
बेंगलुरु। कर्नाटक के कई हिस्सों में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने गुरुवार को 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। इसके साथ ही राज्य में सूखाग्रस्त घोषित किए गए तालुकों की कुल संख्या बढ़कर 124 हो गई है।
सरकार ने यह फैसला कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (KSNDMC) के आकलन और जमीनी जांच के आधार पर लिया है। राजस्व विभाग (आपदा प्रबंधन) की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
बारिश की कमी से बढ़ी चिंता
कर्नाटक के कई जिलों में मानसून के दौरान अपेक्षित बारिश नहीं होने से कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
विशेष रूप से खरीफ सीजन में बारिश की कमी का असर फसलों पर पड़ा है। किसानों को नुकसान की आशंका के बीच सरकार ने सूखे की स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन कराया।
KSNDMC ने किया विस्तृत आकलन
राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति का पता लगाने के लिए KSNDMC को जिम्मेदारी दी थी।
केंद्र ने विभिन्न क्षेत्रों में बारिश, फसल की स्थिति, जल उपलब्धता और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों का अध्ययन किया। इसके बाद जमीनी स्तर पर जांच कर रिपोर्ट तैयार की गई।
रिपोर्ट के आधार पर 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया गया।
पहले चरण में 101 तालुक घोषित हुए थे सूखाग्रस्त
इससे पहले कर्नाटक सरकार ने खरीफ सीजन को देखते हुए 27 अगस्त को 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया था।
उस समय भी कई क्षेत्रों में बारिश की कमी और कृषि गतिविधियों पर असर को देखते हुए यह कदम उठाया गया था।
बाद में स्थिति की समीक्षा के लिए शेष 139 तालुकों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया।
किसानों पर बढ़ा संकट
सूखे की स्थिति का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है।
बारिश की कमी के कारण फसलों की बुवाई, उत्पादन और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में किसान पानी की उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं।
सरकार की ओर से सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए राहत और सहायता उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।
प्राकृतिक संसाधनों पर असर
कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जल स्रोतों पर भी दबाव बढ़ा है।
तालाब, जलाशय और भूजल स्तर प्रभावित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की समस्या बढ़ सकती है।
प्रशासन इन क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सरकार की राहत योजनाओं पर नजर
सूखाग्रस्त घोषित किए गए क्षेत्रों में सरकार की ओर से किसानों और प्रभावित लोगों के लिए राहत उपाय लागू किए जा सकते हैं।
इनमें फसल नुकसान का आकलन, सहायता राशि और अन्य जरूरी कदम शामिल हो सकते हैं।
वैज्ञानिक आधार पर लिया गया फैसला
राज्य सरकार ने कहा है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा किसी अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आकलन और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
KSNDMC द्वारा तैयार रिपोर्ट में बारिश की स्थिति और कृषि प्रभाव जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।
आगे भी हो सकती है समीक्षा
मौसम की स्थिति और बारिश के आंकड़ों को देखते हुए सरकार आगे भी समीक्षा कर सकती है।
यदि किसी अन्य क्षेत्र में सूखे जैसे हालात पाए जाते हैं तो वहां भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
कर्नाटक में सूखे से निपटने की तैयारी
राज्य सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को सूखाग्रस्त क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल कर्नाटक के 124 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं और सरकार की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाना है।





