
बेंगलुरु। कर्नाटक में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम ASDDO सूची में आने के बाद भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। कई वोटरों ने दावा किया है कि उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के पास अपने हस्ताक्षर किए हुए एन्यूमरेशन फॉर्म जमा कर दिए थे और उनकी प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी, इसके बावजूद उनके नाम चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई ASDDO सूची में दिखाई दे रहे हैं।
ASDDO का मतलब है—अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead), डुप्लिकेट (Duplicate) और अन्य (Others)। चुनाव आयोग ऐसी सूची का इस्तेमाल उन मतदाताओं के रिकॉर्ड की पहचान और सत्यापन के लिए करता है, जिनके विवरण में किसी तरह की जांच की आवश्यकता होती है।
मामला सामने आने के बाद कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अंबुकुमार ने मतदाताओं से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और यह जांच करें कि उनका नाम ASDDO सूची में किसी गलती के कारण तो शामिल नहीं हो गया है।
वी. अंबुकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र के अनुसार ASDDO सूची उपलब्ध कराई है। उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया कि जिन लोगों ने ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए हैं और उन्हें उसकी पावती भी मिल चुकी है, लेकिन फिर भी उनका नाम ASDDO सूची में दिखाई दे रहा है, वे अपने संबंधित BLO से संपर्क करें।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि BLO के माध्यम से रिकॉर्ड को दोबारा जांच कर आवश्यक सुधार किया जा सकता है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने नाम और विवरण की स्थिति को समय रहते सत्यापित कर लें, ताकि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि को ठीक किया जा सके।
चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ASDDO सूची में किसी मतदाता का नाम शामिल होने का अर्थ यह नहीं है कि उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। यह केवल एक सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है।
आधिकारिक वेबसाइट पर साझा किए गए एक इन्फोग्राफिक में बताया गया है कि ASDDO सूची में शामिल नामों को जांच के लिए चिन्हित किया जाता है। अंतिम निर्णय सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाता है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे पुनरीक्षण अभियान चलाए जाते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सूची में केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल रहें।
SIR प्रक्रिया के दौरान BLO घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन करते हैं और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड अपडेट करते हैं। इस प्रक्रिया में यदि किसी मतदाता के रिकॉर्ड में विसंगति मिलती है तो उसे आगे की जांच के लिए चिह्नित किया जा सकता है।
कुछ मतदाताओं द्वारा ASDDO सूची में नाम आने की शिकायत के बाद चुनाव विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक सामान्य सत्यापन प्रक्रिया है और इसे नाम हटाने की अंतिम कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अधिकारियों ने कहा कि मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति की जांच करनी चाहिए और किसी भी समस्या की स्थिति में संबंधित BLO या चुनाव कार्यालय से संपर्क करना चाहिए। इससे गलतियों को समय पर सुधारा जा सकेगा।
चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सत्यापन प्रक्रिया जरूरी है। हालांकि, ऐसी प्रक्रियाओं के दौरान मतदाताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि अनावश्यक चिंता की स्थिति न बने।
कर्नाटक निर्वाचन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल चुनाव आयोग के आधिकारिक माध्यमों से मिली जानकारी पर भरोसा करें। विभाग ने कहा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम केवल सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर हटाया नहीं जाएगा।
फिलहाल, चुनाव विभाग ASDDO सूची में शामिल नामों की समीक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर नजर रख रहा है। मतदाताओं से कहा गया है कि वे अपने रिकॉर्ड की जांच करें और यदि कोई गलती दिखाई देती है तो तुरंत सुधार के लिए आवेदन करें।
SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं की भागीदारी जरूरी है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जा सके।





