कर्नाटक

मंत्री के बयान पर भड़के किसान

Kavita2
20 Sept 2026 11:23 AM IST
मंत्री के बयान पर भड़के किसान
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हासन। कर्नाटक के हासन जिले में प्रभारी मंत्री के.एम. शिवलिंगेगौड़ा के एक बयान को लेकर जन-शिकायत बैठक में हंगामा हो गया। मंत्री ने कहा कि अगर सरकारी अधिकारी अपना काम समय पर पूरा करते हैं, तो जनता की ओर से उन्हें खुशी से ‘टिप’ या ‘सम्मान राशि’ देने में कोई बुराई नहीं है। उनके इस बयान पर बैठक में मौजूद किसानों और युवाओं ने सवाल उठाए और अधिकारियों को टिप देने की जरूरत पर आपत्ति जताई।

मामला उस समय सामने आया जब हासन में आयोजित ‘प्रजा सेवा आंदोलन’ के तहत जन-शिकायत बैठक में स्थानीय लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। बैठक में अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। लोगों की शिकायतें सुनी जा रही थीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों से समाधान को लेकर जानकारी ली जा रही थी। इसी दौरान सरकारी अधिकारियों के कामकाज और उन्हें अतिरिक्त राशि देने के मुद्दे पर चर्चा हुई।

मंत्री शिवलिंगेगौड़ा ने कथित तौर पर कहा कि यदि कोई सरकारी अधिकारी लोगों का काम समय पर करता है और अपनी जिम्मेदारी ठीक तरीके से निभाता है, तो लोग खुशी से उसे टिप या सम्मान राशि दे सकते हैं। मंत्री के इस कथन के बाद बैठक में मौजूद कुछ लोगों ने इस पर तत्काल आपत्ति जताई।

अलूर तालुक से आए किसान पुनीत जमीन से जुड़े एक मामले को लेकर बैठक में पहुंचे थे। उन्होंने मंत्री के बयान पर मंच के सामने ही सवाल उठाया। पुनीत ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को उनके काम के लिए सरकार की ओर से वेतन दिया जाता है। ऐसे में आम जनता को किसी अधिकारी को अतिरिक्त रकम देने की जरूरत क्यों होनी चाहिए।

किसान के सवाल के बाद बैठक में मौजूद कुछ युवाओं और अन्य लोगों ने भी उनका समर्थन किया। लोगों ने मंत्री से सवाल किया कि यदि किसी अधिकारी को उसके नियमित सरकारी काम के लिए ‘टिप’ दी जाती है, तो यह व्यवस्था रिश्वतखोरी को बढ़ावा देने वाली स्थिति पैदा कर सकती है या नहीं।

बैठक में माहौल उस समय और गरमा गया जब लोगों ने मंत्री के सामने ही अधिकारियों को अतिरिक्त राशि देने की बात पर आपत्ति दर्ज कराई। लोगों का कहना था कि सरकारी सेवाओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया और नियम होने चाहिए तथा अधिकारी का काम समय पर पूरा करना उसकी जिम्मेदारी है। इसके लिए आम नागरिक से अलग से पैसे की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

लोगों की नाराजगी को देखते हुए मंत्री शिवलिंगेगौड़ा ने अपने बयान को स्पष्ट करने और उसका बचाव करने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य रिश्वतखोरी को प्रोत्साहित करना नहीं था। उनका आशय अधिकारियों द्वारा ईमानदारी और समय पर काम करने की सराहना से था।

हालांकि, मंत्री के स्पष्टीकरण के बावजूद बैठक में मौजूद लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी रही। किसानों और युवाओं ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को उनके पद के अनुसार वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। इसलिए नागरिकों पर किसी भी तरह की अतिरिक्त राशि देने की जिम्मेदारी नहीं डाली जानी चाहिए।

‘प्रजा सेवा आंदोलन’ का उद्देश्य लोगों की शिकायतों को सुनना और संबंधित विभागों के माध्यम से उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करना है। ऐसी बैठकों में आमतौर पर भूमि, राजस्व, पेंशन, सरकारी प्रमाणपत्र, स्थानीय विकास कार्य और अन्य प्रशासनिक समस्याओं से जुड़े मामले सामने आते हैं। हासन में आयोजित बैठक में भी बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे।

जमीन से जुड़े मामलों को लेकर आने वाले किसानों के लिए सरकारी कार्यालयों में काम की समयसीमा और प्रक्रिया महत्वपूर्ण मुद्दा रहती है। किसान पुनीत का मामला भी भूमि से संबंधित बताया गया। इसी संदर्भ में अधिकारियों के काम में देरी और समय पर समाधान जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान ही मंत्री की ‘टिप’ संबंधी टिप्पणी सामने आई।

बैठक में मौजूद लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी सरकारी अधिकारी को काम समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त राशि दी जाएगी, तो इससे उन नागरिकों पर दबाव पड़ सकता है जो ऐसी राशि देने में सक्षम नहीं हैं। लोगों ने कहा कि सरकारी सेवाएं सभी नागरिकों के लिए समान नियमों के आधार पर उपलब्ध होनी चाहिए।

विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने अपने बयान को लेकर स्थिति संभालने का प्रयास किया। उन्होंने यह संकेत दिया कि उनकी बात को रिश्वत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि बैठक में मौजूद लोगों की आपत्तियों के कारण यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया।

सरकारी अधिकारियों को किसी भी तरह की अवैध राशि देने का मुद्दा कानून और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय है। सरकारी सेवाओं के बदले रिश्वत लेना या देना अलग कानूनी प्रावधानों के दायरे में आता है। ऐसे में मंत्री की टिप्पणी को लेकर लोगों की आपत्ति मुख्य रूप से इसी आशंका पर केंद्रित रही कि ‘टिप’ और अवैध भुगतान के बीच अंतर व्यवहार में कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।

हासन की इस बैठक में हुआ घटनाक्रम अब स्थानीय स्तर पर चर्चा में है। एक ओर मंत्री ने अपने बयान को अधिकारियों के अच्छे काम की सराहना से जोड़कर स्पष्ट करने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर किसानों और युवाओं ने सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त राशि देने की जरूरत पर सवाल उठाए।

फिलहाल इस पूरे मामले में मंत्री की टिप्पणी और उसके बाद बैठक में हुए विरोध ने सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि सरकारी अधिकारी अपना काम समय पर करें, यह उनकी जिम्मेदारी है और इसके लिए नागरिकों से अतिरिक्त भुगतान की अपेक्षा नहीं होनी चाहिए।

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