कर्नाटक

आरएसएस के पथ संचलन पर अनुमति का विवाद, सरकार ने दिया आचार संहिता का हवाला

nidhi
26 Oct 2026 7:57 AM IST
आरएसएस के पथ संचलन पर अनुमति का विवाद, सरकार ने दिया आचार संहिता का हवाला
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कर्नाटक में पथ संचलन को लेकर राजनीतिक बहस तेज

बेंगलुरु: कर्नाटक में अनुमति को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच रविवार, 25 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कई स्थानों पर पथ संचलन आयोजित किया। बेंगलुरु, हुबली और कलबुर्गी सहित विभिन्न शहरों में स्वयंसेवक कार्यक्रमों में शामिल हुए। आयोजनों के दौरान पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। दूसरी ओर, कुछ स्थानों पर अनुमति संबंधी कारणों और चुनाव आचार संहिता के चलते कार्यक्रम स्थगित किए गए अथवा उनकी तारीख बदली गई। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर संघ को परेशान करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया है। बेंगलुरु के जयनगर में आयोजित पथ संचलन में भाजपा नेता आर अशोक और चालवाडी नारायणस्वामी भी शामिल हुए। शहर के अन्य हिस्सों में भी स्वयंसेवकों ने मार्च निकाला। इनमें बच्चे, युवा और वरिष्ठ स्वयंसेवक शामिल रहे। बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त और भाजपा नेता भास्कर राव भी कार्यक्रमों में पहुंचे। स्वयंसेवकों ने निर्धारित क्रम में कदमताल करते हुए पथ संचलन किया। अनुमति को लेकर पहले से चल रही बहस के कारण इन आयोजनों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रही।

हुबली में नेहरू मैदान से निकले पथ संचलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और हुबली-धारवाड़ सेंट्रल के विधायक महेश तेंगिनकाई भी मौजूद रहे। संघ के शताब्दी समारोहों और विजयादशमी से जुड़े कार्यक्रमों के तहत ये आयोजन किए गए। भाजपा नेताओं की मौजूदगी और अनुमति पर उनके बयानों ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक महत्व दे दिया। पार्टी ने कुछ स्थानों पर कार्यक्रमों को मंजूरी नहीं मिलने पर राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
कलबुर्गी में पथ संचलन के लिए सशर्त अनुमति दी गई थी। आयोजकों को निर्धारित मार्ग का पालन करने और भड़काऊ भाषण नहीं देने के निर्देश दिए गए। रामनगर में भी कार्यक्रम के लिए शर्तों के साथ मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से आयोजन की अनुमति के साथ लागू शर्तों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर रहा। इन स्थानों पर अनुमति मिलने से यह भी स्पष्ट हुआ कि राज्य में सभी कार्यक्रमों पर एक जैसा निर्णय नहीं लिया गया था। अलग-अलग स्थानों पर प्रशासनिक परिस्थितियों के अनुसार फैसले हुए।
वहीं, तुमकुरु में प्रस्तावित कार्यक्रम विधान परिषद चुनाव से जुड़ी आचार संहिता के मद्देनजर स्थगित किया गया। इसके लिए एक नवंबर की वैकल्पिक तारीख तय किए जाने की जानकारी है। कोलार जिले के मुलबागल में पथ संचलन की तारीख बदलकर 31 अक्टूबर की गई। चिक्कबल्लापुर में जिला प्रशासन द्वारा अनुमति वापस लेने के बाद आयोजन टाल दिया गया। कोप्पल में भी कार्यक्रम स्थगित किए जाने की खबर सामने आई है। इन फैसलों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़े हैं।
हुबली के कार्यक्रम में शामिल केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कुछ जगहों पर अनुमति नहीं दिए जाने के तर्कों पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि आदर्श आचार संहिता को बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। जोशी ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप भी लगाया और कहा कि आरएसएस तथा भाजपा मुसलमानों के खिलाफ नहीं हैं। उनकी टिप्पणियां अनुमति विवाद पर भाजपा के राजनीतिक विरोध का हिस्सा थीं। सरकार द्वारा संगठन को परेशान करने की बात भाजपा का आरोप है।
भाजपा नेता आर अशोक ने भी प्रतिबंधों और अनुमति से जुड़े फैसलों की आलोचना की। उन्होंने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए संघ के कार्यक्रमों में बाधा डालने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि प्रशासनिक नियमों का इस्तेमाल किसी संगठन के खिलाफ राजनीतिक आधार पर नहीं होना चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से सार्वजनिक आयोजनों से पहले औपचारिक मंजूरी लेने की आवश्यकता बताई गई है। इसी बिंदु पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बना हुआ है।
कार्यक्रमों से पहले राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा था कि स्थानीय पुलिस को केवल सूचना देना अनुमति लेने के बराबर नहीं है। उन्होंने संघ से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करने और अधिकृत प्रशासन की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद ही आयोजन करने को कहा था। उनका कहना था कि सार्वजनिक सड़कों पर एक साथ कई जुलूस आयोजित होने की स्थिति में पुलिस को व्यापक तैयारियां करनी पड़ती हैं। इसलिए आयोजन संबंधी जानकारी और अनुमति की प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है।
सरकार और भाजपा के बयानों से विवाद के दो अलग पक्ष सामने आए हैं। सरकार इसे अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी आचार संहिता से जोड़ रही है। भाजपा इसे संघ के प्रति राजनीतिक विरोध का परिणाम बता रही है। जिन स्थानों पर कार्यक्रम हुए, वहां पुलिस सुरक्षा के बीच पथ संचलन निकाला गया। जहां आयोजन टले हैं, वहां घोषित वैकल्पिक तारीखों और प्रशासनिक मंजूरी पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी। फिलहाल कई शहरों में कार्यक्रम संपन्न होने के बावजूद अनुमति प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
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