कर्नाटक

पूर्व विधायक विरुपाक्षप्पा बेल्लारी पर 3.43 करोड़ का जुर्माना, खनन नियमों के उल्लंघन पर नोटिस

Kavita2
19 Sept 2026 4:52 PM IST
पूर्व विधायक विरुपाक्षप्पा बेल्लारी पर 3.43 करोड़ का जुर्माना, खनन नियमों के उल्लंघन पर नोटिस
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हावेरी। कर्नाटक के हावेरी जिले में पत्थर खदानों के लाइसेंस नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों में खान एवं भूविज्ञान विभाग की कार्रवाई जारी है। विभाग ने ब्यादगी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और भाजपा के हावेरी जिला अध्यक्ष विरुपाक्षप्पा बेल्लारी पर 3.43 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। विभाग ने उन्हें नोटिस भी जारी किया है। यह कार्रवाई कर्नाटक स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशंस सेंटर (KSRSAC) के ड्रोन सर्वे और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर की गई है।

इससे पहले राज्य के चीनी एवं कपड़ा मंत्री तथा हावेरी जिले के प्रभारी मंत्री रुद्रप्पा लमानी को भी उनकी खदान से जुड़े लाइसेंस नियमों के कथित उल्लंघन पर करीब तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। विभाग ने लमानी को राशि चुकाने के लिए छह महीने का समय दिया है और तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा दी गई है।

ड्रोन सर्वे के बाद सामने आए मामले

हावेरी जिले में पत्थर खदानों के संचालन और लाइसेंस की शर्तों का पालन जांचने के लिए KSRSAC ने ड्रोन आधारित तकनीकी सर्वे किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, यह सर्वे 2022 से 2024 के बीच किया गया और इसकी रिपोर्ट अप्रैल 2026 में सरकार को सौंपी गई। इसमें खदानों की वास्तविक सीमाओं, निकाले गए पत्थर की मात्रा और स्वीकृत क्षेत्र से बाहर हुई कथित गतिविधियों का आकलन किया गया।

ड्रोन से जुटाए गए आंकड़ों का खान एवं भूविज्ञान विभाग के रिकॉर्ड से मिलान किया गया। इसके बाद उन खदान संचालकों को नोटिस जारी किए गए, जिनके मामले में लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन का आरोप सामने आया।

विभागीय कार्रवाई के दायरे में पूर्व विधायक विरुपाक्षप्पा बेल्लारी का मामला भी आया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके मामले में विभाग ने 3.43 करोड़ रुपये का जुर्माना तय करते हुए नोटिस जारी किया है।

तय सीमा से बाहर खनन का आरोप

विरुपाक्षप्पा बेल्लारी पर आरोप है कि खनन के लिए आवंटित क्षेत्र की निर्धारित सीमा से बाहर जाकर पत्थर निकाला गया। पड़ोसी जमीन पर अतिक्रमण कर अतिरिक्त खनन किए जाने का आरोप भी विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया है। इन आरोपों के आधार पर खान एवं भूविज्ञान विभाग ने जुर्माने की राशि निर्धारित की है।

हालांकि जुर्माने का नोटिस विभागीय कार्रवाई है। इसे अपने आप में किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। नोटिस के खिलाफ संबंधित पक्ष के पास उपलब्ध कानूनी या विभागीय उपाय भी मामले के अगले चरण को प्रभावित कर सकते हैं।

46 संचालकों पर 26.1 करोड़ का जुर्माना

हावेरी जिले में की गई जांच का दायरा केवल किसी एक राजनेता या खदान संचालक तक सीमित नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में विभागीय अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जिले में 46 खदान और क्रशर संचालकों पर कुल 26.1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कार्रवाई में अधिक खनन, लाइसेंस क्षेत्र से बाहर खनन और आसपास की जमीन पर कथित अतिक्रमण जैसे मामले शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, हावेरी, ब्यादगी, राणेबेन्नूर, शिग्गांव और हंगल तालुकों में 68 लाइसेंसधारी खदान एवं क्रशर संचालकों की गतिविधियों की जांच की गई। इनमें 22 के मामले में स्वीकृत क्षेत्र और अनुमत मात्रा से संबंधित शर्तों का पालन पाया गया, जबकि 46 के खिलाफ कार्रवाई की गई।

मंत्री रुद्रप्पा लमानी पर भी कार्रवाई

इससे एक दिन पहले मंत्री रुद्रप्पा लमानी पर लगभग तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की खबर सामने आई थी। राणेबेन्नूर तालुक के हुनसिकट्टी के पास स्थित उनकी खदान के मामले में निर्धारित लाइसेंस क्षेत्र से बाहर और अनुमत सीमा से अधिक पत्थर निकालने का आरोप लगाया गया है।

लमानी को जारी नोटिस में छह महीने के भीतर तीन किस्तों में जुर्माना चुकाने का समय दिया गया है। लमानी ने मीडिया से कहा है कि वह जुर्माना भरने के लिए तैयार हैं, लेकिन विभाग को पहले उनकी खदान में हुए उल्लंघनों का विवरण दिखाना चाहिए।

इस तरह विभाग की कार्रवाई में सत्तारूढ़ दल के मंत्री के साथ पूर्व भाजपा विधायक से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

ऐसे तय की जा रही जुर्माने की राशि

विभागीय सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, लाइसेंस प्राप्त क्षेत्र के भीतर अनुमत सीमा से अधिक पत्थर निकालने पर प्रति टन 70 रुपये की रॉयल्टी पेनल्टी निर्धारित की गई है। वहीं स्वीकृत सीमा पार कर अतिक्रमित जमीन से पत्थर निकालने के मामले में यह दर दोगुनी यानी 140 रुपये प्रति टन बताई गई है।

ड्रोन सर्वे से प्राप्त मैपिंग और विभाग के रिकॉर्ड की तुलना के आधार पर खनन की सीमा और मात्रा का आकलन किया गया। इसके बाद अलग-अलग संचालकों के लिए जुर्माने की राशि तय की गई।

छह महीने में भुगतान का समय

जिन खदान संचालकों को नोटिस दिए गए हैं, उन्हें जुर्माना जमा करने के लिए छह महीने का समय दिए जाने की जानकारी सामने आई है। भुगतान तीन किस्तों में किया जा सकता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने की स्थिति में लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया सहित आगे की कार्रवाई हो सकती है।

दूसरी तरफ खदान और क्रशर संचालकों के संगठन ने जुर्माने के तरीके पर आपत्ति जताई है। संगठन का दावा है कि कार्रवाई से पहले उन्हें उल्लंघनों का पर्याप्त विवरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए और जुर्माने की गणना की प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए।

अब नोटिस पर जवाब का इंतजार

पूर्व विधायक विरुपाक्षप्पा बेल्लारी पर 3.43 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बाद अब उनके जवाब और आगे की विभागीय प्रक्रिया पर नजर रहेगी। उपलब्ध रिपोर्ट में उनकी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल हावेरी जिले में ड्रोन सर्वे के आधार पर खदानों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई ने खनन नियमों के अनुपालन का मुद्दा फिर चर्चा में ला दिया है। विभाग ने कई संचालकों को नोटिस जारी किए हैं, जबकि खदान संचालक जुर्माने के आकलन के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में नोटिस पर संबंधित पक्षों के जवाब और विभाग की अगली कार्रवाई के बाद ही इन मामलों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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