
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डीके शिवकुमार ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को उनकी उम्र का हल देते हुए “पागलों की तरह बात करने वाला” बताया था। डीके शिवकुमार ने बुधवार को कहा कि यह बयान न सिर्फ असम्मानजनक है, बल्कि हमारे राजनीतिक संवाद की गरिमा को भी ठेस पहुँचाता है।
शिवकुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि मल्लिकार्जुन खड़गे एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने दशकों तक देश और जनता के हित में काम किया है। उन्होंने कहा कि खड़गे के पास भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में बड़ी विरासत और जिम्मेदारी है, जो कभी महात्मा गांधी जैसे नेताओं के पास थी। इतने बड़े और प्रतिष्ठित पद पर बैठे नेता को अपमानजनक करना राजनीतिक संस्कृति के लिए नुकसानदेह है।
डीके शिवकुमार ने आगे कहा कि किसी भी राजनीतिक बहस में भले ही विचारधाराओं में विचलन हों, लेकिन वरिष्ठ नेताओं का सम्मान बनाए रखना लोकतांत्रिक मूल्य है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की अपमानजनक भाषा से केवल राजनीतिक संवाद की गुणवत्ता समायोजित है और जनता में गलत संदेश जाता है।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके शिवकुमार ने मांग की कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा तुरंत और बिना किसी शर्त के मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी लेते। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल कांग्रेस अध्यक्ष के प्रति अपमान हैं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक और राजनीतिक विचारधारा की इज्जत को चोट पहुंचाते हैं।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान बनाए रखना हमारे राजनीतिक संवाद की उन्नति और विस्थापन के लिए जरूरी है। डीके शिवकुमार ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि खड़गे ने हमेशा दलित, पिछड़े और दबे-कुचले निकायों के हित में काम किया है और उन्हें अपमानित करना उन समुदायों के प्रति भी अपमान जैसा है।
कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने साफ किया कि राजनीति में विचलन हो सकते हैं, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता को व्यक्तिगत या अपमानजनक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बनाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले में उचित और लंबित कार्रवाई होगी।
डीके शिवकुमार ने मीडिया और जनता से भी अपील की कि वे राजनीतिक संवाद में सम्मान और मर्यादा बनाए रखें और किसी भी तरह की अपमानजनक भाषा को बढ़ावा न दें। उनका कहना था कि नेताओं के बीच स्वस्थ राजनीतिक बहस लोकतंत्र की बढ़त के लिए ज़रूरी है, लेकिन यह अपमानजनक टिप्पणियों के बिना होनी चाहिए।
इस पोस्ट के माध्यम से डीके शिवकुमार ने असम के मुख्यमंत्री पर स्पष्ट संदेश दिया कि वरिष्ठ नेताओं के अपमान को सहन नहीं किया जाएगा और इसके लिए तत्काल माफी अनिवार्य है।





