
कारवार: उत्तर कन्नड़ में दो अलग-अलग घटनाओं में पांच मछुआरों की मौत हो गई। इन मछुआरों की मौत 'चमन' मछली (जिसे इंडियन स्कैड या टोंका भी कहा जाता है) के सड़ने से निकली जहरीली गैसों के कारण हुई। इस घटना के बाद, प्रशासन ने जिले भर के मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों (फिशिंग हार्बर) के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं। कर्नाटक के तट पर बड़ी मात्रा में पकड़ी जाने वाली इस मछली का इस्तेमाल फिश मील, फिश ऑयल और जानवरों का चारा बनाने में किया जाता है। लेकिन, अगर इसे ऐसी जगह पर रखा जाए जहाँ हवा आने-जाने का सही इंतजाम न हो, तो सड़ने पर यह मछली जानलेवा साबित हो सकती है।
उत्तर कन्नड़ जिले में चार दिनों के भीतर दो अलग-अलग घटनाओं में पांच मछुआरों की जान चली गई। 27 अक्टूबर को गोकर्ण-तदादी बंदरगाह पर तीन मछुआरों की मौत हुई, जबकि 31 अक्टूबर को मुदागा में दो मछुआरों की जान गई। दोनों ही मामलों में, मछुआरे स्टोरेज (भंडारण) की जगह से 'चमन' मछली निकालते समय जहरीली गैसों की चपेट में आ गए थे।
इन घटनाओं के बाद, एहतियात के तौर पर कारवार, कुमटा, बैलेकेरे और होन्नावर के मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों पर जागरूकता बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में मत्स्य विभाग, तटीय सुरक्षा पुलिस, स्थानीय पुलिस, बंदरगाह विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के अधिकारियों के साथ-साथ मछली पकड़ने वाली नावों के मालिकों ने भी हिस्सा लिया।
तटीय इलाकों में इस तरह की जानलेवा घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए मछुआरों और नाव मालिकों को सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सड़ती हुई 'चमन' मछली से अमोनिया और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी खतरनाक गैसें निकल सकती हैं। बंद जगहों पर मछली के सड़ने की प्रक्रिया के दौरान ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो सकता है, जो स्टोरेज टैंक या कंपार्टमेंट में जाने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
बैठक के दौरान मछुआरों को सलाह दी गई कि मछली पकड़ने के तुरंत बाद उन्हें सही तरीके से स्टोर करें और जल्द से जल्द बंदरगाह तक पहुंचाएं। साथ ही, नावों के अंदर सड़ी हुई मछलियों का कचरा जमा न होने दें और स्टोरेज टैंक में जाने से पहले यह जरूर जांच लें कि वहां कोई जहरीली गैस तो नहीं है।
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि स्टोरेज कंपार्टमेंट में जाने से पहले खतरनाक गैसों का पता लगाने के लिए 'गैस डिटेक्टर' का इस्तेमाल करें और यह सुनिश्चित करें कि वहां हवा आने-जाने का पर्याप्त इंतजाम हो। मछुआरों को यह भी चेतावनी दी गई है कि वे सांस लेने की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरणों (रेस्पिरेटरी सेफ्टी इक्विपमेंट) के बिना, किसी बंद जगह के अंदर बचाव कार्य (रेस्क्यू ऑपरेशन) करने की कोशिश न करें।
मछुआरों को यह भी बताया गया कि अगर किसी स्टोरेज जगह से बदबू नहीं आ रही है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वहां जाना सुरक्षित है।





