
शिवमोग्गा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पारंपरिक रूप से खेती कर रहे किसानों को वन अतिक्रमण के संबंध में कोई नया नोटिस जारी न किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि किसी भी नए वन अतिक्रमण को अनुमति नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली में आयोजित जनसंवाद के दौरान यह बात कही। यह कार्यक्रम पश्चिमी घाट से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और उसके मलनाड क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं को सुनने के लिए आयोजित किया गया था।
जिला प्रशासन की ओर से आयोजित बैठक में स्थानीय किसान, आम नागरिक, पर्यावरण से जुड़े प्रतिनिधि और निर्वाचित जनप्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याएं और सुझाव सुने। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय निवासियों की आजीविका और भूमि से जुड़े अधिकारों को भी ध्यान में रखेगी।
शिवकुमार ने कहा कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, जमीन और पर्यावरण की रक्षा करना जरूरी है। साथ ही मलनाड क्षेत्र में वर्षों से रह रहे लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने वन विभाग से कहा कि पुराने और पारंपरिक रूप से खेती कर रहे लोगों के खिलाफ नए नोटिस जारी नहीं किए जाएं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नए अतिक्रमण की अनुमति होगी। सरकार दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाना चाहती है।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के आधार पर पश्चिमी घाट के कुछ क्षेत्रों को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव को लेकर मलनाड के लोगों में लंबे समय से चिंता बनी हुई है। स्थानीय किसानों और प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था का प्रभाव उनकी जमीन, खेती, आवास और आजीविका पर पड़ सकता है। बैठक में इन्हीं आशंकाओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोई कदम उठाने से पहले स्थानीय लोगों की राय को महत्व देगी। उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाकों के लोगों से बातचीत की जाएगी और स्थानीय विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों की राय भी ली जाएगी। इसके बाद मामले पर विशेष चर्चा कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। शिवकुमार ने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए जिसमें किसानों को अपना क्षेत्र छोड़कर पलायन करना पड़े।
बैठक में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के तहत चिन्हित क्षेत्रों का जमीनी स्तर पर भौतिक सर्वे कराने की मांग भी उठी। कुछ प्रतिनिधियों ने केरल मॉडल की तर्ज पर सर्वे कराने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस सुझाव पर विचार करेगी। रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई सैटेलाइट और GPS आधारित मैपिंग को लेकर भी स्थानीय प्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं और वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए फिजिकल सर्वे की मांग की है।
सरकार एक तकनीकी और विशेषज्ञ समिति गठित करने की संभावना पर भी विचार कर सकती है। इसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति, आबादी, वन क्षेत्र और स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुझावों पर विस्तार से चर्चा के बाद ही सरकार अपना अगला कदम तय करेगी।
शिवकुमार ने वन अधिकार से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार स्थानीय समुदायों और लंबे समय से जमीन पर खेती करने वाले लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेगी। ‘बगैर हुकुम’ के तहत भूमि अधिकार और खेती करने वालों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर भी सरकार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने मलनाड क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने मलनाड और 364 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए नई पर्यटन नीति तैयार करने का फैसला किया है। इसमें इको-टूरिज्म को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का है।
कार्यक्रम में जिला प्रभारी मंत्री मधु बंगारप्पा ने कहा कि सरकार मलनाड के निवासियों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करेगी। वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष समेत वन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने की बात कही। शरावती परियोजना से प्रभावित लोगों के भूमि अधिकार से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई।
सांसद बीवाई राघवेंद्र ने कहा कि तीर्थहल्ली, सागर और होसानगर तालुकों के 400 से अधिक गांव प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र से जुड़े दायरे में आते हैं। वहीं तीर्थहल्ली विधायक अरगा ज्ञानेंद्र ने गाडगिल और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से पैदा हुए मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर मलनाड क्षेत्र में चल रही चर्चा के बीच मुख्यमंत्री का यह निर्देश किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। एक तरफ सरकार ने पारंपरिक रूप से खेती करने वालों को नए नोटिस नहीं देने की बात कही है, तो दूसरी तरफ नए वन अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती जारी रखने का संदेश भी दिया है। सरकार अब स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की राय के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करने की बात कह रही है।





