कर्नाटक

किसानों को नहीं मिल रही दुल्हन CM के सामने पहुंची किसानों की अनोखी फरियाद

Kavita2
6 Oct 2026 10:00 AM IST
किसानों को नहीं मिल रही दुल्हन CM के सामने पहुंची किसानों की अनोखी फरियाद
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बेंगलुरु। कर्नाटक के पेरियापटना में आयोजित प्रजासेवा कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने एक ऐसी मांग रखी गई, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। आम तौर पर जनसुनवाई कार्यक्रमों में सड़क, पानी, पेंशन, राशन और सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन इस बार एक ग्रामीण युवक ने अविवाहित किसानों और ग्रामीण युवकों की शादी में आ रही मुश्किलों का मुद्दा उठा दिया। युवक ने मुख्यमंत्री से कहा कि गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे पुरुष हैं, जिनके पास खेती की जमीन और अपना घर है, वे मेहनत भी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं।

यह घटना 3 अक्टूबर को मैसूरु जिले के पेरियापटना में आयोजित प्रजासेवा कार्यक्रम के दौरान सामने आई। युवक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार अविवाहित पुरुषों, खासकर किसानों के लिए कोई पहल करे। उसने दावा किया कि 35 से 40 वर्ष की आयु के कई पुरुष अब भी अविवाहित हैं और लगातार शादी के प्रस्ताव खारिज होने से निराश हैं। युवक की मांग सुनकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मुस्कुरा दिए और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी हल्का माहौल बन गया, लेकिन इस मांग ने ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह से जुड़ी बदलती सामाजिक परिस्थितियों पर गंभीर बहस छेड़ दी।

ग्रामीण युवक का कहना था कि खेती करने वाले पुरुषों को शादी के लिए प्राथमिकता नहीं मिल रही है। उसके अनुसार कई परिवार अपनी बेटियों की शादी ऐसे युवकों से करना चाहते हैं जिनके पास सरकारी, कॉरपोरेट या दूसरी नियमित वेतन वाली नौकरी हो। खेती की जमीन और अपना मकान होने के बावजूद किसान परिवारों के युवकों को स्थायी आय की कमी का सामना करना पड़ता है और यही बात शादी के रिश्तों में भी उनके खिलाफ जा रही है।

युवक ने मुख्यमंत्री से कहा कि किसान ही लोगों के लिए अनाज पैदा करते हैं, लेकिन उन्हीं किसानों से अपनी बेटियों की शादी करने के लिए परिवार आगे नहीं आ रहे। उसने इसे केवल व्यक्तिगत परेशानी नहीं बल्कि राज्य के हजारों ग्रामीण युवकों से जुड़ी समस्या बताया। उसका दावा था कि कुछ पुरुष लंबे समय तक शादी नहीं होने के कारण मानसिक तनाव में भी हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर चर्चा शुरू कर दी।

मुख्यमंत्री के सामने रखी गई इस मांग का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में युवक ग्रामीण पुरुषों की समस्या बताते हुए सरकार से समाधान की मांग करता दिखाई देता है। मामला वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक बदलाव से जोड़कर देखा। कुछ लोगों का कहना है कि खेती को आर्थिक रूप से असुरक्षित पेशा समझे जाने के कारण ग्रामीण युवकों को विवाह में मुश्किलें आ रही हैं, जबकि दूसरे लोग इसे लड़कियों और उनके परिवारों की बदलती प्राथमिकताओं से जोड़ रहे हैं।

कर्नाटक में इस तरह की मांग पहली बार सामने नहीं आई है। इसी साल फरवरी में कुनिगल से विधायक एचडी रंगनाथ ने तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर उन महिलाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन की मांग की थी, जो गांवों में रहने वाले और खेती पर निर्भर पुरुषों से शादी करती हैं। विधायक ने कहा था कि कृषि से जुड़े पुरुषों को शादी के लिए लड़कियां मिलने में कठिनाई हो रही है और इस समस्या को सामाजिक नीति के स्तर पर देखने की जरूरत है।

ग्रामीण कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अविवाहित किसानों के समूह भी पहले इस समस्या को उठा चुके हैं। मंड्या और उत्तर कर्नाटक के गदग जैसे जिलों में ऐसे पुरुषों ने संगठन बनाकर प्रशासन से मदद की मांग की है। उनका कहना रहा है कि पहले खेती की जमीन होना सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक मजबूती का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब नियमित मासिक वेतन वाली नौकरियों को विवाह के लिए ज्यादा महत्व मिल रहा है।

इस समस्या के पीछे केवल शादी का सवाल नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए बदलाव भी जुड़े हुए हैं। खेती की आय मौसम, फसल की कीमत, बारिश और बाजार पर निर्भर करती है। सूखा, फसल नुकसान और लागत बढ़ने जैसी स्थितियां किसानों की आमदनी को अनिश्चित बनाती हैं। इसके विपरीत सरकारी या निजी नौकरी को नियमित आय का स्रोत माना जाता है। यही आर्थिक असमानता विवाह के फैसलों में भी दिखाई देने लगी है।

शहरीकरण भी इस समस्या का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा शिक्षा और नौकरी के लिए बेंगलुरु, मैसूरु, मंगलुरु और हुबली-धारवाड़ जैसे शहरों की ओर जा रहे हैं। ऐसे में गांव में खेती करने वाले युवकों और शहरों में रहने वाली युवतियों की जीवनशैली तथा भविष्य की अपेक्षाओं में अंतर बढ़ रहा है।

पेरियापटना के प्रजासेवा कार्यक्रम में उठी यह मांग भले ही शुरुआत में हल्की-फुल्की लगी हो, लेकिन इसने राज्य में ग्रामीण युवाओं की एक वास्तविक सामाजिक चिंता को सामने ला दिया है। युवक की मांग ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता अब किसानों के निजी और पारिवारिक जीवन पर भी असर डाल रही है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्यक्रम के दौरान मांग सुनने के बाद कोई औपचारिक योजना घोषित नहीं की। फिलहाल सरकार की ओर से अविवाहित किसानों के लिए किसी विशेष विवाह योजना की घोषणा भी नहीं हुई है। इसके बावजूद वायरल वीडियो ने इस विषय को राज्यव्यापी चर्चा में ला दिया है।

कुल मिलाकर पेरियापटना में रखी गई यह फरियाद केवल एक युवक की व्यक्तिगत मांग बनकर नहीं रह गई है। यह खेती, रोजगार, गांवों से पलायन और बदलती सामाजिक प्राथमिकताओं से जुड़ी व्यापक समस्या की ओर इशारा करती है। अब देखना होगा कि सरकार इसे केवल एक अनोखी मांग मानकर छोड़ देती है या ग्रामीण युवकों की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर किसी व्यापक नीति के जरिए ध्यान देती है।

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