कर्नाटक

मेट्रो किराए पर विवाद, ₹90 वसूली के बीच ₹75 का अनुमान

Kavita2
27 July 2026 10:32 AM IST
मेट्रो किराए पर विवाद, ₹90 वसूली के बीच ₹75 का अनुमान
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बेंगलुरु : मेट्रो के किराए को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। यात्रियों का कहना है कि वर्तमान में वे अधिकतम ₹90 तक किराया चुका रहे हैं, जबकि बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) के एक आधिकारिक दस्तावेज में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2031 तक मेट्रो का अधिकतम किराया ₹75 तक ही होना चाहिए। इस अंतर को लेकर यात्रियों ने किराया नीति की समीक्षा और तत्काल बदलाव की मांग उठाई है।

मामला बेंगलुरु मेट्रो के फेज-3A प्रोजेक्ट से जुड़ा है। जून 2024 में तैयार की गई इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) में किराया वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, यदि हर तीन साल में किराए में 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है, तो वर्ष 2031 तक मेट्रो का अधिकतम किराया लगभग ₹75 तक पहुंचना चाहिए।

हालांकि, दूसरी ओर BMRCL ने फेयर फिक्सेशन कमेटी (FFC) की सिफारिशों के आधार पर फरवरी 2025 से मेट्रो किराए में बढ़ोतरी लागू कर दी। इसके बाद यात्रियों से अधिकतम ₹90 तक किराया लिया जा रहा है। यही अंतर अब यात्रियों और मेट्रो प्रबंधन के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

यात्रियों का कहना है कि किराया बढ़ोतरी और आधिकारिक दस्तावेजों में दिए गए अनुमान के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। उनका तर्क है कि यदि BMRCL के अपने दस्तावेजों में भविष्य के लिए कम किराए का अनुमान लगाया गया था, तो वर्तमान में इतना अधिक किराया क्यों लिया जा रहा है।

कई मेट्रो यात्रियों ने मांग की है कि किराया निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। उनका कहना है कि किराए में बदलाव करते समय यात्रियों की सुविधा, दैनिक यात्रा करने वालों की आर्थिक स्थिति और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

BMRCL की ओर से किराया बढ़ोतरी का आधार फेयर फिक्सेशन कमेटी की सिफारिशों को बताया गया है। मेट्रो संचालन से जुड़े खर्च, रखरखाव, कर्मचारियों का वेतन, ऊर्जा लागत और भविष्य की परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए किराए में बदलाव किए जाते हैं।

बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में मेट्रो लाखों लोगों के लिए रोजाना आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में किराए में बढ़ोतरी का सीधा असर नियमित यात्रियों पर पड़ता है। खासकर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए किराया एक बड़ा खर्च बन जाता है।

यात्रियों का कहना है कि मेट्रो एक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था है और इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सुविधा देना होना चाहिए। उनका मानना है कि अगर किराया लगातार बढ़ता रहेगा तो कई लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल करने को मजबूर हो सकते हैं, जिससे शहर में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या बढ़ सकती है।

फेज-3A मेट्रो परियोजना बेंगलुरु के परिवहन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण योजना है। रेड लाइन के तहत हेब्बल से सरजापुर तक प्रस्तावित यह मार्ग शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने वाला है। परियोजना से जुड़े दस्तावेजों में भविष्य के संचालन और वित्तीय अनुमान भी शामिल किए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मेट्रो किराया तय करना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें संचालन लागत, यात्रियों की संख्या, निवेश और भविष्य की योजनाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। हालांकि, यात्रियों की ओर से उठाए गए सवालों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि किराया सीधे तौर पर आम लोगों की जेब से जुड़ा मुद्दा है।

फिलहाल किराए को लेकर बहस जारी है। यात्रियों ने BMRCL से मांग की है कि वह किराया निर्धारण की समीक्षा करे और दस्तावेजों में दिए गए अनुमानों तथा वर्तमान किराए के अंतर को स्पष्ट करे।

मेट्रो प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BMRCL किराया नीति में कोई बदलाव करता है या नहीं। फिलहाल बेंगलुरु मेट्रो का किराया शहर के यात्रियों के बीच एक प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।

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