कर्नाटक

पथानामथिट्टा में बाढ़ का कहर, कई इलाकों में अब भी जलभराव

Kavita2
6 Aug 2026 4:04 PM IST
पथानामथिट्टा में बाढ़ का कहर, कई इलाकों में अब भी जलभराव
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पथानामथिट्टा: केरल के बाढ़ प्रभावित पथानामथिट्टा जिले में हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में अब भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। रानी, कोझेनचेरी और अरनमुला क्षेत्रों में बाढ़ का पानी उतरने लगा है, जबकि तिरुवल्ला के पश्चिमी हिस्सों में अभी भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

अपर कुट्टनाड क्षेत्र के कई इलाकों में बाढ़ का प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। यहां शायद ही कोई ऐसा घर बचा है, जो बाढ़ के पानी से प्रभावित न हुआ हो। कई घरों में अब भी पानी जमा है और लोगों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

मंगलवार रात हुई बारिश के बाद बुधवार को मौसम में सुधार हुआ और बारिश रुकने से राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आई। प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों ने प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने का काम तेज कर दिया है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग राहत शिविरों में जाने के बजाय अपने घरों में ही रह रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपने घर और सामान की सुरक्षा के लिए वहीं रुकना चाहते हैं। हालांकि, घरों में पानी भरा होने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय समूह नावों और अन्य साधनों की मदद से प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं। इनमें पीने का पानी, भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल हैं। कई जगहों पर सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण नावें ही लोगों तक पहुंचने का मुख्य माध्यम बनी हुई हैं।

बाढ़ के कारण बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। कई इलाकों में बिजली बाधित होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। बिजली नहीं होने के कारण मोबाइल चार्ज करने, रात के समय रोशनी और अन्य जरूरी कामों में दिक्कत आ रही है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में पानी कम हो रहा है, वहां सफाई और सामान्य व्यवस्था बहाल करने के प्रयास शुरू किए जा रहे हैं।

रानी, कोझेनचेरी और अरनमुला में पानी उतरने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, कई स्थानों पर कीचड़, गंदगी और क्षतिग्रस्त सामान के कारण लोगों को अपने घरों को दोबारा व्यवस्थित करने में समय लग सकता है।

तिरुवल्ला के पश्चिमी इलाकों में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अपर कुट्टनाड क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां पानी लंबे समय तक जमा रहता है। निचले इलाकों में बसे घरों में पानी भरने से स्थानीय निवासियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।

बाढ़ के दौरान स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। कई युवा और सामाजिक कार्यकर्ता राहत कार्यों में जुटे हुए हैं और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचा रहे हैं।

प्रभावित लोगों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत भोजन, साफ पानी और बिजली व्यवस्था बहाल करने की है। कई परिवारों को डर है कि पानी उतरने के बाद भी घरों की सफाई और मरम्मत में लंबा समय लगेगा।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और कहा है कि जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक सावधानी बरती जाए। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग की आगे की चेतावनियों को देखते हुए प्रशासन ने तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। राहत टीमों को जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

फिलहाल पथानामथिट्टा जिले में बाढ़ का असर कुछ इलाकों में कम हुआ है, लेकिन अपर कुट्टनाड और तिरुवल्ला के प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास का काम जारी है। प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के प्रयासों से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।

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