
बेंगलुरु। कर्नाटक हाई कोर्ट ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में नियुक्त किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस के.एस. हेमलेखा की पीठ ने दावणगेरे स्थित ‘कर्नाटक राज्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक संघ’ की राज्य समिति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद पीठ ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को BLO की जिम्मेदारी सौंपने से उनके मूल कार्य प्रभावित हो रहे हैं और इसका असर महिला एवं बाल विकास से जुड़ी सेवाओं पर पड़ रहा है।
ICDS सेवाओं पर असर का दावा
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील उमापति एस. ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य जिम्मेदारी महिलाओं और बच्चों के लिए संचालित एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजनाओं को लागू करना है।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव संबंधी अतिरिक्त जिम्मेदारियां देने से उनके नियमित कार्यों में बाधा आ रही है। इससे छोटे बच्चों की देखभाल, पोषण सेवाएं और शुरुआती बचपन के विकास से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
वकील ने अदालत से कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की सेवाएं सीधे तौर पर ग्रामीण और कमजोर वर्गों के परिवारों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में कर्मचारियों को लंबे समय तक चुनावी कार्यों में लगाने से इन सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
BLO की जिम्मेदारी और विवाद
पोलिंग स्टेशन लेवल ऑफिसर (BLO) की जिम्मेदारी मतदाता सूची के सत्यापन, संशोधन और चुनाव संबंधी अन्य कार्यों से जुड़ी होती है। चुनाव आयोग समय-समय पर विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारियों को BLO की जिम्मेदारी सौंपता है।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पहले से ही महत्वपूर्ण सामाजिक सेवाओं में व्यस्त रहती हैं, इसलिए उन्हें चुनावी जिम्मेदारियों से अलग रखा जाना चाहिए।
संघ ने उठाए कई सवाल
कर्नाटक राज्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक संघ ने अपनी याचिका में कहा है कि BLO की जिम्मेदारी निभाने के लिए अतिरिक्त समय और संसाधनों की जरूरत होती है। इससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर काम का दबाव बढ़ रहा है।
संघ का कहना है कि कर्मचारियों की कमी और पहले से मौजूद जिम्मेदारियों के बीच चुनावी कार्य सौंपना व्यावहारिक समस्या पैदा कर रहा है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति BLO के रूप में करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।
चुनाव आयोग से मांगा जवाब
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अब आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को BLO की जिम्मेदारी देने का आधार क्या है और इससे जुड़ी व्यवस्थाएं किस तरह लागू की जा रही हैं।
अदालत ने फिलहाल मामले में अंतिम फैसला नहीं दिया है। चुनाव आयोग के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।
महिला कर्मचारियों की भूमिका पर चर्चा
यह मामला केवल चुनावी जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाने के लिए BLO की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि अन्य आवश्यक सरकारी सेवाएं प्रभावित न हों।
आगे की सुनवाई पर नजर
कर्नाटक हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अब सभी की नजर चुनाव आयोग के जवाब पर है। यदि आयोग की ओर से जवाब दाखिल किया जाता है, तो अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।
फिलहाल आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की BLO नियुक्ति को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है और यह मामला राज्य में चुनावी जिम्मेदारियों तथा सामाजिक सेवा कार्यों के संतुलन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।





