कर्नाटक

43.81 लाख वोटरों को चुनाव आयोग का नोटिस

Kavita2
29 Aug 2026 1:13 PM IST
43.81 लाख वोटरों को चुनाव आयोग का नोटिस
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बेंगलुरु : राज्य में वोटर लिस्ट के विशेष और सघन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के बीच बड़ी संख्या में मतदाताओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में सुधार और सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके तहत लाखों मतदाताओं के नामों की जांच की जा रही है।

राज्य में कुल 5.54 करोड़ मतदाता दर्ज थे। चुनाव आयोग के अनुसार, एएसडीडीओ (ASDDO) प्रक्रिया के तहत करीब 1.8 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिसके बाद मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 4.46 करोड़ रह गई है।

अब इनमें से 43.81 लाख मतदाताओं को लेकर सत्यापन की जरूरत महसूस की गई है। चुनाव आयोग ने इन मतदाताओं को नोटिस भेजने का फैसला किया है।

43.81 लाख मतदाताओं को भेजे जाएंगे नोटिस

चुनाव आयोग ने जानकारी दी है कि संदिग्ध या सत्यापन की आवश्यकता वाले मतदाताओं को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू कर दी गई है।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जिन मतदाताओं के नाम, पते या अन्य विवरण में किसी तरह की समस्या पाई जाएगी, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया जाएगा।

वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया जारी

राज्य में मतदाता सूची सुधार अभियान के तहत 24 अगस्त से 23 सितंबर तक मतदाता अपने विवरण में सुधार करा सकते हैं।

इस अवधि के दौरान मतदाता अपने नाम, पता और अन्य जानकारियों को अपडेट कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदाताओं को अपने अधिकारों और आपत्तियों को दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

आपत्ति और दावे दर्ज कराने का समय

आयोग के अनुसार, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 24 अगस्त से 22 अक्टूबर तक का समय निर्धारित किया गया है।

इस दौरान जिन लोगों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से हटाया गया है या किसी अन्य व्यक्ति के नाम को लेकर आपत्ति है, वे संबंधित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।

चुनाव आयोग सभी दावों और आपत्तियों की जांच के बाद अंतिम निर्णय लेगा।

अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को होगी जारी

चुनाव आयोग ने बताया कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

इस सूची में उन मतदाताओं के नाम शामिल होंगे जिनका सत्यापन पूरा हो जाएगा और जो सभी निर्धारित मानकों को पूरा करेंगे।

मतदाताओं में बढ़ी चिंता

वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद कई मतदाताओं में चिंता देखी जा रही है। लोगों को डर है कि कहीं उनका नाम भी अंतिम सूची से बाहर न हो जाए।

राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाताओं को पर्याप्त जानकारी और समय दिया जाना चाहिए ताकि किसी योग्य व्यक्ति का नाम सूची से न हटे।

आयोग ने प्रक्रिया को बताया पारदर्शी

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य फर्जी, डुप्लीकेट या गलत जानकारी वाले नामों को हटाना और वास्तविक मतदाताओं की सही सूची तैयार करना है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के अंतिम रूप से नहीं हटाया जाएगा। जिन लोगों को नोटिस भेजा जा रहा है, उन्हें जवाब देने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का मौका मिलेगा।

राजनीतिक दलों की भूमिका भी अहम

मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान राजनीतिक दलों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। वे अपने क्षेत्र के मतदाताओं को प्रक्रिया की जानकारी देने और समस्याओं के समाधान में मदद कर सकते हैं।

चुनाव आयोग की ओर से भी सभी पक्षों से सहयोग की अपील की गई है।

निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी प्रक्रिया

मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। सही और अपडेटेड मतदाता सूची से निष्पक्ष चुनाव कराने में मदद मिलती है।

हालांकि, बड़ी संख्या में नाम हटने और लाखों मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने के कारण यह प्रक्रिया चर्चा में आ गई है।

अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर होगी। इससे साफ होगा कि कितने मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल किए जाते हैं और कितने नाम हटाए जाते हैं।

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