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कर्नाटक में हाई स्कूल स्तर पर बढ़ा ड्रॉपआउट, 9वीं-12वीं के 18.1% लड़कों ने छोड़ी पढ़ाई

Kavita2
29 July 2026 1:50 PM IST
कर्नाटक में हाई स्कूल स्तर पर बढ़ा ड्रॉपआउट, 9वीं-12वीं के 18.1% लड़कों ने छोड़ी पढ़ाई
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बेंगलुरु। देश के कई बड़े राज्यों की तुलना में कर्नाटक में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या चिंता का विषय बनकर सामने आई है। खासतौर पर हाई स्कूल यानी कक्षा 9वीं और 10वीं के स्तर पर लड़कों के बीच ड्रॉपआउट दर अधिक दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ऊपर है, जहां सेकेंडरी स्टेज (कक्षा 9 से 12) में लड़कों के स्कूल छोड़ने की दर सबसे अधिक है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से जारी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। यह रिपोर्ट देशभर के उन स्कूलों से जुड़े आंकड़ों पर आधारित है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के दिशा-निर्देशों के अनुसार शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में 2025-2026 शैक्षणिक वर्ष के दौरान सेकेंडरी स्टेज यानी कक्षा 9 से 12 तक के स्तर पर 18.1 प्रतिशत लड़कों ने स्कूल छोड़ दिया। यह आंकड़ा राज्य में माध्यमिक शिक्षा के सामने मौजूद चुनौतियों को दर्शाता है।

लड़कों के ड्रॉपआउट में कर्नाटक सबसे आगे

UDISE+ रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर लड़कों के स्कूल छोड़ने की दर के मामले में कर्नाटक की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में अधिक चिंताजनक रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाई स्कूल स्तर पर छात्रों का पढ़ाई छोड़ना कई सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कारणों से जुड़ा हो सकता है।

कक्षा 9वीं और 10वीं का स्तर छात्रों के शैक्षणिक जीवन में महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसी दौरान कई छात्र पढ़ाई छोड़कर रोजगार, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य कारणों से शिक्षा से दूर हो जाते हैं। ऐसे में इस स्तर पर बढ़ती ड्रॉपआउट दर भविष्य में छात्रों के करियर और कौशल विकास को प्रभावित कर सकती है।

आर्थिक और सामाजिक कारण बड़ी वजह

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें आर्थिक कठिनाइयां, परिवार की जिम्मेदारियां, पढ़ाई में रुचि की कमी, स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं की कमी और छात्रों का रोजगार की ओर आकर्षित होना प्रमुख कारण माने जाते हैं।

ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में कई बार परिवार बच्चों को जल्दी काम से जोड़ देते हैं। इससे छात्र नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते और धीरे-धीरे पढ़ाई छोड़ देते हैं। लड़कों के मामले में यह स्थिति कई बार इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि परिवार उन पर कम उम्र में आर्थिक सहयोग करने का दबाव डालते हैं।

माध्यमिक शिक्षा पर सरकार का फोकस

केंद्र और राज्य सरकारें लंबे समय से स्कूल छोड़ने की दर कम करने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। इनमें छात्रों को स्कूल तक बनाए रखने, छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने, स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने जैसे कदम शामिल हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी स्कूली शिक्षा में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। नीति का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बच्चे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक अपनी शिक्षा पूरी करें।

शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को निर्देश दिए जाते हैं कि ऐसे छात्रों की पहचान की जाए जो नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के प्रयास भी किए जाते हैं।

लड़कियों की शिक्षा की स्थिति पर भी नजर

जहां कर्नाटक में लड़कों की ड्रॉपआउट दर चिंता का विषय बनी है, वहीं शिक्षा विभाग लड़कियों की शिक्षा को लेकर भी लगातार प्रयास कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में लड़कियों के स्कूल नामांकन और शिक्षा जारी रखने की स्थिति में सुधार देखने को मिला है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि छात्र स्कूल में बने रहें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो।

UDISE+ रिपोर्ट से सामने आई तस्वीर

UDISE+ रिपोर्ट देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण डेटा स्रोत है। इसमें स्कूलों, छात्रों, शिक्षकों, बुनियादी सुविधाओं और नामांकन से जुड़े आंकड़े शामिल किए जाते हैं। सरकार इन आंकड़ों के आधार पर शिक्षा नीतियों और योजनाओं की दिशा तय करती है।

कर्नाटक में माध्यमिक स्तर पर लड़कों के बढ़ते ड्रॉपआउट की स्थिति इस बात की ओर संकेत करती है कि स्कूलों में छात्रों को बनाए रखने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रॉपआउट कम करने के लिए केवल शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और स्थानीय प्रशासन को भी मिलकर काम करना होगा। छात्रों को शिक्षा जारी रखने के लिए बेहतर माहौल, आर्थिक सहयोग और करियर संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना जरूरी है।

कर्नाटक में हाई स्कूल स्तर पर सामने आए ये आंकड़े राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक चुनौती हैं। आने वाले समय में सरकार और शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही होगी कि छात्रों को स्कूलों से जोड़े रखा जाए और माध्यमिक शिक्षा पूरी करने वालों की संख्या बढ़ाई जाए।

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