी दावेदारी का सवाल नहीं उठता।

उनकी टिप्पणी में दो बातें प्रमुख रहीं। पहली, धार्मिक नेताओं का आशीर्वाद और लोगों की इच्छा व्यक्त करना स्वाभाविक है। दूसरी, राजनीतिक फैसले पार्टी की परंपराओं, नियमों और संगठनात्मक व्यवस्था के अनुसार होने चाहिए।

फिलहाल उपमुख्यमंत्री के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर उनकी ओर से किसी दावे की बात सामने नहीं आई है। उन्होंने राजनीतिक प्रक्रिया और मौजूदा पद की स्थिति पर जोर देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी।

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