कर्नाटक

जीरो बिल के बाद आया पांच हजार का बिजली बिल, गृह ज्योति लाभार्थियों में नाराजगी

Kavita2
14 Sept 2026 5:25 PM IST
जीरो बिल के बाद आया पांच हजार का बिजली बिल, गृह ज्योति लाभार्थियों में नाराजगी
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गृह ज्योति’ योजना के तहत हर महीने शून्य बिजली बिल मिलने से राहत महसूस कर रहे बेंगलुरु के कई परिवारों को इस बार बड़ा झटका लगा है। शहर के शिवाजीनगर स्थित माखन कंपाउंड सहित आसपास के इलाकों में रहने वाले अनेक उपभोक्ताओं को अचानक चार से पांच हजार रुपये तक के बिजली बिल भेजे गए हैं। भारी-भरकम बिल मिलने के बाद प्रभावित परिवारों ने बेंगलुरु विद्युत आपूर्ति कंपनी लिमिटेड यानी BESCOM के खिलाफ नाराजगी जताते हुए बिलों की जांच और तत्काल सुधार की मांग की है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, उनके घरों में बिजली की खपत पहले की तरह ही है और कोई नया भारी विद्युत उपकरण भी नहीं लगाया गया है। इसके बावजूद अचानक हजारों रुपये का बिल जारी कर दिया गया। लोगों का कहना है कि इससे पहले उन्हें गृह ज्योति योजना का लाभ मिल रहा था और नियमित रूप से शून्य बिल आ रहे थे। इस बार बिल में हुई असामान्य वृद्धि ने गरीब और निम्न आयवर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।

उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया है कि छोटे मकानों में सीमित उपकरणों का इस्तेमाल करने के बावजूद चार से पांच हजार रुपये का बिल कैसे आ सकता है। कई परिवारों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना उनके लिए संभव नहीं है। योजना लागू होने के बाद उन्होंने अपने घरेलू बजट में बिजली के खर्च को लगभग समाप्त मान लिया था, लेकिन अचानक आए बिल ने उनकी आर्थिक व्यवस्था बिगाड़ दी है।

प्रभावित लोगों का आरोप है कि बिल में बढ़ोतरी से पहले BESCOM की ओर से उन्हें कोई स्पष्ट सूचना या चेतावनी नहीं दी गई। उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि योजना का लाभ रोका गया है या पिछले महीनों के बिजली उपयोग का समायोजन किया गया है। इसी कारण उपभोक्ताओं में भ्रम बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बिजली कंपनी क्षेत्र में विशेष शिविर लगाकर प्रत्येक बिल की जांच करे और गलती मिलने पर संशोधित बिल जारी करे।

गृह ज्योति कर्नाटक सरकार की प्रमुख गारंटी योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को निर्धारित सीमा में मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है। योजना में अधिकतम 200 यूनिट तक राहत दी जाती है, लेकिन वास्तविक पात्रता प्रत्येक कनेक्शन की पूर्व औसत खपत और निर्धारित अतिरिक्त सीमा के आधार पर तय होती है। यदि किसी महीने उपभोक्ता की खपत तय पात्र सीमा से अधिक हो जाती है तो उसे उस महीने का भुगतान करना पड़ सकता है।

हालांकि, शिवाजीनगर के उपभोक्ताओं के मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारी बिल अधिक बिजली खपत, औसत बिलिंग, पुराने बकाये, मीटर रीडिंग की गड़बड़ी अथवा योजना के दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़े किसी कारण से आया है। संबंधित बिलों की तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आ सकेगा। इसलिए केवल भारी राशि के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सभी मामलों में योजना का लाभ बंद कर दिया गया है।

दरअसल, BESCOM ने जुलाई में गृह ज्योति लाभार्थियों के घर-घर सत्यापन अभियान के कारण कुछ उपभोक्ताओं के बिल पिछले तीन महीनों की औसत खपत के आधार पर तैयार करने की घोषणा की थी। कंपनी ने कहा था कि नियमित मीटर रीडिंग शुरू होने के बाद औसत और वास्तविक खपत के बीच अंतर को आगामी बिलों में समायोजित किया जाएगा। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कुछ उपभोक्ताओं के मौजूदा बिल में पिछले महीनों का अंतर जोड़ा गया हो। हालांकि, माखन कंपाउंड के मामले में BESCOM की ओर से कोई विशिष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आए बिना इसे बिल बढ़ने का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।

कर्नाटक सरकार ने गृह ज्योति योजना के लाभार्थियों का घर-घर सत्यापन अभियान भी शुरू किया है। इस अभियान की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई गई है। सत्यापन का उद्देश्य लाभार्थियों के दस्तावेजों को अद्यतन करना और योजना के कथित दुरुपयोग को रोकना है। सरकार के सामने ऐसे मामले आए थे, जिनमें व्यावसायिक प्रतिष्ठानों या अपात्र लोगों द्वारा योजना का लाभ लेने की बात कही गई थी। BESCOM क्षेत्र में लाखों कनेक्शनों के सत्यापन का काम चल रहा है।

सत्यापन अभियान के बीच किरायेदारों और मकान मालिकों में भी कई तरह की आशंकाएं पैदा हुई हैं। BESCOM पहले स्पष्ट कर चुका है कि केवल सत्यापन होने के कारण पात्र किरायेदारों की सुविधा समाप्त नहीं की जाएगी। पुराने किरायेदार के स्थान पर नए किरायेदार का आधार और किरायानामा संबंधी विवरण अद्यतन किया जा सकता है। इसके बावजूद दस्तावेजों की स्थिति, मीटर से जुड़े खाते और योजना में पंजीकृत व्यक्ति की जानकारी अलग होने पर बिलिंग में समस्या आने की आशंका बनी रहती है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली कंपनी को बिल में यह साफ तौर पर बताना चाहिए कि गृह ज्योति की छूट क्यों नहीं दी गई। यदि निर्धारित सीमा से अधिक बिजली इस्तेमाल हुई है तो बिल में मीटर की पिछली और वर्तमान रीडिंग के साथ कुल खपत स्पष्ट दिखाई जानी चाहिए। यदि पुराना बकाया या औसत रीडिंग का समायोजन है तो उसका विवरण अलग से दर्ज होना चाहिए। इससे लोगों को वास्तविक भुगतान राशि समझने में आसानी होगी।

प्रभावित उपभोक्ता बिल, मीटर की तस्वीर, पुराने बिल और गृह ज्योति पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज लेकर स्थानीय BESCOM कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कंपनी ने योजना संबंधी सवालों के लिए विशेष हेल्पलाइन भी शुरू की हैं। शिकायत दर्ज कराते समय उसकी प्राप्ति या संदर्भ संख्या सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि बाद में समाधान की स्थिति देखी जा सके।

माखन कंपाउंड के निवासियों ने फिलहाल विवादित बिलों की वसूली रोकने और जांच पूरी होने तक बिजली कनेक्शन नहीं काटने की मांग की है। अब उपभोक्ताओं की नजर BESCOM के आधिकारिक जवाब पर है। यदि बिलिंग में तकनीकी या मानवीय गलती सामने आती है तो लोगों को संशोधित बिल जारी किए जाने की उम्मीद है। वहीं वास्तविक खपत सीमा से अधिक मिलने पर कंपनी को इसकी पूरी गणना पारदर्शी तरीके से उपभोक्ताओं के सामने रखनी होगी।

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