कर्नाटक

डीके शिवकुमार के दौरे पर किसानों का हंगामा, सरकारी स्कूलों के मुद्दे पर दिखाए काले झंडे

Ratna Netam
31 Oct 2026 3:40 PM IST
डीके शिवकुमार के दौरे पर किसानों का हंगामा, सरकारी स्कूलों के मुद्दे पर दिखाए काले झंडे
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बेंगलुरु। कर्नाटक के मांड्या जिले में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के दौरे के दौरान किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के खिलाफ काले झंडे दिखाकर किसानों ने राज्य सरकार की नीतियों पर नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और प्रदर्शन कर रहे किसानों को हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में कुछ समय के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई। किसानों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।
काले झंडे दिखाने की पहले ही दी थी चेतावनी
दरअसल, किसानों के इस विरोध प्रदर्शन की तैयारी पहले से चल रही थी। कर्नाटक राज्य रैयत संघ के मांड्या जिला अध्यक्ष इंदुवालु चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री के दौरे से पहले ही काले झंडे दिखाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि 31 अक्टूबर को मांड्या पहुंचने वाले मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का विरोध किया जाएगा। किसानों की नाराजगी का प्रमुख कारण राज्य में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने और सरकारी स्कूलों को बचाने की मांग है।किसान संगठनों का आरोप है कि राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सरकारी स्कूलों के भविष्य पर संकट पैदा हो सकता है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में स्कूलों को बंद करने या उनका विलय करने के बजाय उनकी सुविधाओं और शैक्षणिक स्तर में सुधार किया जाना चाहिए।
समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग
किसान संगठनों ने कर्नाटक में सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए सरकारी स्कूलों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं, योग्य शिक्षक और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना जरूरी है।किसानों की मांग है कि कक्षा एलकेजी से पांचवीं तक के सरकारी स्कूलों में द्विभाषी माध्यम के साथ सीबीएसई मॉडल की शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा छठवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए नवोदय विद्यालयों की तर्ज पर आवासीय सीबीएसई स्कूल स्थापित करने का प्रस्ताव भी उठाया गया है।संगठनों ने स्कूल विकास एवं निगरानी समितियों (SDMC) को मिलने वाली सरकारी अनुदान राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इससे स्कूलों के विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी और स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
सरकारी स्कूलों के विलय पर भी नाराजगी
कर्नाटक में सरकारी स्कूलों के विलय का मुद्दा किसान संगठनों के विरोध की एक बड़ी वजह बना हुआ है। किसान नेताओं ने राज्य सरकार की केपीएस मैग्नेट स्कूल योजना पर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि सरकारी स्कूलों को एक साथ मिलाने की नीति से ग्रामीण इलाकों के बच्चों को अपने घर के आसपास शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।किसान संगठनों का कहना है कि यदि छोटे सरकारी स्कूलों का दूसरे बड़े स्कूलों में विलय किया जाता है, तो दूर-दराज के गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब परिवारों और उन बच्चों पर पड़ सकता है, जिनके पास परिवहन की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।संगठन ने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने और किसी भी सरकारी स्कूल को बंद या विलय करने से पहले स्थानीय अभिभावकों तथा स्कूल विकास समितियों की राय लेने की मांग की है।
आंदोलन को व्यापक बनाने की चेतावनी
किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना केवल किसानों या किसी एक संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा विषय है।इससे पहले भी मांड्या में किसान संघ, स्कूल विकास एवं निगरानी समिति के सदस्यों और विभिन्न संगठनों ने सरकारी स्कूलों को बचाने के लिए प्रदर्शन किए हैं। 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाकर सरकारी स्कूलों के विलय की योजना का विरोध किया था। उस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था।
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था रही अहम
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मांड्या दौरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन के सामने सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रही। काले झंडे दिखाने की पहले से घोषित योजना के कारण प्रशासन इस विरोध को लेकर सतर्क था। प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की।किसानों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध करना उनका अधिकार है। वहीं, पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है।मांड्या में हुआ यह विरोध कर्नाटक सरकार के सामने शिक्षा व्यवस्था को लेकर किसान संगठनों की नाराजगी को दर्शाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार सरकारी स्कूलों के विलय, समान शिक्षा नीति और ग्रामीण बच्चों की शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर उठाई गई मांगों पर क्या कदम उठाती है।फिलहाल किसानों के विरोध और हिरासत की घटना ने राज्य में शिक्षा नीति को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। किसान संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं और सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करने के बजाय सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने की अपील कर रहे हैं।
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