
Karnataka कर्नाटक: बिदादी के पास प्रस्तावित ग्रेटर बैंगलोर इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इस परियोजना से प्रभावित भैरमंगला और कंचुगरनहल्ली ग्राम पंचायतों के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को बेंगलुरु में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की और परियोजना की समीक्षा (रिव्यू) की मांग रखी।
किसानों का यह प्रतिनिधिमंडल ‘बैरमंगला, कंचुगरनहल्ली ग्राम पंचायत रैथा भू हितरक्षण समिति’ का हिस्सा है। किसानों ने उपमुख्यमंत्री को अपनी चिंताओं से अवगत कराते हुए कहा कि GBIT प्रोजेक्ट से उनकी जमीन, आजीविका और भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने इस मामले में किसानों के अधिकारों की रक्षा की मांग करते हुए एक औपचारिक याचिका भी सौंपी।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि परियोजना के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि और पारंपरिक जीवनशैली पर संकट उत्पन्न हो सकता है। किसानों ने कहा कि बिना उचित पुनर्वास और स्पष्ट नीति के इस तरह के बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना उनके हितों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से परियोजना की विस्तृत समीक्षा करने और प्रभावित किसानों की चिंताओं को प्राथमिकता देने की अपील की।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किसानों की बातों को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि इस मामले में कानूनी ढांचे के भीतर उचित कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा सके और किसी भी तरह का अन्याय न हो।
इस मुलाकात के बाद किसानों में कुछ हद तक उम्मीद जगी है, हालांकि वे अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और परियोजना की पारदर्शी समीक्षा की मांग पर अड़े हुए हैं।
इस बीच, GBIT प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमाया हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस सुप्रीमो एच.डी. देवेगौड़ा ने पहले ही इस परियोजना का विरोध करने की घोषणा की थी। उन्होंने संकेत दिया था कि वे किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर संघर्ष करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि GBIT परियोजना बेंगलुरु के विस्तार और शहरी विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसके साथ ही ग्रामीण समुदायों पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और मुआवजे जैसे मुद्दे इस विवाद के केंद्र में हैं।
फिलहाल, किसानों का विरोध और राजनीतिक समर्थन दोनों मिलकर इस परियोजना को लेकर दबाव बढ़ा रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।





