कर्नाटक

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर किसानों को डीके शिवकुमार का भरोसा,

Kavita2
21 Sept 2026 10:52 AM IST
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर किसानों को डीके शिवकुमार का भरोसा,
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सकलेशपुर। पश्चिमी घाट से जुड़ी डॉ. के. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर चल रहे विरोध के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि जमीन आवंटन से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए सरकार कदम उठाएगी और जरूरत पड़ी तो किसानों के हित में कानूनों में बदलाव भी किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने यह बात रविवार को सकलेशपुर में पश्चिमी घाट क्षेत्र में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की सिफारिशों को लेकर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसान समुदाय की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाना है, ताकि किसी भी वर्ग को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

डीके शिवकुमार ने कहा कि पश्चिमी घाट क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर सरकार किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जमीन से संबंधित समस्याओं, स्थानीय लोगों की चिंताओं और अन्य मामलों का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि किसानों के हितों की रक्षा के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई तो सरकार इस दिशा में भी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आजीविका और अधिकारों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाएंगे।

कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर पश्चिमी घाट क्षेत्र के कई इलाकों में स्थानीय लोगों और किसानों की ओर से विरोध किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि रिपोर्ट के लागू होने से उनकी खेती, जमीन और दैनिक जीवन पर असर पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर वह केंद्र सरकार के सामने भी किसानों की चिंताओं को रखेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए केंद्र के पास सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी घाट पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसका संरक्षण भी जरूरी है, लेकिन इसके साथ वहां रहने वाले लोगों और किसानों के हितों का ध्यान रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

जनसभा में किसानों ने अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। किसानों ने मांग की कि पश्चिमी घाट क्षेत्र से जुड़े फैसले लेते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की आजीविका को प्राथमिकता दी जाए।

किसानों का कहना है कि वे पर्यावरण संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसी नीतियां नहीं होनी चाहिए जिससे ग्रामीणों और कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार उनकी समस्याओं को समझती है और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों के हितों की रक्षा करना है।

कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट पश्चिमी घाट क्षेत्र में पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण से जुड़ी है। इस रिपोर्ट को लेकर कई राज्यों में अलग-अलग राय सामने आती रही है। जहां पर्यावरण संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया जाता है, वहीं स्थानीय समुदाय इसके प्रभावों को लेकर चिंता जताते रहे हैं।

डीके शिवकुमार के बयान के बाद किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम उठाएगी। हालांकि, रिपोर्ट को लेकर अंतिम निर्णय और आगे की प्रक्रिया केंद्र व राज्य सरकारों के बीच होने वाली चर्चाओं पर निर्भर करेगी।

फिलहाल पश्चिमी घाट क्षेत्र में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर बहस जारी है। किसानों की मांगों और सरकार के आश्वासन के बीच अब नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।

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