कर्नाटक

पूर्व मंत्री शिवानंद कौजलागी का निधन, कर्नाटक की राजनीति में शोक की लहर

Ratna Netam
30 Oct 2026 5:08 PM IST
पूर्व मंत्री शिवानंद कौजलागी का निधन, कर्नाटक की राजनीति में शोक की लहर
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बेंगलुरु। कर्नाटक के वरिष्ठ राजनेता, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद शिवानंद हेमप्पा कौजलागी का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उन्होंने बेलगावी जिले के बैलहोंगल स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से कर्नाटक के राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और हावेरी से सांसद बसवराज बोम्मई ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने एक वरिष्ठ नेता और अनुभवी मार्गदर्शक खो दिया है। बोम्मई ने कौजलागी के लंबे राजनीतिक जीवन, जनसेवा और ग्रामीण विकास में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।बसवराज बोम्मई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि शिवानंद कौजलागी ने अपने सार्वजनिक जीवन में राजनीति, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक में सड़क निर्माण, आधारभूत सुविधाओं और ग्रामीण विकास से जुड़ी पहलों में उनकी भूमिका को याद किया।
बोम्मई ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री के रूप में कौजलागी ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए काम किया था। उनके कार्यकाल में सड़क संपर्क और विकास से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि कौजलागी का राजनीतिक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।शिवानंद कौजलागी लंबे समय तक कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे। वह बेलगावी जिले के बैलहोंगल विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने वर्ष 1985, 1989 और 1994 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की थी। इसके बाद 1994 में जनता दल की सरकार के दौरान उन्हें लोक निर्माण विभाग का मंत्री बनाया गया।
मंत्री के रूप में उन्होंने सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़े विकास कार्यों पर ध्यान दिया। विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक के ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सक्रियता को याद किया जाता है। वर्ष 1996 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर बेलगावी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर संसद पहुंचे। इस प्रकार उन्होंने राज्य विधानसभा और लोकसभा दोनों में जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य किया।शिवानंद कौजलागी की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं थी, बल्कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह प्रतिष्ठित केएलई सोसाइटी के अध्यक्ष रह चुके थे। यह संस्था कर्नाटक में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्य करती है।
बसवराज बोम्मई ने अपने शोक संदेश में कौजलागी के शैक्षणिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिले।कौजलागी के सामाजिक और शैक्षणिक योगदान के लिए उन्हें कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। यह राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है। शिक्षा, सहकारिता और समाजसेवा के क्षेत्रों में उनके योगदान को व्यापक रूप से याद किया जा रहा है।
उनके निधन पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि कौजलागी ने राजनीति, शिक्षा, सहकारिता और समाजसेवा के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवानंद कौजलागी ने तीन बार विधायक और एक बार सांसद के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया। मंत्री के रूप में भी उन्होंने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शिवकुमार ने कहा कि उनका निधन केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए भी बड़ी क्षति है।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए उनके परिवार, रिश्तेदारों, समर्थकों और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।शिवानंद कौजलागी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह लगभग तीन महीने से अस्वस्थ थे और अपने आवास पर आराम कर रहे थे। पिछले करीब एक दशक से वह सक्रिय राजनीति से भी दूर थे।
उनके निधन की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता, समर्थक, रिश्तेदार और परिचित उनके आवास पहुंचे। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।शिवानंद कौजलागी अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री सहित परिवार छोड़ गए हैं। उनके पुत्र महांतेश कौजलागी वर्तमान में बैलहोंगल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं, जबकि दूसरे पुत्र बसवराज कौजलागी भी कांग्रेस की राजनीति से जुड़े हुए हैं।
महांतेश कौजलागी ने अपने पिता के निधन पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने पिता को अपना मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनके आदर्श, त्याग और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।उन्होंने कहा कि उनके पिता ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा, सहकारिता और समाजसेवा के लिए समर्पित किया। परिवार के अनुसार, शिवानंद कौजलागी का अंतिम संस्कार शनिवार, 31 अक्टूबर को सुबह 11 बजे बैलहोंगल में अनिगोल रोड स्थित श्मशान भूमि पर किया जाएगा।
शिवानंद कौजलागी का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने विधानसभा से लेकर संसद तक क्षेत्र की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया। उत्तर कर्नाटक में सड़क संपर्क, ग्रामीण सुविधाओं और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को उनके समर्थक महत्वपूर्ण मानते हैं।विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से व्यक्त शोक संदेश यह दर्शाते हैं कि कौजलागी को दलगत राजनीति से अलग भी एक अनुभवी जनप्रतिनिधि के रूप में सम्मान प्राप्त था। उनके निधन के बाद कर्नाटक के राजनीतिक और सामाजिक जगत में उनकी सार्वजनिक सेवाओं को याद किया जा रहा है।
बसवराज बोम्मई ने भी अपने श्रद्धांजलि संदेश के माध्यम से उनके व्यक्तित्व और कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि राज्य ने एक ऐसा अनुभवी मार्गदर्शक खो दिया है, जिसने राजनीति के साथ शिक्षा और ग्रामीण विकास में योगदान दिया।शिवानंद कौजलागी के निधन के साथ कर्नाटक की राजनीति का एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि, जनप्रतिनिधि, मंत्री, सांसद और शैक्षणिक संस्था के पदाधिकारी के रूप में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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