
बेंगलुरु। शहर के अलग-अलग इलाकों में फुटपाथों से हटाए गए अतिक्रमण को दोबारा होने से रोकने के लिए कर्नाटक सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट मिनिस्टर कृष्णा बायरे गौडा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अतिक्रमण हटाने के बाद यदि कोई व्यक्ति या कारोबारी उसी स्थान पर दोबारा कब्जा करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि खाली कराए गए फुटपाथों और सरकारी जमीन की लगातार निगरानी भी जरूरी है।
फुटपाथों पर अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर अधिकारियों के साथ आयोजित वर्चुअल बैठक में मंत्री ने शहर में चल रही कार्रवाई की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से अतिक्रमण हटाने के बाद की स्थिति की भी नियमित निगरानी करने को कहा। उनका कहना था कि कई स्थानों पर कार्रवाई के बाद कुछ समय के भीतर ही दोबारा कब्जा कर लिया जाता है। ऐसी स्थिति में केवल अभियान चलाकर फुटपाथ खाली कराने का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाए जाने के बाद संबंधित स्थान की जिम्मेदारी तय की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां दोबारा कब्जा न हो। इसके लिए शहर के पांच नगर निगमों में पुलिस और सिविक बॉडी के अधिकारियों की संयुक्त टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश दिया गया है।
पुलिस और नगर निकाय मिलकर करेंगे निगरानी
प्रस्तावित संयुक्त टास्क फोर्स में पुलिस और नगर निकाय के अधिकारी शामिल होंगे। इसका मुख्य काम फुटपाथों और अतिक्रमण हटाए गए स्थानों की लगातार निगरानी करना होगा। टीम यह देखेगी कि जिन जगहों से कब्जे हटाए गए हैं, वहां दोबारा दुकान, ठेला, निर्माण सामग्री या अन्य किसी प्रकार का अतिक्रमण तो नहीं किया जा रहा है।
मंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कार्रवाई केवल कागजी स्तर पर न रहे। अतिक्रमण हटाने के बाद मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करते हुए दोबारा कब्जा करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
दोबारा कब्जा करने वालों पर FIR
कृष्णा बायरे गौडा ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने के बाद उसी जगह पर दोबारा कब्जा करने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंत्री के इस निर्देश का उद्देश्य अतिक्रमण करने वालों में कानून का डर पैदा करना और यह संदेश देना है कि एक बार हटाए जाने के बाद दोबारा कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि लगातार निगरानी और कानूनी कार्रवाई के जरिए फुटपाथों पर अतिक्रमण की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
‘सिर्फ कब्जा हटाना काफी नहीं’
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि केवल अतिक्रमण हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया, जिससे खाली कराई गई सरकारी जमीन और फुटपाथ दोबारा कब्जे की चपेट में न आएं।
उन्होंने कहा, “सिर्फ कब्जा हटाना काफी नहीं है। एक स्थायी सिस्टम बनाया जाना चाहिए ताकि यह पक्का किया जा सके कि खाली कराई गई जमीन पर दोबारा कब्जा न हो।”
उनके अनुसार, अतिक्रमण हटाने के अभियान को नियमित निगरानी और जवाबदेही से जोड़ना जरूरी है। यदि किसी स्थान पर बार-बार अतिक्रमण हो रहा है तो यह भी देखा जाना चाहिए कि वहां निगरानी की व्यवस्था में कहां कमी रह गई।
पैदल यात्रियों के लिए जरूरी हैं फुटपाथ
बेंगलुरु में तेजी से बढ़ते यातायात और शहरीकरण के बीच फुटपाथों की उपलब्धता पैदल यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फुटपाथों पर अतिक्रमण होने के कारण लोगों को कई बार सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे पैदल यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित होती है और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ता है।
फुटपाथों पर दुकानों, ठेलों, पार्किंग और अन्य तरह के कब्जों के कारण कई इलाकों में पैदल चलने की जगह कम हो जाती है। ऐसे में अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए पूरी तरह उपयोगी बनाए रखना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
पांच नगर निगमों में होगी निगरानी
ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र में पांच नगर निगमों के स्तर पर संयुक्त टास्क फोर्स की व्यवस्था किए जाने से निगरानी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस और सिविक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय होने से अतिक्रमण की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए नियमित समीक्षा और निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, अतिक्रमण हटाने के बाद वहां दोबारा कब्जा न हो, इसकी जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों की तय की जानी चाहिए।
सरकार के इस सख्त रुख से उम्मीद है कि बेंगलुरु में फुटपाथों पर अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को स्थायी रूप दिया जा सकेगा। अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि कार्रवाई के बाद फुटपाथ दोबारा कब्जे में न जाएं। संयुक्त टास्क फोर्स, नियमित निगरानी और दोबारा कब्जा करने वालों के खिलाफ एफआईआर की व्यवस्था इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।





