कर्नाटक

दिल्ली के विरोध प्रदर्शन से दूर रहेंगे डीके शिवकुमार, बताया क्या है खास वजह

Ratna Netam
30 Oct 2026 3:35 PM IST
दिल्ली के विरोध प्रदर्शन से दूर रहेंगे डीके शिवकुमार, बताया क्या है खास वजह
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बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली में विपक्षी INDIA गठबंधन के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बजाय कन्नड़ राज्योत्सव समारोहों को प्राथमिकता देने की बात कही है। शिवकुमार का कहना है कि कर्नाटक में कन्नड़ राज्योत्सव केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की भाषा, संस्कृति, परंपरा और गौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा, "हम कन्नड़ राज्योत्सव को विशेष तरीके से मनाते हैं।" उनके इस रुख से राज्य के सांस्कृतिक आयोजनों और राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक गतिविधियों के बीच उनकी प्राथमिकताओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि, 30 अक्टूबर को दिए गए इस विशेष बयान और दिल्ली के आगामी प्रदर्शन में उनकी अनुपस्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध समाचार स्रोतों से नहीं हो सकी है। इससे पहले शिवकुमार ने 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित विपक्षी प्रदर्शन में भाग लिया था।
कन्नड़ राज्योत्सव प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन कर्नाटक के गठन और कन्नड़ भाषी क्षेत्रों के एकीकरण की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा है। राज्यभर में इस अवसर पर सरकारी कार्यक्रमों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, साहित्यिक आयोजनों और कन्नड़ भाषा के सम्मान से संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। कन्नड़ राज्योत्सव का कर्नाटक के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में विशेष महत्व है।
डीके शिवकुमार लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के साथ-साथ वे राज्य सरकार और संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं। ऐसे में राज्य के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन में उनकी भागीदारी को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका यह संदेश कन्नड़ भाषा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
दूसरी ओर, दिल्ली में विपक्षी INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इन आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद बना हुआ है। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए। वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं की सही पहचान और सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना होता है। ऐसे में किसी भी अनियमितता के आरोप की पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित अधिकारियों की जानकारी और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर ही की जा सकती है।
गौरतलब है कि डीके शिवकुमार इससे पहले मतदाता सूची के मुद्दे पर मुखर रहे हैं। अक्टूबर की शुरुआत में उन्होंने कर्नाटक में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के कथित मामलों को लेकर चुनाव अधिकारियों के समक्ष विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा करना आवश्यक है। इसके अलावा 12 अक्टूबर को उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ प्रदर्शन में भी भाग लिया था।
शिवकुमार ने पहले भी स्पष्ट किया था कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सभी नागरिकों को मिलना चाहिए। अक्टूबर में बेंगलुरु में विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने के विवाद पर उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है और सरकार की आलोचना करने वालों के साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए।
इस पृष्ठभूमि में कन्नड़ राज्योत्सव समारोह को प्राथमिकता देने का उनका
कथित फैसला
इसलिए चर्चा में है क्योंकि वे INDIA गठबंधन से जुड़े विरोध कार्यक्रमों में पहले सक्रिय भागीदारी कर चुके हैं। हालांकि, किसी एक कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का अर्थ गठबंधन की राजनीतिक रणनीति या चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख में बदलाव होना नहीं माना जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर देखा जाए तो क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन बनाना कर्नाटक के प्रमुख नेताओं के लिए महत्वपूर्ण विषय रहा है। कन्नड़ भाषा का संरक्षण, स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना और राज्य के ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देना विभिन्न राजनीतिक दलों के सार्वजनिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है।
कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर राज्यभर में कन्नड़ ध्वज, सांस्कृतिक झांकियां, संगीत, लोकनृत्य और साहित्यिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होते हैं। स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संगठनों की ओर से भी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता और कन्नड़ भाषी समाज के योगदान को याद किया जाता है।
इस बीच दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की गतिविधियां भी जारी हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' कार्यक्रम को लेकर विपक्षी दलों ने तैयारियां की हैं। बारिश के कारण 30 अक्टूबर का प्रस्तावित कार्यक्रम 31 अक्टूबर तक स्थगित किए जाने की खबर सामने आई है। यह आयोजन संवैधानिक महाभियोग नहीं, बल्कि विपक्ष का प्रतीकात्मक राजनीतिक विरोध है।
फिलहाल डीके शिवकुमार के कथित फैसले को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कन्नड़ राज्योत्सव और दिल्ली के राजनीतिक कार्यक्रम अलग-अलग सार्वजनिक गतिविधियां हैं। शिवकुमार की अंतिम यात्रा योजना और दिल्ली में उनकी भागीदारी के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
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