
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में सूखे की स्थिति पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की एक टिप्पणी ने सदन का माहौल कुछ देर के लिए हल्का कर दिया। बेंगलुरु की तेजी से बढ़ती आबादी, ट्रैफिक, पानी और शहर पर बढ़ते दबाव की चर्चा करते हुए शिवकुमार ने दूसरे जिलों से राजधानी में आकर बसे विधायकों की निजी जिंदगी को लेकर टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु आने वाले लोग शहर की समस्याओं की शिकायत तो करते हैं, लेकिन यहां से वापस जाना नहीं चाहते। इसी क्रम में उन्होंने कुछ विधायकों की “दो शादियों” का जिक्र किया, जिस पर सदन में हंसी सुनाई दी।
यह टिप्पणी विधानसभा में राज्य की सूखा स्थिति पर चल रही विस्तृत चर्चा के दौरान सामने आई। कर्नाटक में कम बारिश, गिरते भूजल स्तर और पानी की उपलब्धता को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच कई दिनों से बहस चल रही है। राज्य सरकार ने इसी विषय पर विशेष विधायी सत्र बुलाया था।
चर्चा के दौरान शिवकुमार ने बेंगलुरु के विकास और यहां बढ़ते जनसंख्या दबाव का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि दूसरे जिलों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और अन्य अवसरों के लिए बेंगलुरु आते हैं। शहर की आबादी बढ़ने के साथ ट्रैफिक, पेयजल और बुनियादी ढांचे पर भी दबाव बढ़ रहा है।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बेंगलुरु आने वाले लोग अक्सर यहां की आबादी और ट्रैफिक को लेकर शिकायत करते हैं, लेकिन शहर छोड़कर वापस नहीं जाते। इसके बाद उन्होंने विधायकों का जिक्र करते हुए कहा कि दूसरे जिलों से बेंगलुरु आकर बसे कई विधायकों ने “दो-दो शादियां” की हैं। उनकी इस टिप्पणी पर सदन में हंसी का माहौल बन गया।
शिवकुमार की टिप्पणी मुख्य रूप से बेंगलुरु के आकर्षण और लगातार बढ़ रही आबादी को लेकर की गई थी। हालांकि विधायकों की निजी जिंदगी का उल्लेख होने के कारण बयान चर्चा का विषय बन गया। उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मुख्यमंत्री ने किन विधायकों की ओर संकेत किया था। इसलिए इसे किसी विशेष विधायक के निजी जीवन के बारे में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपनी बात को बेंगलुरु के पानी और जलवायु से भी जोड़ा। तेजी से बढ़ती आबादी के कारण शहर में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। कर्नाटक में इस वर्ष कमजोर मानसून और सूखे की स्थिति ने पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
राज्य सरकार के अनुसार कम बारिश के कारण कर्नाटक के कई हिस्सों में भूजल स्तर प्रभावित हुआ है और फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। सितंबर के मध्य तक सरकार 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी थी और अन्य क्षेत्रों का भी आकलन किया जा रहा था। शिवकुमार ने इससे पहले पानी और बिजली की संभावित कमी के लिए तैयार रहने की बात भी कही थी।
राज्य में सूखे की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष ने राहत व्यवस्था, किसानों की स्थिति, पेयजल और बिजली आपूर्ति सहित कई मुद्दों पर चर्चा की। विपक्षी भाजपा और जेडीएस ने सरकार की तैयारियों और सूखा प्रबंधन पर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस सरकार ने केंद्र से पर्याप्त वित्तीय सहायता की मांग की है।
शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के सूखा राहत प्रस्ताव के तहत मांगी गई सहायता का एक हिस्सा जल्द जारी करने का आग्रह भी किया है। कर्नाटक ने खरीफ 2026 के सूखे से संबंधित राहत के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है। मुख्यमंत्री ने इसमें से 50 प्रतिशत राशि अंतरिम सहायता के रूप में जल्द उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
इसी व्यापक चर्चा के बीच बेंगलुरु का मुद्दा भी सामने आया। राज्य की राजधानी लगातार विस्तार कर रही है और आसपास के क्षेत्रों का तेजी से शहरीकरण हुआ है। रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में शहर दूसरे जिलों और राज्यों से भी लोगों को आकर्षित करता है। इसके साथ ही सड़क यातायात, पानी और नागरिक सुविधाओं की मांग भी बढ़ती है।
मुख्यमंत्री ने इसी विरोधाभास को अपने अंदाज में सामने रखा कि लोग बेंगलुरु की समस्याओं की चर्चा करते हैं, लेकिन शहर छोड़ना नहीं चाहते। विधायकों की “दो शादी” वाली टिप्पणी इसी दौरान आई और सदन में मौजूद सदस्यों की प्रतिक्रिया के कारण यह चर्चा में आ गई।
हालांकि सूखे पर विधानसभा की चर्चा का मुख्य विषय राज्य के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में पानी की कमी था। कई विधायकों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है। विजयपुरा जिले के इंडी से कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने अपने क्षेत्र के कुछ तालुकों को सूखा सूची से बाहर रखने पर नाराजगी जताते हुए इस्तीफा तक सौंप दिया था। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस्तीफा निर्धारित प्रारूप में नहीं होने के कारण स्वीकार नहीं किया गया।
राज्य सरकार का कहना है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों की पहचान निर्धारित मानकों के आधार पर की जा रही है। दूसरी तरफ कई विधायकों का तर्क है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में भी बारिश की कमी और कृषि नुकसान गंभीर है और उन्हें राहत सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
सूखे को लेकर राजनीतिक बहस के बीच सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग की है। वहीं विपक्ष ने राज्य सरकार से मौजूदा संसाधनों और योजनाओं को किसानों तथा सूखा प्रभावित क्षेत्रों की ओर मोड़ने की मांग की है। विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई है।
बेंगलुरु को लेकर शिवकुमार की टिप्पणी इसी गंभीर बहस के बीच आई। उन्होंने शहर की बढ़ती आबादी और यहां रहने के प्रति लोगों के आकर्षण का उल्लेख करते हुए विधायकों पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। बयान के बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई।
फिलहाल सरकार के सामने बड़ी चुनौती राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, बिजली और कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने की है। वहीं बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते महानगर में आबादी के दबाव के अनुरूप पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। विधानसभा में हुई चर्चा ने सूखे के साथ-साथ शहरीकरण और राजधानी पर बढ़ते दबाव को भी बहस के केंद्र में ला दिया है।





