
Karnataka कर्नाटक: पश्चिम एशियाई संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार वैश्विक स्तर पर चल रहे संकटों को प्रभावी ढंग से संभालने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, लेकिन सरकार इसके समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।
ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि पेट्रोल और डीज़ल जैसे आवश्यक ईंधन की खपत आम लोगों के लिए कम करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी, परिवहन, कृषि और छोटे व्यवसाय पूरी तरह ईंधन पर निर्भर हैं, ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वैश्विक झगड़ों और पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में चल रहे संकटों से उत्पन्न आर्थिक दबाव को संभालने में असफल रही है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही कूटनीतिक रणनीति अपनाई जाती तो घरेलू बाजार में इस तरह का असर कम किया जा सकता था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद देश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं और विपक्षी दल इस मुद्दे को केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक हथियार बना रहे हैं। डीके शिवकुमार का बयान भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है।
वहीं, केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन में आए बदलाव के कारण यह निर्णय लेना आवश्यक हो गया था। तेल कंपनियों के बढ़ते नुकसान और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए कीमतों में संशोधन किया गया है।
इस बीच आम जनता पर बढ़ते ईंधन खर्च को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। परिवहन लागत, खाद्य वस्तुओं की कीमतें और अन्य सेवाओं पर इसके प्रभाव की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्थिति स्थिर नहीं होती है, तो आने वाले समय में महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी ने न केवल आर्थिक स्तर पर असर डाला है, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी नई बहस को जन्म दिया है, जिसमें केंद्र और राज्य नेतृत्व के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।





