
बेंगलुरु: खरीफ फसलों की बुवाई का समय लगभग समाप्त होने के बीच कृषि क्षेत्र से चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त तक खरीफ फसलों के निर्धारित लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। कुल 84 लाख हेक्टेयर के बुवाई लक्ष्य में से करीब 20 लाख हेक्टेयर जमीन पर अब तक फसल की बुवाई नहीं हो सकी है।
बुवाई में यह कमी मुख्य रूप से कम बारिश, गिरते भूजल स्तर और खराब मौसम की वजह से बताई जा रही है। इसका असर आने वाले समय में प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
20 लाख हेक्टेयर जमीन पर नहीं हुई बुवाई
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ सीजन में किसानों को 84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन 28 अगस्त तक इसमें से करीब 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती नहीं हो पाई।
बिना बुवाई वाली जमीन का बड़ा हिस्सा अनाज वाली फसलों का है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अनाज फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ सीजन में बुवाई का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय निकलने के बाद कई फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
कम बारिश बनी बड़ी वजह
इस साल कई क्षेत्रों में मानसून की स्थिति असमान रही है। कुछ इलाकों में भारी बारिश हुई, जबकि कई क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हो पाई।
कम बारिश के कारण खेतों में नमी की कमी रही, जिससे किसान समय पर बुवाई नहीं कर सके। बारिश पर निर्भर रहने वाले किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई क्षेत्रों में भूजल स्तर नीचे जाने से सिंचाई की सुविधा भी प्रभावित हुई है। जिन किसानों के पास सिंचाई के सीमित साधन हैं, उनके लिए खेती करना और मुश्किल हो गया।
अनाज फसलों पर पड़ सकता है असर
खरीफ सीजन में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा जैसी अनाज फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इन फसलों की बुवाई में कमी का असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
अगर उत्पादन कम होता है तो बाजार में अनाज की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
हालांकि, अंतिम स्थिति फसल कटाई के बाद ही स्पष्ट होगी। मौसम की स्थिति और आगे होने वाली बारिश भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
किसानों की बढ़ी चिंता
बुवाई में देरी या खेत खाली रह जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई किसानों ने बीज और खाद पर खर्च किया, लेकिन मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण वे समय पर फसल नहीं लगा पाए।
किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर होती जा रही है। बारिश में अनिश्चितता बढ़ने से हर साल नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
सरकार और कृषि विभाग की नजर
कृषि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है और किसानों को आवश्यक सलाह दी जा रही है।
किसानों को वैकल्पिक फसलों और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मौसम पर टिकी आगे की उम्मीद
हालांकि खरीफ बुवाई का मुख्य समय समाप्त होने की ओर है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में देर से होने वाली बारिश से किसानों को राहत मिल सकती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर किसान आगे की रणनीति तय कर रहे हैं। अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश होती है तो कुछ क्षेत्रों में देर से बोई जाने वाली फसलों को फायदा मिल सकता है।
कृषि अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
भारत की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और खरीफ सीजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। फसल उत्पादन में कमी का असर किसानों की आय के साथ-साथ बाजार पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के बीच सिंचाई व्यवस्था मजबूत करना, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना जरूरी है।
फिलहाल खरीफ सीजन में 20 लाख हेक्टेयर जमीन पर बुवाई नहीं हो पाने से कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। अब किसानों और सरकार दोनों की नजर आने वाले मौसम और फसल उत्पादन के अंतिम आंकड़ों पर टिकी हुई है।





