
Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु से करीब 30 किलोमीटर दूर बिदादी क्षेत्र में प्रस्तावित ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ (GBIT) परियोजना को लेकर किसानों और राज्य सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। ‘बैरमंगला और कुंचुगरनहल्ली क्षेत्र भू होराटा हितरक्षण संघ’ ने उपमुख्यमंत्री और बेंगलुरु विकास मंत्री D. K. Shivakumar के उस बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि 80 प्रतिशत किसान इस परियोजना के लिए सहमत हो चुके हैं।
किसान संगठन का कहना है कि यह दावा वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है और अधिकांश किसान अपनी जमीन किसी भी हालत में देने के लिए तैयार नहीं हैं। यह संगठन बिदादी के बैरमंगला और कुंचुगरनहल्ली ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 20 से अधिक गांवों का प्रतिनिधित्व करता है, जहां किसान लंबे समय से खेती पर निर्भर हैं।
किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी कृषि भूमि को बचाकर रखना चाहते हैं और इसे अगली पीढ़ी को सौंपना उनकी प्राथमिकता है। उनका कहना है कि खेती उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और किसी भी तरह का शहरीकरण या टाउनशिप परियोजना उनके जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
पूर्व बैरमंगला तालुक पंचायत सदस्य एच.जी. प्रकाश, मंडलाहल्ली गांव के किसान नागराज और अन्य किसानों ने आरोप लगाया है कि उपमुख्यमंत्री के साथ दिखाई देने वाले कुछ लोग वास्तव में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हुए हैं और वे किसानों के हितों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
किसानों ने यह भी दावा किया कि परियोजना के समर्थन में जो लोग सामने आ रहे हैं, उनमें से कुछ बड़े ज़मीन मालिक हैं, जिन्हें इस योजना से व्यक्तिगत लाभ हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, छोटे किसान और किराए पर खेती करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना उन सैकड़ों किसानों के लिए चिंता का विषय है जिनके पास सीमित भूमि है या जो दूसरों की जमीन पर खेती करके अपना जीवन यापन करते हैं। ऐसे किसानों के लिए भूमि अधिग्रहण का मतलब आजीविका पर सीधा असर होगा।
किसान संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह इस परियोजना पर दोबारा विचार करे और किसानों की वास्तविक स्थिति को समझे। उनका कहना है कि विकास योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब वे स्थानीय लोगों की सहमति और हितों के अनुरूप हों।
इस पूरे विवाद के बीच बिदादी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।





