
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य की कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं को सफल बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तंज कसा है। उन्होंने ट्रंप की ओर से अमेरिकी वयस्क नागरिकों को 5,000 डॉलर देने के प्रस्ताव की तुलना कांग्रेस के गारंटी मॉडल से करते हुए कहा कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति भी उनकी नकल कर रहे हैं।
डीके शिवकुमार ने यह टिप्पणी बेंगलुरु स्थित कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक एनएल नरेंद्र बाबू कांग्रेस में शामिल हुए। इस दौरान शिवकुमार ने पार्टी की कल्याणकारी योजनाओं, कांग्रेस की राजनीतिक विचारधारा और जनता के बीच गारंटी कार्यक्रमों की स्वीकार्यता को लेकर अपनी बात रखी।
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने लोगों की रोजमर्रा की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गारंटी योजनाएं लागू कीं। विपक्षी दलों ने शुरुआत में इन योजनाओं का विरोध किया, लेकिन अब दूसरे राज्यों और देशों में भी नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देने की घोषणाएं की जा रही हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने ट्रंप के प्रस्ताव का उल्लेख किया।
ट्रंप के प्रस्ताव पर साधा निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2026 में रिपब्लिकन पार्टी के सम्मेलन के दौरान प्रस्ताव रखा कि यदि मध्यावधि चुनाव के बाद रिपब्लिकन पार्टी का अमेरिकी संसद के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—पर नियंत्रण बना रहता है, तो प्रत्येक वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर दिए जाएंगे।
ट्रंप ने इस प्रस्ताव को आर्थिक लाभांश के रूप में पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की मजबूत अर्थव्यवस्था और बढ़ते राजस्व के कारण इसका खर्च वहन किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने प्रस्ताव के लिए धन जुटाने और इसे लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया स्पष्ट नहीं की है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा है कि इस तरह के भुगतान के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। प्रस्ताव को अभी योजना या कानून का रूप नहीं मिला है।
इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हमारी नकल कर रहे हैं।” उनका दावा था कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा लागू गारंटी योजनाओं की व्यापक स्वीकार्यता ने प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता के मॉडल को मजबूती दी है। उनका बयान राजनीतिक तुलना है, न कि इस बात का प्रमाण कि ट्रंप की योजना वास्तव में कर्नाटक सरकार से प्रेरित है।
कांग्रेस ने गिनाईं पांच गारंटी योजनाएं
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने पांच प्रमुख गारंटी देने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद सरकार ने शक्ति, गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य और युवा निधि जैसी योजनाएं शुरू कीं। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा, पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में मुफ्त बिजली, परिवार की महिला मुखिया को आर्थिक सहायता, खाद्य सुरक्षा और बेरोजगार युवाओं को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने का दावा किया गया।
शिवकुमार ने कहा कि इन योजनाओं ने आम परिवारों को महंगाई के दौर में आर्थिक राहत दी है। उनका कहना था कि गारंटी योजनाओं को मुफ्तखोरी बताने वाले राजनीतिक दल अब इसी प्रकार की आर्थिक सहायता के प्रस्ताव लेकर सामने आ रहे हैं। कांग्रेस लगातार इन योजनाओं को अपने शासन मॉडल और चुनावी रणनीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करती रही है।
हालांकि, विपक्ष समय-समय पर इन योजनाओं की वित्तीय स्थिरता, पात्रता संबंधी शर्तों और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाता रहा है। भाजपा नेताओं का आरोप रहा है कि गारंटी योजनाओं के कारण विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धन प्रभावित होता है। कांग्रेस सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि जनकल्याण पर खर्च करना विकास का ही हिस्सा है।
एनएल नरेंद्र बाबू कांग्रेस में शामिल
कार्यक्रम में भाजपा के पूर्व विधायक एनएल नरेंद्र बाबू ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी नेतृत्व ने उनका स्वागत करते हुए दावा किया कि उनके आने से संगठन को मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद, मंत्री रामलिंगा रेड्डी और कई अन्य नेता मौजूद रहे।
नरेंद्र बाबू के कांग्रेस में शामिल होने को बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। शिवकुमार ने इस अवसर का उपयोग कांग्रेस की नीतियों का प्रचार करने और विपक्ष को घेरने के लिए किया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़ी योजनाओं के कारण अलग-अलग दलों के नेता कांग्रेस की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
कार्यक्रम से संबंधित प्रकाशित तस्वीरों और रिपोर्टों में डीके शिवकुमार को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बताया गया है। इसलिए उन्हें उपमुख्यमंत्री बताने वाली प्रारंभिक जानकारी वर्तमान पद के लिहाज से सही नहीं है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम रविवार 13 सितंबर को आयोजित हुआ था।
अमेरिकी प्रस्ताव पर भी उठ रहे सवाल
ट्रंप के 5,000 डॉलर वाले प्रस्ताव ने अमेरिका में भी राजनीतिक और आर्थिक बहस शुरू कर दी है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, प्रत्येक वयस्क नागरिक को यह रकम देने पर एक लाख करोड़ डॉलर से अधिक का खर्च आ सकता है। अमेरिकी विपक्षी नेताओं और आर्थिक विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय कर्ज, बजट घाटे और महंगाई पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है।
ट्रंप का कहना है कि भुगतान को संघीय बजट में शामिल करना आसान होगा, लेकिन अमेरिकी संसद से स्वीकृति मिलने तक यह केवल चुनावी प्रस्ताव है।
ऐसे में शिवकुमार का बयान कांग्रेस की गारंटी राजनीति को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है। इससे राज्य में गारंटी योजनाओं की उपयोगिता और उनकी वित्तीय व्यवहार्यता पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है।





