
बेंगलुरु। शहर के होटल और रेस्टोरेंट में हाल में की गई खाद्य सुरक्षा जांच और छापेमारी ने खाने-पीने की चीजों के भंडारण और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की लेबलिंग, स्टॉक रोटेशन, शाकाहारी और मांसाहारी उत्पादों को अलग-अलग रखने, उचित तापमान बनाए रखने और स्टोरेज एरिया के रखरखाव से जुड़ी कमियां सामने आईं। अधिकारियों की कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
जांच के दौरान विशेष रूप से उन खाद्य पदार्थों के रखरखाव पर ध्यान गया, जिन्हें निश्चित तापमान और निर्धारित परिस्थितियों में रखना जरूरी होता है। इनमें मांस, सीफूड और अन्य जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं शामिल हैं। इन उत्पादों के भंडारण में तापमान का सही स्तर बनाए रखना और स्टॉक की नियमित निगरानी करना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
लेबलिंग में मिली कमियां
फूड सेफ्टी अधिकारियों की जांच में खाद्य पदार्थों की लेबलिंग को लेकर भी कमियां सामने आईं। किसी भी खाद्य उत्पाद की पहचान, उसकी वैधता और स्टोरेज से जुड़ी जानकारी सही तरीके से दर्ज होना जरूरी है। खासकर ऐसे उत्पाद जिनकी शेल्फ लाइफ कम होती है, उनमें तारीख और स्टोरेज संबंधी जानकारी का सही रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण होता है।
जांच के दौरान सामने आई कमियों में उत्पादों की पहचान और स्टॉक की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल थीं। इससे यह सवाल उठता है कि कई प्रतिष्ठानों में खाद्य सामग्री के आने, स्टोर होने और इस्तेमाल किए जाने की प्रक्रिया की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है।
स्टॉक रोटेशन में लापरवाही
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्टॉक रोटेशन है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि पहले आए खाद्य उत्पादों का इस्तेमाल पहले किया जाए, ताकि वे लंबे समय तक स्टोर में पड़े न रहें।
जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में स्टॉक रोटेशन की व्यवस्था को लेकर कमियां सामने आईं। खासकर जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को लंबे समय तक स्टोर करने की स्थिति को गंभीर माना जा रहा है।
यदि किसी होटल या रेस्टोरेंट में नया स्टॉक आने के बाद पुराना स्टॉक पीछे छूट जाता है, तो इससे पुराने खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल या खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए नियमित स्टॉक जांच और उचित रोटेशन खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है।
वेज और नॉन-वेज सामान अलग रखने में भी खामी
जांच में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के भंडारण को लेकर भी सवाल उठे। दोनों तरह के उत्पादों को उचित तरीके से अलग रखना क्रॉस-कंटैमिनेशन यानी एक खाद्य पदार्थ से दूसरे में हानिकारक तत्वों के पहुंचने के जोखिम को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
मांस और सीफूड जैसे उत्पादों के साथ काम करने वाले प्रतिष्ठानों में अलग-अलग स्टोरेज व्यवस्था और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। यदि इन उत्पादों को अन्य खाद्य पदार्थों के साथ अनुचित तरीके से रखा जाए तो खाद्य सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
तापमान नियंत्रण सबसे अहम
मांस और सीफूड जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए उचित तापमान बनाए रखना बेहद जरूरी है। तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव या निर्धारित सीमा से अधिक तापमान पर लंबे समय तक भंडारण से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
छापेमारी के दौरान तापमान नियंत्रण और स्टोरेज व्यवस्था से जुड़ी कमियों ने इस पहलू को फिर चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल रेफ्रिजरेटर या फ्रीजर उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके तापमान की नियमित निगरानी और उसका रिकॉर्ड रखना भी जरूरी है।
इंपोर्टेड मीट और सीफूड को लेकर अलग राय
हालांकि खाद्य सुरक्षा जांच के दौरान कुछ इंपोर्ट किए गए मीट और सीफूड उत्पादों को एक्सपायर्ड बताए जाने को लेकर इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने अलग पक्ष रखा है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में उत्पादों पर अंकित तारीख को देखते हुए उन्हें एक्सपायर्ड माना गया, जबकि यदि इन्हें निर्माता की बताई गई शर्तों के अनुसार सही तापमान पर स्टोर किया गया हो तो उनकी वास्तविक शेल्फ लाइफ उस तारीख से अलग हो सकती है।
इंडस्ट्री प्रतिनिधियों के अनुसार, आयातित उत्पादों की शेल्फ लाइफ और स्टोरेज परिस्थितियों को समझने के लिए निर्माता की ओर से निर्धारित मानकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। खासकर फ्रोजन मीट और सीफूड के मामले में तापमान और स्टोरेज की पूरी श्रृंखला महत्वपूर्ण होती है।
हालांकि इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने यह भी स्वीकार किया कि इस आधार पर खाद्य पदार्थों के लंबे समय तक स्टोरेज या उनकी निगरानी में लापरवाही को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
खराब होने वाली चीजों की निगरानी जरूरी
जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में केवल खरीद और इस्तेमाल के बीच का अंतराल देखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें किस तापमान पर रखा गया, कितने समय तक स्टोर किया गया और क्या उनकी नियमित जांच की गई, इन सभी पहलुओं की निगरानी जरूरी होती है।
होटल और रेस्टोरेंट में बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री का इस्तेमाल होता है। ऐसे में यदि स्टॉक का सही रिकॉर्ड न रखा जाए तो पुराना उत्पाद लंबे समय तक स्टोरेज में रह सकता है। इससे खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ कारोबार की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
सफाई और स्टोर रखरखाव पर भी सवाल
जांच के दौरान केवल खाद्य सामग्री तक ही सीमित समस्याएं सामने नहीं आईं, बल्कि स्टोरेज एरिया के रखरखाव और साफ-सफाई को लेकर भी कमियां मिलीं। खाद्य पदार्थ जहां रखे जाते हैं, वहां स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है।
स्टोर में नियमित सफाई, उचित वेंटिलेशन, खाद्य पदार्थों को जमीन से ऊपर रखना और अलग-अलग उत्पादों के लिए व्यवस्थित जगह उपलब्ध कराना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। इन मानकों में कमी होने पर खाद्य पदार्थ दूषित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
कार्रवाई के साथ सुधार पर जोर जरूरी
बेंगलुरु में हुई हालिया जांच ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के सामने खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की चुनौती को उजागर किया है। जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां कार्रवाई जरूरी है, वहीं प्रतिष्ठानों को अपनी आंतरिक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
इंडस्ट्री प्रतिनिधियों की ओर से यह स्वीकार किया जाना कि जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की लंबे समय तक स्टोरेज और निगरानी में लापरवाही उचित नहीं है, इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
अब जरूरत इस बात की है कि होटल और रेस्टोरेंट नियमित रूप से स्टॉक की जांच करें, खाद्य पदार्थों की सही लेबलिंग और रोटेशन सुनिश्चित करें, वेज और नॉन-वेज उत्पादों को अलग रखें और तापमान की निगरानी का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करें। इससे न केवल खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन बेहतर होगा, बल्कि ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।





