
बेंगलुरु: राज्य में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े ई-चालानों का बड़ा बोझ अब भी बना हुआ है। सरकार की ओर से बार-बार 50 प्रतिशत छूट जैसी राहत दिए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन चालक अपने लंबित चालानों का भुगतान नहीं कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019 से अगस्त 2026 के बीच दर्ज किए गए करोड़ों ट्रैफिक उल्लंघनों में से करीब 68 प्रतिशत मामले अभी भी अनसुलझे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2019 से अगस्त 2026 तक राज्यभर में कुल 8.16 करोड़ ट्रैफिक उल्लंघन दर्ज किए गए। इनमें से 5.53 करोड़ मामले अब भी लंबित हैं। यानी कुल मामलों में लगभग 68 प्रतिशत ई-चालानों का न तो भुगतान हुआ है और न ही उनका अंतिम निपटारा हो सका है।
इन लंबित चालानों से जुड़ी कुल बकाया राशि भी बेहद बड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, वाहन चालकों पर करीब 3,006.70 करोड़ रुपये का जुर्माना अभी बाकी है। यह राशि बताती है कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में जुर्माना वसूली की स्थिति काफी कमजोर बनी हुई है।
सरकार ने समय-समय पर लंबित ई-चालानों के भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए जुर्माने में 50 प्रतिशत तक छूट देने की पेशकश की है। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को पुराने चालान निपटाने के लिए प्रेरित करना था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इन योजनाओं का लाभ नहीं उठा रहे हैं।
इससे साफ है कि केवल छूट देने से लंबित चालानों की समस्या पूरी तरह हल नहीं हो पा रही है। करोड़ों मामलों का लंबित रहना ट्रैफिक नियमों के पालन और जुर्माने की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की निगरानी को पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। सड़क पर नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कैमरों, ट्रैफिक पुलिस और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से चालान जारी किए जाते हैं। इन चालानों की जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज होती है और वाहन मालिकों को भुगतान करने के लिए निर्धारित समय दिया जाता है।
हालांकि बड़ी संख्या में वाहन चालक चालान मिलने के बाद भी भुगतान नहीं कर रहे हैं। कई मामलों में चालान लंबे समय तक लंबित बने रहते हैं और जुर्माना राशि लगातार रिकॉर्ड में जुड़ी रहती है। यही कारण है कि अब लंबित ई-चालानों की संख्या करोड़ों में पहुंच गई है।
5.53 करोड़ लंबित मामलों का आंकड़ा बताता है कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई तो बड़े पैमाने पर हो रही है, लेकिन जुर्माने की वसूली उसी अनुपात में नहीं हो पा रही है।
यह स्थिति प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गई है। एक तरफ सड़क सुरक्षा के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर केवल चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है। यदि जुर्माना लंबे समय तक जमा नहीं होता है तो इससे दंडात्मक व्यवस्था की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-चालान प्रणाली तभी प्रभावी होगी, जब जारी किए गए चालानों का समयबद्ध तरीके से निपटारा हो। यदि वाहन चालक बार-बार नोटिस और छूट के बावजूद जुर्माना नहीं भरते हैं, तो ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
सरकार की ओर से 50 प्रतिशत छूट की योजना का उद्देश्य राजस्व जुटाने के साथ-साथ पुराने मामलों की संख्या कम करना भी रहा है। इसके बावजूद वर्तमान आंकड़े बताते हैं कि अपेक्षित स्तर पर भुगतान नहीं हुआ है।
3,006.70 करोड़ रुपये का बकाया राजस्व प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय है। यदि इसका बड़ा हिस्सा वसूल हो जाता है, तो यह सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। साथ ही लंबित मामलों का बोझ भी कम हो सकता है।
ट्रैफिक विभाग के सामने अब यह चुनौती है कि ऐसे वाहन मालिकों की पहचान की जाए, जिनके खिलाफ कई चालान लंबित हैं। बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अलग से सख्त कदम उठाने की जरूरत पर भी चर्चा हो सकती है।
इसके अलावा वाहन रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, बीमा या अन्य सेवाओं को लंबित चालानों से जोड़ने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। इससे चालान भुगतान को ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।
ई-चालान का भुगतान नहीं करने की आदत सड़क सुरक्षा के नजरिए से भी चिंता पैदा करती है। यदि जुर्माना भरने का डर कम हो जाए तो ट्रैफिक नियमों के प्रति लोगों की गंभीरता भी प्रभावित हो सकती है। हेलमेट, सीट बेल्ट, रेड लाइट जंप, ओवरस्पीडिंग और गलत पार्किंग जैसे उल्लंघनों को नियंत्रित करने के लिए जुर्माना व्यवस्था का प्रभावी होना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि राज्य में ट्रैफिक ई-चालानों का बड़ा हिस्सा अभी भी अनसुलझा है। 8.16 करोड़ उल्लंघनों में से 5.53 करोड़ मामलों का लंबित रहना और 3,006.70 करोड़ रुपये का जुर्माना बकाया होना प्रशासन के लिए बड़ा संकेत है।
अब देखना होगा कि सरकार केवल छूट की नीति जारी रखती है या फिर लंबित ई-चालानों की वसूली के लिए अधिक सख्त और तकनीकी उपाय अपनाती है। इतना तय है कि वर्तमान स्थिति में ई-चालान निपटारे की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।





