कर्नाटक
बेंगलुरु में विधानसभा को बम से उड़ाने का फर्जी वीडियो वायरल
Ratna Netam
21 Oct 2026 9:59 PM IST

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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार किए गए एक फर्जी वीडियो ने हड़कंप मचा दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कर्नाटक सरकार के प्रमुख प्रशासनिक भवन विधान सौधा को बम विस्फोट से उड़ाते हुए दिखाया गया था। मामला सामने आने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिहार के रहने वाले 25 वर्षीय प्रवासी मजदूर हजरत अली को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एआई तकनीक का इस्तेमाल कर धमाके का नकली वीडियो बनाने और उसे इंस्टाग्राम पर पोस्ट करने का आरोप है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी सामने आई थी और कई लोगों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने वीडियो किस उद्देश्य से बनाया था।
वीडियो में विधान सौधा को उड़ाते दिखाया
जानकारी के मुताबिक, विवादित वीडियो 20 अक्टूबर 2026 को इंस्टाग्राम पर सामने आया था। इसे 'Jnx king Hg' नाम के अकाउंट से साझा किए जाने की जानकारी मिली है।वीडियो में एक युवक कर्नाटक के प्रसिद्ध विधान सौधा भवन के सामने खड़ा दिखाई देता है। वह अपने हाथ से बंदूक चलाने जैसा इशारा करता है। इसके तुरंत बाद वीडियो में एक बड़ा धमाका होता है और विधान सौधा की इमारत विस्फोट से नष्ट होती हुई दिखाई देती है।बताया गया कि वीडियो के साथ एक कैप्शन भी लिखा गया था, जिसमें विधान सौधा को बम से उड़ाने का दावा किया गया था।हालांकि, यह पूरा दृश्य एआई तकनीक से बनाया गया था। विधान सौधा में वास्तव में ऐसा कोई विस्फोट नहीं हुआ था।
सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर भड़के लोग
विवादित वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला बताते हुए बेंगलुरु पुलिस को टैग किया।लोगों ने सवाल उठाया कि राज्य की महत्वपूर्ण सरकारी इमारत को बम से उड़ाने जैसा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करना कितना उचित है।कई यूजर्स ने पुलिस से वीडियो बनाने और पोस्ट करने वाले व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।मामला चर्चा में आने के बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी।
बिहार के अररिया जिले का रहने वाला है आरोपी
पुलिस जांच में गिरफ्तार युवक की पहचान हजरत अली के रूप में हुई है। वह बिहार के अररिया जिले का रहने वाला बताया जा रहा है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अली पिछले कुछ महीनों से बेंगलुरु में रहकर मजदूरी कर रहा था। वह दैनिक मजदूरी के आधार पर पाइप फिटिंग का काम करता था।पुलिस ने तकनीकी जानकारी और डिजिटल सुरागों के आधार पर आरोपी का पता लगाया। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी की गतिविधियों और वीडियो बनाने के उद्देश्य की जांच की जा रही है।
डिजिटल निगरानी के दौरान पुलिस को मिली जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु पुलिस को सोशल मीडिया की निगरानी के दौरान इस वीडियो की जानकारी मिली थी।विवादित सामग्री सामने आने के बाद संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट और वीडियो के बारे में जानकारी जुटाई गई।पुलिस ने मंगलवार को मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद बुधवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि वीडियो तैयार करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
क्या लोगों में दहशत फैलाना था मकसद?
पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आरोपी ने इस तरह का वीडियो क्यों तैयार किया।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसने इसे केवल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए बनाया था या इसके पीछे कोई अन्य उद्देश्य था।पुलिस वीडियो तैयार करने की परिस्थितियों, उसकी डिजिटल सामग्री और आरोपी की गतिविधियों की जांच कर रही है।अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोपी के उद्देश्य और संभावित अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
AI के गलत इस्तेमाल पर बढ़ी चिंता
इस घटना ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।आजकल एआई तकनीक की मदद से वास्तविक दिखने वाले वीडियो और तस्वीरें तैयार करना पहले के मुकाबले आसान हो गया है। ऐसे वीडियो अगर गलत दावों के साथ सोशल मीडिया पर साझा किए जाएं, तो लोगों में भ्रम और भय पैदा हो सकता है।विशेष रूप से सरकारी इमारतों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों पर हमले दिखाने वाले फर्जी वीडियो कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी वास्तविकता की जांच जरूरी है।
पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच
बेंगलुरु पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।इसमें वीडियो के निर्माण, सोशल मीडिया पर उसके प्रसारण और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।पुलिस यह भी जांच रही है कि वीडियो से सार्वजनिक भय पैदा करने का इरादा था या नहीं।फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। इस मामले में कोई वास्तविक बम धमाका नहीं हुआ है और वीडियो पूरी तरह काल्पनिक बताया गया है।
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