कर्नाटक

Cauvery जल विवाद पर बोले डीके शिवकुमार, ‘किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध’

Ratna Netam
2 Aug 2026 7:19 PM IST
Cauvery  जल विवाद पर बोले डीके शिवकुमार, ‘किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध’
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बेंगलुरु : कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य के किसानों और जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कन्नड़ समर्थक संगठनों से प्रस्तावित ‘कर्नाटक बंद’ का आह्वान वापस लेने की अपील की और कहा कि ऐसे विरोध प्रदर्शनों से किसी को फायदा नहीं होगा।

डीके शिवकुमार ने बताया कि कावेरी जल विवाद को देखते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर अपनी बेंगलुरु यात्रा को टालने का फैसला किया है। दोनों नेताओं की सोमवार को कावेरी मुद्दे पर मुलाकात प्रस्तावित थी, लेकिन शिवकुमार ने विजय से बातचीत के लिए बेहतर माहौल बनाने के उद्देश्य से यात्रा स्थगित करने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने में मदद करेगा।

कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक में पिछले कुछ दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। कन्नड़ समर्थक संगठनों ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के आदेश के खिलाफ 13 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। इस आदेश में तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की सिफारिश को बरकरार रखा गया था।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में विरोध प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि बारिश होने के बाद जलाशयों में पानी की स्थिति पहले से बेहतर हुई है और राज्य के सभी राजनीतिक दलों ने भी सरकार के प्रयासों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि बंद करने से आम जनता को परेशानी होगी और इससे समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।

सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार कानूनी दायरे में रहकर कर्नाटक के हितों की रक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि पीने के पानी की जरूरतों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा कानूनी और कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। सरकार लगातार पानी की उपलब्धता और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद कावेरी नदी घाटी क्षेत्र से आते हैं और किसान परिवार से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के 7.5 करोड़ लोगों को सरकार की प्रतिबद्धता पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य के किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपनी कानूनी टीम से सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि अदालत से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत है और वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की राय के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे।

शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना कर्नाटक के लिए महत्वपूर्ण है और इस पर आगे बढ़ने की जरूरत है। मेकेदातु परियोजना के तहत कावेरी नदी पर एक जलाशय बनाने की योजना है, जिसका तमिलनाडु विरोध करता रहा है। तमिलनाडु का कहना है कि इससे उसके हिस्से के पानी पर असर पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रमुख जलाशयों की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि काबिनी, कृष्णराज सागर (केआरएस), हेमावती और हारंगी जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक को पीने के पानी के लिए करीब 40 टीएमसी पानी सुरक्षित रखना जरूरी है, जिसमें 36 टीएमसी तत्काल जरूरतों के लिए और चार टीएमसी आपातकालीन स्थिति के लिए रखा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य से पानी केवल पेयजल आपूर्ति वाले क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छोड़ा गया था, सिंचाई के लिए नहीं। पानी की आवक बढ़ने के कारण बांधों की सुरक्षा के लिए कुछ मात्रा में पानी छोड़ना जरूरी हो गया था।

डीके शिवकुमार ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विपक्षी नेता और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी नेताओं ने राज्य सरकार के प्रयासों का समर्थन किया और कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए सहयोग का भरोसा दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद कन्नड़ समर्थक संगठनों से बातचीत करेंगे और उन्हें बंद वापस लेने के लिए समझाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने दोहराया कि कर्नाटक सरकार कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा करती रहेगी और किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञों की सलाह ली जाएगी।

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