
बेंगलुरु : कर्नाटक सरकार ने राज्य में किसानों के सामने पैदा हुई गंभीर सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। राज्य सरकार का कहना है कि कम बारिश के कारण कृषि गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार को बेंगलुरु डिवीजन के नौ जिलों की विकास समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य की मौजूदा स्थिति, बारिश की कमी और कृषि क्षेत्र पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य की स्थिति से अवगत कराया गया है और सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का अनुरोध किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान राज्य के कई हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं हुई। जून महीने में कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी दर्ज की गई, लेकिन जुलाई के अंत तक स्थिति और चिंताजनक हो गई। उन्होंने बताया कि राज्य में बारिश में 42 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ा है।
बारिश की कमी के कारण राज्य में बुवाई का काम भी प्रभावित हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में इस समय तक बड़ी मात्रा में कृषि कार्य पूरा हो जाता है, लेकिन इस बार किसानों को पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण खेतों में बुवाई नहीं हो पाई। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक राज्य में केवल करीब 15 प्रतिशत बुवाई का काम पूरा हो सका है।
कृषि क्षेत्र पर सूखे के असर को लेकर राज्य सरकार ने चिंता जताई है। किसानों को फसल उत्पादन, सिंचाई और आर्थिक नुकसान जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बारिश पर निर्भर रहने वाले किसानों की स्थिति सबसे अधिक प्रभावित हुई है।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे जिलों में सूखे की स्थिति का लगातार आकलन करें और प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार करें। सरकार का उद्देश्य किसानों को राहत पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाना है।
राज्य सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहायता की आवश्यकता है। राष्ट्रीय आपदा घोषित होने से राज्य को अतिरिक्त आर्थिक सहायता और राहत कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
कर्नाटक में बड़ी संख्या में किसान मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हैं। समय पर बारिश नहीं होने से फसल चक्र प्रभावित होता है और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है। इस वर्ष बारिश में आई कमी ने कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बारिश की कमी रहने से न केवल खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है, बल्कि पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते राहत उपायों को लागू करना जरूरी है।
राज्य सरकार ने केंद्र से मांग की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल्द निर्णय लिया जाए। सरकार का तर्क है कि सूखे का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों की पूरी आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता वाली समीक्षा बैठक में विकास कार्यों के साथ-साथ प्राकृतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों से कहा गया कि वे प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं और राहत उपायों को प्राथमिकता दें।
उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से सहयोग की उम्मीद जताते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को सहायता की जरूरत है।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार के फैसले पर है। यदि सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाता है तो कर्नाटक को राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए विशेष सहायता मिल सकती है। फिलहाल राज्य सरकार ने केंद्र के सामने अपनी मांग रख दी है और किसानों के लिए राहत की उम्मीद जताई जा रही है।





