
बेंगलुरु। कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर बढ़ती नाराजगी को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पहल शुरू कर दी है। कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से असंतुष्ट चल रहे कांग्रेस विधायकों को साधने के लिए मुख्यमंत्री ने संवाद बढ़ाने की रणनीति बनाई है। सूत्रों के मुताबिक, शिवकुमार अब हर जिले के कांग्रेस विधायकों के साथ नियमित रूप से नाश्ते पर बैठकें करेंगे और उनकी समस्याओं को सीधे सुनेंगे।
कांग्रेस के अंदर किसी भी तरह के मतभेद और असंतोष को बढ़ने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार चाहते हैं कि विधायक अपनी समस्याएं सार्वजनिक रूप से उठाने के बजाय सीधे नेतृत्व के सामने रखें, ताकि समय रहते समाधान निकाला जा सके।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने उन विधायकों को भी भरोसा दिलाया है, जो मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि ऐसे नेताओं को सरकारी निगमों और बोर्डों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इसके अलावा, उनके विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, डी.के. शिवकुमार ने सोमवार को विधान सौधा स्थित अपने कार्यालय में कोलार और चिक्कबल्लापुर जिलों के नाराज कांग्रेस विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस दौरान विधायकों ने अपनी चिंताओं और मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा।
बैठक में विधायकों ने अपने क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों और राजनीतिक जिम्मेदारियों को लेकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें पार्टी तथा सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।
कांग्रेस में मंत्रिमंडल विस्तार और पदों के बंटवारे को लेकर समय-समय पर असंतोष सामने आता रहा है। कई वरिष्ठ विधायक मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन जगह नहीं मिलने के बाद उनमें नाराजगी देखी गई। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह कदम पार्टी के अंदर संतुलन बनाए रखने की कोशिश माना जा रहा है।
डी.के. शिवकुमार ने विधायकों को भरोसा दिलाया है कि सरकार में जिम्मेदारी केवल मंत्री पद तक सीमित नहीं है। निगमों, बोर्डों और विभिन्न सरकारी संस्थानों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी जा सकती हैं। इसके जरिए पार्टी सभी वर्गों और क्षेत्रों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस सरकार के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना बेहद जरूरी है। कर्नाटक विधानसभा में सरकार की स्थिरता के लिए पार्टी के अंदर अनुशासन और आपसी समन्वय महत्वपूर्ण है। ऐसे में मुख्यमंत्री का सीधे विधायकों से संवाद बढ़ाना रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
नाश्ते पर बैठक की योजना को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। इससे मुख्यमंत्री को जमीनी स्तर की समस्याओं की जानकारी सीधे विधायकों से मिल सकेगी। साथ ही, विधायक भी अपनी बात बिना किसी राजनीतिक दबाव के रख सकेंगे।
डी.के. शिवकुमार इससे पहले भी संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देते रहे हैं। कांग्रेस में उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो संगठनात्मक मामलों को सक्रियता से संभालते हैं। अब वह सरकार और पार्टी दोनों स्तरों पर असंतोष को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साध सकता है। भाजपा पहले भी कांग्रेस सरकार में आंतरिक मतभेदों का आरोप लगाती रही है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि पार्टी में सभी नेताओं को उचित सम्मान और जिम्मेदारी दी जाएगी।
कर्नाटक की राजनीति में निगम और बोर्ड के पदों को भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इन पदों के जरिए विधायकों और नेताओं को सरकार में भागीदारी का अवसर मिलता है। ऐसे में मंत्री पद से वंचित नेताओं को इन पदों का आश्वासन देकर संतुष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल डी.के. शिवकुमार की पहल का उद्देश्य कांग्रेस विधायकों के बीच असंतोष को खत्म करना और सरकार के कामकाज को सुचारू बनाए रखना है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री की जिला स्तर की बैठकों से यह साफ होगा कि पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी कितनी कम होती है।





