कर्नाटक

कर्नाटक में सूखा बना बड़ी चुनौती, सरकार बुलाएगी सर्वदलीय बैठक

Ratna Netam
22 Oct 2026 9:19 PM IST
कर्नाटक में सूखा बना बड़ी चुनौती, सरकार बुलाएगी सर्वदलीय बैठक
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बेंगलुरु। कर्नाटक में सूखे के कारण कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचने के बीच राज्य सरकार ने केंद्र से आर्थिक सहायता मांगने की तैयारी शुरू कर दी है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि राज्य में सूखे से लगभग 62,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुलाएगी और उसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली भेजकर केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग करेगी।पत्रकारों से बातचीत करते हुए परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार सूखा प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का आकलन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल नुकसान के बराबर राहत राशि की मांग नहीं की जा सकती, क्योंकि केंद्र सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए निर्धारित दिशानिर्देश हैं। राज्य सरकार इन्हीं नियमों के आधार पर राहत राशि की गणना करेगी।
सूखे से 62 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में सूखे का व्यापक असर देखने को मिला है। कृषि उत्पादन प्रभावित होने के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी दबाव बढ़ा है।उन्होंने कहा कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार नुकसान लगभग 62 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि अंतिम आंकड़ा विस्तृत सर्वेक्षण और प्रशासनिक रिपोर्ट मिलने के बाद तय होगा।परमेश्वर ने बताया कि सरकार नुकसान के आधार पर राहत मांगने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आर्थिक सहायता की मांग की जाएगी।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की तैयारी
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दशहरा पर्व समाप्त होने के बाद अब सूखा राहत से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए जाने हैं।राज्य सरकार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक आयोजित करेगी। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को सूखे की स्थिति, फसलों को हुए नुकसान और केंद्र से मांगी जाने वाली राहत राशि की जानकारी दी जाएगी।इसके बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से सहायता की मांग करेगा।सरकार का उद्देश्य राज्य में सूखे से प्रभावित किसानों और अन्य परिवारों के लिए आर्थिक राहत सुनिश्चित करना है।
NDRF के नियमों से तय होगी राहत राशि
जी. परमेश्वर ने कहा कि नुकसान का कुल अनुमान 62 हजार करोड़ रुपये होने के बावजूद राज्य सरकार पूरी राशि की मांग नहीं कर सकती।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के अपने नियम और मानदंड हैं। इन नियमों के तहत विभिन्न प्रकार के नुकसान का अलग-अलग आकलन किया जाता है।राज्य सरकार इसी आधार पर राहत राशि तय करेगी और विस्तृत ज्ञापन केंद्र को सौंपेगी।इससे पहले 15 अक्टूबर को परमेश्वर ने कहा था कि सूखे से नुकसान 60 से 70 हजार करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। उस समय उन्होंने केंद्र से लगभग 18 से 20 हजार करोड़ रुपये की सहायता मांगने की संभावना जताई थी। हालांकि अंतिम मांग नुकसान के आकलन पर निर्भर करेगी।
226 तालुक सूखा प्रभावित घोषित
कर्नाटक सरकार ने राज्य के 226 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की जानकारी दी है।सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। अधिकारियों द्वारा फसलों की स्थिति, कृषि उत्पादन में कमी और ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़े आर्थिक प्रभाव का मूल्यांकन किया जा रहा है।इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद केंद्र सरकार को राहत के लिए अंतिम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री से की मुलाकात
इसी बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।बैठक में राज्य की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं से संबंधित पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंजूरियों पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री ने मेकेदातु परियोजना और शरावती पंप स्टोरेज परियोजना से जुड़ी लंबित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना के प्रारंभिक भू-तकनीकी सर्वेक्षण के लिए आवश्यक मंजूरी पर जल्द विचार करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रस्ताव सर्वेक्षण से संबंधित है, न कि संरक्षित वनभूमि के तत्काल उपयोग से।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर भी हुई चर्चा
मुख्यमंत्री ने पश्चिमी घाट को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने से जुड़ी कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की सिफारिशों का मुद्दा भी उठाया।उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट और भौतिक सर्वेक्षण पूरा होने तक संबंधित अधिसूचना को अंतिम रूप नहीं दिया जाए।मुख्यमंत्री का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय निवासियों और विकास परियोजनाओं से जुड़े हितों पर भी विचार करना आवश्यक है।
किसानों को राहत दिलाना सरकार की प्राथमिकता
सूखे के कारण कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान के बीच राज्य सरकार केंद्र से अधिकतम संभव सहायता हासिल करने का प्रयास कर रही है।उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि सर्वदलीय बैठक के माध्यम से इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास होगा। इसके बाद केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की स्थिति और राहत की आवश्यकता रखी जाएगी।फिलहाल सरकार सूखे से हुए नुकसान का अंतिम आकलन और राहत प्रस्ताव तैयार करने में जुटी है। केंद्र से मिलने वाली सहायता की राशि राज्य की मांग, निर्धारित मानदंडों और संबंधित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
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