
मैसूरु/कर्नाटक: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने काबिनी जलाशय से पानी छोड़े जाने को लेकर चल रहे विरोध के बीच कहा है कि जलाशय भरने के बाद पानी छोड़ना एक प्राकृतिक और आवश्यक प्रक्रिया है, जिसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे पानी छोड़े जाने का विरोध करने का फैसला वापस लें और किसी भी तरह की जोखिम भरी गतिविधि से बचें।
शनिवार को मैसूरु हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि काबिनी जलाशय में लगातार पानी का स्तर बढ़ रहा है। जब बांध अपनी क्षमता तक भर जाएगा, तो अतिरिक्त पानी को बाहर निकालना ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा, "काबिनी जलाशय भर रहा है। जब बांध भर जाएगा, तो पानी छोड़ना ही पड़ेगा। इसे रोका नहीं जा सकता।" उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि वे पानी रोकने के लिए आंदोलन करने के फैसले पर पुनर्विचार करें।
जलाशय की स्थिति पर अधिकारियों की नजर
डीके शिवकुमार ने बताया कि काबिनी जलाशय में पानी के भंडारण की स्थिति पर अधिकारी हर घंटे नजर रख रहे हैं और लगातार जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलाशय में पानी का प्रवाह काफी बढ़ गया है और फिलहाल पानी का बहाव 40 हजार क्यूसेक तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन एक तकनीकी और प्राकृतिक प्रक्रिया है। जलाशय की सुरक्षा और आसपास के इलाकों की रक्षा के लिए जरूरत के अनुसार पानी छोड़ना जरूरी होता है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति किसी एक व्यक्ति या राज्य की संपत्ति नहीं है। इंसानों को प्रकृति के नियमों के अनुसार ही काम करना पड़ता है।
तमिलनाडु की ओर पानी छोड़े जाने को लेकर विवाद
कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। काबिनी जलाशय से पानी छोड़े जाने को लेकर कर्नाटक के कुछ संगठनों और किसानों ने विरोध जताया है।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडु की ओर पानी के बहाव को रोकने के लिए आंदोलन और बंद का आह्वान करने की बात कही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध का कोई ठोस आधार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन जलाशय और नदी से जुड़े फैसले केवल भावनाओं के आधार पर नहीं लिए जा सकते। इसके लिए तकनीकी स्थिति, जल स्तर और प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना पड़ता है।
पानी के पास नहीं जाने की अपील
डीके शिवकुमार ने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पानी छोड़ने वाले स्थानों पर जाना खतरनाक हो सकता है।
उन्होंने अपील की कि कोई भी व्यक्ति पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों में न जाए और न ही पानी के पास जाकर विरोध प्रदर्शन करे। उन्होंने कहा कि तेज बहाव में लोग अपनी जान गंवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासन लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है और सभी से सहयोग की उम्मीद करता है।
लोकतांत्रिक विरोध का किया सम्मान
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है। सरकार शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान करती है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि विरोध ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे लोगों की जान खतरे में पड़े या प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में बाधा आए।
उन्होंने कहा कि कावेरी जैसे महत्वपूर्ण जल संसाधन के मामले में सभी पक्षों को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।
जल प्रबंधन पर जोर
कर्नाटक सरकार का कहना है कि काबिनी जलाशय में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है और बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों द्वारा जलस्तर की निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है।
कावेरी नदी से जुड़े मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहती है। ऐसे में सरकारों के लिए जल वितरण, किसानों की जरूरत और जलाशयों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण रहता है।
फिलहाल डीके शिवकुमार ने लोगों से संयम बरतने और प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने साफ कहा कि जलाशय भरने की स्थिति में पानी छोड़ना प्राकृतिक और तकनीकी आवश्यकता है, जिसे किसी आंदोलन के जरिए रोका नहीं जा सकता।





