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कर्नाटक के चिक्कोडी-निप्पनी में बाढ़ जैसे हालात; कई पुल डूबे

Kavita2
7 July 2026 11:41 AM IST
कर्नाटक के चिक्कोडी-निप्पनी में बाढ़ जैसे हालात; कई पुल डूबे
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Karnataka कर्नाटक: महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों में भी दिखाई देने लगा है। तेज बारिश के कारण कृष्णा, वेदगंगा और दूधगंगा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है, जिससे कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिक्कोडी और निप्पनी तालुकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

नदियों में पानी बढ़ने के कारण कई महत्वपूर्ण पुल जलमग्न हो गए हैं। इससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ है और कई गांवों के बीच संपर्क टूट गया है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

कृष्णा नदी में बढ़ा जलस्तर

चिक्कोडी तालुक के कल्लोल क्षेत्र के पास कृष्णा नदी में पानी का बहाव काफी बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, नदी में करीब 60 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र के राजापुर बैराज से भी करीब 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर और बढ़ गया है।

पानी की तेज आवक के कारण नदी किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

कई पुल पानी में डूबे

जलस्तर बढ़ने के कारण चिक्कोडी तालुक में कल्लोल और यादूर गांवों को जोड़ने वाला लो-लेवल पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है। पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण लोगों की आवाजाही रोक दी गई है।

यह पुल आसपास के गांवों के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। पुल डूबने के बाद ग्रामीणों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई जगहों पर सड़क संपर्क प्रभावित होने से स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र में राजापुर-जुगल पुल भी कृष्णा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण जलमग्न हो गया है। पुल पर पानी आने से यातायात प्रभावित हुआ है और प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर आवाजाही पर रोक लगा दी है।

पश्चिमी घाट में लगातार बारिश का असर

मौसम की स्थिति के कारण महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश हो रही है। पहाड़ी इलाकों में अधिक वर्षा होने से नदियों और जलाशयों में तेजी से पानी जमा हो रहा है। इसका सीधा असर सीमा से लगे कर्नाटक के क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

कृष्णा, वेदगंगा और दूधगंगा जैसी प्रमुख नदियों में जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है।

प्रशासन अलर्ट, हालात पर नजर

बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं। अधिकारियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया जा रहा है और स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे डूबे हुए पुलों या तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करें। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां की गई हैं।

ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

पुलों के डूबने और सड़क संपर्क बाधित होने से सीमावर्ती गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रोजमर्रा के काम, स्कूल जाने वाले छात्रों और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को लंबा रास्ता तय करके अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।

राहत और निगरानी जारी

फिलहाल प्रशासन की ओर से राहत और निगरानी का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर में किसी भी बदलाव पर नजर रखी जा रही है। यदि स्थिति और खराब होती है तो प्रभावित इलाकों में राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।

महाराष्ट्र और कर्नाटक के सीमावर्ती क्षेत्रों में हर साल मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति बनती है। इस बार भी पश्चिमी घाट में हुई भारी बारिश के कारण नदियां खतरे के निशान की ओर बढ़ रही हैं।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते जलस्तर को नियंत्रित करना और प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन को सुरक्षित बनाए रखना है

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