कर्नाटक

Bidadi टाउनशिप प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों का ‘अप्पिको’ आंदोलन तेज

Kavita2
29 Jun 2026 11:50 AM IST
Bidadi टाउनशिप प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों का ‘अप्पिको’ आंदोलन तेज
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Karnataka कर्नाटक: प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध तेज करते हुए रविवार को सैकड़ों किसानों ने ‘अप्पिको’ (पेड़ों को गले लगाना) आंदोलन शुरू किया। किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे न तो अपनी कृषि भूमि देंगे और न ही किसी भी कीमत पर पेड़ों की कटाई होने देंगे। यह विरोध प्रदर्शन पर्यावरण और जमीन बचाने की मांग को लेकर किया गया।

यह प्रदर्शन बेंगलुरु साउथ जिले में बायरमंगला के पास आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में किसानों ने एकत्र होकर पेड़ों को गले लगाकर प्रतीकात्मक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और पर्यावरण संरक्षण की मांग दोहराई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि प्रस्तावित टाउनशिप प्रोजेक्ट आगे बढ़ा तो लगभग 15 लाख (1.5 मिलियन) पेड़ प्रभावित हो सकते हैं। किसानों ने सरकार पर पर्यावरण विरोधी नीतियां अपनाने का भी आरोप लगाया और कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र का हरित आवरण गंभीर रूप से प्रभावित होगा।

यह आंदोलन कोई नया नहीं है, बल्कि यह लगभग डेढ़ साल से चल रहे विरोध का एक नया चरण है। किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, लेकिन पहले यह मुद्दा उतना चर्चा में नहीं आया था। हालांकि, टाउनशिप परियोजना को लेकर हाल ही में फिर से बहस तेज होने के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा में आ गया है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बायरमंगला जंक्शन से प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र तक मार्च भी निकाला। इस दौरान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से पेड़ों को गले लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर लिए हुए थे, जिन पर “प्रकृति हमारी है, और हमारा भविष्य भी हमारा है” जैसे नारे लिखे थे। उन्होंने क्षेत्र के ग्रीन कवर को बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सरकार से परियोजना पर पुनर्विचार करने की मांग की।

किसानों का कहना है कि यह भूमि केवल खेती के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका तर्क है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से न केवल पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि जलवायु संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।

वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते विरोध को देखते हुए स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल यह आंदोलन क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसके और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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