कर्नाटक

Bengaluru झीलों में मछलियों की मौत, सीवेज को ठहराया जिम्मेदार

Kavita2
13 July 2026 11:22 AM IST
Bengaluru झीलों में मछलियों की मौत, सीवेज को ठहराया जिम्मेदार
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Karnataka कर्नाटक: राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) ने बेंगलुरु की झीलों में लगातार सामने आ रही मछलियों की मौत की घटनाओं को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को जवाब दिया है। बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में झीलों के प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी और सीवेज को जिम्मेदार बताया है।

KSPCB ने कहा कि झीलों में बिना उपचार के पहुंचने वाला दूषित पानी पानी की गुणवत्ता को खराब कर रहा है, जिसके कारण जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और कई जगहों पर बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटनाएं सामने आई हैं।

यह जवाब NGT द्वारा बेंगलुरु की झीलों में मछलियों की मौत से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेने के बाद मांगा गया था। ट्रिब्यूनल ने कर्नाटक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा था कि झीलों में प्रदूषण रोकने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

KSPCB ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बेंगलुरु की कई झीलों में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य स्रोतों से आने वाला गंदा पानी प्रदूषण का प्रमुख कारण है। बोर्ड के अनुसार, खासतौर पर असंगठित क्षेत्रों से निकलने वाला अनुपचारित जल झीलों की स्थिति खराब कर रहा है।

प्रदूषित पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों को जीवित रहने में परेशानी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में ऑक्सीजन की कमी मछलियों की अचानक मौत का एक बड़ा कारण बन सकती है।

KSPCB ने यह भी स्वीकार किया कि झीलों में समय-समय पर गाद निकालने (डी-सिल्टिंग) का काम पर्याप्त स्तर पर नहीं हो पाया है। इसके कारण झीलों की जल धारण क्षमता प्रभावित हुई है और प्रदूषक तत्व जमा होते गए हैं।

बोर्ड ने कहा कि गाद जमा होने से झीलों की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा, गाद और कचरे के जमा होने से पानी का प्रवाह भी बाधित होता है, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है।

बेंगलुरु में झीलें लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रही हैं। शहर के तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बढ़ती आबादी और सीवेज प्रबंधन की चुनौतियों ने झीलों पर दबाव बढ़ाया है।

कई झीलों में झाग बनने, बदबू आने और मछलियों के मरने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से झीलों के संरक्षण, सीवेज ट्रीटमेंट और नियमित निगरानी की मांग उठाई है।

NGT ने KSPCB से यह भी जानकारी मांगी थी कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं। इसके जवाब में बोर्ड ने बताया कि झीलों की निगरानी की जा रही है और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

बोर्ड ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता बढ़ाने, अवैध रूप से छोड़े जा रहे गंदे पानी को रोकने और झीलों की सफाई जैसे उपायों पर काम किया जा रहा है।

हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सफाई अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना, झीलों में गंदा पानी जाने से रोकना और नियमित रूप से गाद निकालने का काम करना जरूरी है।

KSPCB की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बेंगलुरु की कई झीलों के संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ रही है। शहर की झीलें न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, बल्कि भूजल स्तर और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए भी बेहद जरूरी हैं।

बोर्ड ने NGT को बताया कि झीलों की स्थिति सुधारने के लिए संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। इसमें स्थानीय निकायों, जल संसाधन विभाग और अन्य एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

अब NGT इस मामले में KSPCB की रिपोर्ट और उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा। उम्मीद है कि ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद बेंगलुरु की झीलों को प्रदूषण से बचाने के लिए और प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

झीलों में मछलियों की मौत की घटनाएं केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं हैं, बल्कि यह शहर की जल प्रबंधन व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में झीलों की स्थिति और खराब हो सकती है।

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