
गदग। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने और मध्याह्न भोजन को अधिक आकर्षक बनाने के लिए शुरू किए गए ‘अमृत भोजन’ कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को नियमित मिड-डे मील के साथ विशेष अवसरों पर मीठा भोजन दिया जाता है। पांच साल पहले गदग और रोना तालुका के कुछ स्कूलों में प्रयोग के तौर पर शुरू की गई इस पहल को सफलता मिलने के बाद पूरे जिले के सरकारी स्कूलों में लागू कर दिया गया है।
‘अमृत भोजन’ को स्थानीय स्तर पर ‘मीठा खाना’ भी कहा जाता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक मध्याह्न भोजन के साथ त्योहारों और महत्वपूर्ण अवसरों पर मिठाई उपलब्ध कराना है। स्कूलों में कार्यक्रम शुरू होने के बाद कक्षाओं से अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी गई। इसी परिणाम को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों ने कार्यक्रम का दायरा बढ़ाने का फैसला किया।
यह प्रयोग करीब पांच साल पहले गदग और रोना तालुका के चयनित सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया था। शुरुआत में इसका स्वरूप सीमित था और कुछ विशेष दिनों पर ही बच्चों को मध्याह्न भोजन के साथ मिठाई दी जाती थी। समय बीतने के साथ स्कूलों में इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ इसमें भाग लेना शुरू किया और विशेष भोजन वाले दिनों में बच्चों की उपस्थिति भी बेहतर दिखाई देने लगी।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रावण महीने में हुई थी। उस दौरान कुछ स्थानीय लोग ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मिड-डे मील के साथ मिठाइयां उपलब्ध कराने के लिए आगे आए। इन लोगों ने स्वेच्छा से मिठाइयों का खर्च उठाया और बच्चों को भोजन के साथ कुछ मीठा परोसा गया। बच्चों की खुशी और कार्यक्रम को मिली अच्छी प्रतिक्रिया के बाद इसे आगे जारी रखने पर विचार किया गया।
प्रारंभिक प्रयास में स्थानीय नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके सहयोग से ग्रामीण स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को त्योहार जैसा अनुभव मिला। इसके बाद स्कूल विकास एवं निगरानी समितियों ने भी इस पहल में रुचि दिखाई। समितियों ने कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से जारी रखने और इसके लिए आवश्यक राशि जुटाने पर चर्चा शुरू की।
कुछ स्कूलों के शिक्षकों ने भी इस अभियान में सहयोग दिया। शिक्षकों और स्कूल विकास एवं निगरानी समितियों ने मिलकर धन एकत्र करने का फैसला किया। इसके साथ ही कुछ स्कूलों में स्कूल विकास कोष के एक हिस्से का इस्तेमाल बच्चों के लिए मिठाइयां खरीदने में करने पर सहमति बनी। इस पहल को बाद में ‘श्रावण सिरी सिही भोजन’ नाम दिया गया।
‘सिही भोजन’ का अर्थ मीठे भोजन से है। श्रावण महीने में शुरू हुई इस व्यवस्था ने धीरे-धीरे एक नियमित कार्यक्रम का रूप ले लिया। स्कूलों में त्योहारों के साथ राज्य और राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर आयोजित समारोहों के दौरान विद्यार्थियों को मिठाइयां दी जाने लगीं। इससे स्कूलों में मनाए जाने वाले विशेष दिनों के प्रति बच्चों का उत्साह बढ़ा।
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक दिन मिठाई नहीं दी जाती, बल्कि विशेष अवसरों को इसके लिए चुना जाता है। त्योहारों के अलावा राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय महत्व के दिनों पर होने वाले आयोजनों में बच्चों को मध्याह्न भोजन के साथ मीठा व्यंजन मिलता है। इस व्यवस्था ने स्कूल के आयोजनों को विद्यार्थियों के लिए अधिक आनंददायक बना दिया है।
सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का उद्देश्य विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ उन्हें नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। ‘अमृत भोजन’ के माध्यम से इसी व्यवस्था में एक नया और आकर्षक हिस्सा जोड़ा गया। विशेष अवसरों पर मिलने वाली मिठाई ने बच्चों के बीच कार्यक्रम को लोकप्रिय बनाया और स्कूल आने के प्रति उनका उत्साह बढ़ाया।
गदग और रोना तालुका में शुरू हुए प्रयोग के दौरान स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया और उनकी उपस्थिति पर ध्यान दिया। कार्यक्रम से जुड़े लोगों के अनुसार मीठा भोजन शुरू होने के बाद कक्षाओं में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम हुई। इस बदलाव को कार्यक्रम की सफलता के रूप में देखा गया।
प्रयोग के सफल रहने के बाद इसे केवल दो तालुका तक सीमित नहीं रखने का फैसला किया गया। अब ‘अमृत भोजन’ कार्यक्रम का विस्तार जिले के सभी सरकारी स्कूलों में किया गया है। इससे अधिक संख्या में विद्यार्थियों को त्योहारों और महत्वपूर्ण आयोजनों पर मध्याह्न भोजन के साथ मिठाइयां मिल रही हैं।
इस पहल की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत किसी बड़े बजट या व्यापक सरकारी योजना के रूप में नहीं हुई थी। कुछ स्थानीय लोगों ने स्वेच्छा से बच्चों के लिए मिठाइयों का खर्च उठाया और वहीं से कार्यक्रम की नींव पड़ी। बाद में स्कूल विकास समितियों और शिक्षकों के सहयोग से इसे व्यवस्थित रूप दिया गया।
स्थानीय सहयोग से शुरू हुई यह पहल स्कूल और समुदाय के बीच जुड़ाव का उदाहरण बनकर सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, शिक्षकों और स्कूल विकास समितियों ने मिलकर बच्चों के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। धन एकत्र करने और स्कूल विकास कोष से राशि उपलब्ध कराने के फैसले ने इसे लगातार संचालित करने में मदद की।
‘अमृत भोजन’ ने सरकारी स्कूलों के विशेष आयोजनों को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहने दिया। मिठाई मिलने से बच्चों की भागीदारी और रुचि बढ़ी। इसके साथ ही विद्यार्थियों को त्योहारों तथा राज्य और राष्ट्रीय महत्व के अवसरों के बारे में जानने और सामूहिक रूप से समारोह मनाने का मौका मिला।
पांच साल पहले सीमित स्तर पर शुरू हुआ ‘श्रावण सिरी सिही भोजन’ अब पूरे जिले के सरकारी स्कूलों तक पहुंच चुका है। विद्यार्थियों की गैरहाजिरी में आई कमी और कार्यक्रम को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया इसके विस्तार का प्रमुख आधार बनी। स्थानीय नागरिकों, शिक्षकों और स्कूल विकास एवं निगरानी समितियों के सहयोग से शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील व्यवस्था का आकर्षक हिस्सा बन गया है।





