कर्नाटक

AIB पॉलिसी का असर, बीयर बिक्री 41.32% बढ़ी; आबकारी राजस्व में भी 13.39% की छलांग

Kavita2
6 Oct 2026 11:28 AM IST
AIB पॉलिसी का असर, बीयर बिक्री 41.32% बढ़ी; आबकारी राजस्व में भी 13.39% की छलांग
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कर्नाटक : राज्य में लागू ‘अल्कोहल इन बेवरेज’ यानी AIB पॉलिसी का असर आबकारी कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल से सितंबर तक के शुरुआती छह महीनों में बीयर की बिक्री में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 41.32 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बीयर की बढ़ती बिक्री का सीधा असर राज्य सरकार के आबकारी राजस्व पर भी पड़ा है और इस मद में सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त संग्रह हुआ है।

आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच बीयर की बिक्री से कुल 3,377.88 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। पिछले वर्ष इसी छह महीने की अवधि में बीयर से 2,836.64 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया गया था। इस तरह केवल बीयर बिक्री से सरकार के खजाने में इस बार 541.24 करोड़ रुपये अधिक आए हैं।

बीयर की बिक्री में 41.32 प्रतिशत की वृद्धि को आबकारी क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार की AIB नीति के लागू होने के बाद बाजार में बिक्री के स्वरूप में बदलाव देखने को मिला है। शुरुआती छह महीनों के आंकड़े बताते हैं कि बीयर की मांग में तेजी आई है और इसका असर राजस्व संग्रह पर भी सकारात्मक रूप से दिखाई दे रहा है।

सिर्फ बीयर ही नहीं, बल्कि राज्य का कुल आबकारी राजस्व भी बढ़ा है। अप्रैल से सितंबर तक कुल आबकारी राजस्व संग्रह में 13.39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान राज्य सरकार ने आबकारी मद से 19,570.23 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 22,191.63 करोड़ रुपये हो गया है।

इस हिसाब से कुल आबकारी राजस्व में पिछले साल की तुलना में 2,621.40 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। राजस्व के इस आंकड़े में भारतीय निर्मित शराब, बीयर, लाइसेंस शुल्क, जुर्माने और आबकारी विभाग से जुड़े दूसरे स्रोतों से मिलने वाली आय शामिल है।

आबकारी विभाग के लिए वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के ये आंकड़े महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक ओर जहां बीयर से मिलने वाले राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर कुल आबकारी संग्रह में भी दो अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य की आबकारी आय में इस वित्तीय वर्ष के दौरान मजबूत वृद्धि बनी हुई है।

AIB पॉलिसी के चलते बीयर बाजार में आई तेजी का असर बिक्री के साथ-साथ सरकार की आमदनी पर भी पड़ा है। बीयर की बिक्री में 41 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी कुल आबकारी राजस्व की वृद्धि दर से काफी ज्यादा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि इस अवधि में आबकारी राजस्व बढ़ाने में बीयर से होने वाली आय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल अप्रैल से सितंबर के बीच बीयर से 2,836.64 करोड़ रुपये का राजस्व आया था। इस बार इसी अवधि में यह रकम बढ़कर 3,377.88 करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी छह महीने में बीयर से होने वाले राजस्व में 541.24 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।

वहीं पूरे आबकारी विभाग के राजस्व संग्रह की बात करें तो पिछले साल के 19,570.23 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 22,191.63 करोड़ रुपये का संग्रह किया गया है। यह अंतर बताता है कि विभाग को विभिन्न स्रोतों से इस वर्ष अधिक राजस्व मिला है।

आबकारी राजस्व राज्य सरकार की आय के प्रमुख स्रोतों में से एक माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में होने वाली बढ़ोतरी का असर सरकार की कुल वित्तीय स्थिति पर भी पड़ता है। आबकारी से मिलने वाला राजस्व विभिन्न योजनाओं और सरकारी खर्चों के लिए उपलब्ध संसाधनों का हिस्सा बनता है।

हालांकि बीयर की बिक्री में इतनी बड़ी वृद्धि के आंकड़ों को केवल राजस्व के नजरिए से ही नहीं देखा जा रहा है। शराब और बीयर की बिक्री से जुड़े आंकड़े सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी बहस को भी जन्म देते हैं। बिक्री बढ़ने के साथ सरकार के सामने राजस्व हितों और जिम्मेदार शराब नीति के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी रहती है।

फिलहाल आबकारी विभाग के शुरुआती छह महीने के आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि इस वर्ष राजस्व संग्रह की रफ्तार पिछले साल से तेज है। खासकर बीयर की बिक्री से मिलने वाली आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

यदि आने वाले छह महीनों में भी यही रुझान बना रहता है, तो वित्तीय वर्ष के अंत तक आबकारी विभाग का कुल राजस्व पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रह सकता है। हालांकि पूरे साल की वास्तविक तस्वीर वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अभी तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, AIB पॉलिसी के बाद बीयर की बिक्री में 41.32 प्रतिशत की वृद्धि और कुल आबकारी राजस्व में 13.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे राज्य सरकार को पहली छमाही में अतिरिक्त राजस्व मिला है और आबकारी क्षेत्र सरकार की आय बढ़ाने वाले प्रमुख स्रोतों में बना हुआ है।

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