
पुत्तूर। दक्षिण कन्नड़ जिले के पुत्तूर के डार्बे इलाके में एक डिजिटल सर्विस सेंटर पर कागजात को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक हो गया। तकनीकी खराबी के कारण कुछ दस्तावेज खराब होने के बाद दो गुटों के बीच बहस हुई और मामला मारपीट तक पहुंच गया। घटना के बाद पुत्तूर पुलिस ने तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, घटना शुक्रवार को डार्बे इलाके में स्थित एक डिजिटल सर्विस सेंटर पर हुई। बताया जा रहा है कि सेंटर में तकनीकी खराबी के कारण कुछ लोगों के महत्वपूर्ण कागजात खराब हो गए थे। इसी बात को लेकर संबंधित लोगों और सेंटर संचालकों के बीच बातचीत शुरू हुई। दस्तावेजों को लेकर हुए विवाद में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ती गई और देखते ही देखते हाथापाई की स्थिति बन गई।
पुलिस के अनुसार, घटना के संबंध में मारपीट, आपराधिक धमकी और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने से संबंधित आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पूरे घटनाक्रम से जुड़े अलग-अलग पक्षों की शिकायतों के आधार पर तीन मामले दर्ज किए हैं।
पहले मामले में एक महिला की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि डिजिटल सर्विस सेंटर में तकनीकी खराबी के कारण उसके दस्तावेज खराब हो गए थे। दस्तावेजों को दोबारा तैयार कराने या उन्हें ठीक कराने की जरूरत थी। महिला का कहना है कि उसने सेंटर के मालिकों अंजना पाई और सुदर्शन पाई से इस समस्या का समाधान करने की मांग की।
शिकायत के मुताबिक, महिला ने दोनों से खराब हुए दस्तावेजों को ठीक करने या नए दस्तावेज तैयार कराने के लिए 300 रुपये देने को कहा था। आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। महिला ने पुलिस को दी शिकायत में दावा किया कि अंजना पाई और सुदर्शन पाई ने उसके साथ तथा उसके साथ मौजूद दो अन्य लोगों के साथ मारपीट की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी गई।
महिला की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले में पुलिस ने 29 वर्षीय सुदर्शन पाई को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद सुदर्शन पाई को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इस घटना के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े अन्य पक्षों की शिकायतों को भी दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, विवाद के दौरान दोनों गुटों के बीच हाथापाई हुई थी। इस दौरान कथित तौर पर पुलिस के काम में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ ड्यूटी के दौरान हस्तक्षेप करने के आरोप भी सामने आए। इसी आधार पर अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।
पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि डिजिटल सर्विस सेंटर में दस्तावेज किस तरह खराब हुए और विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगा रही है कि मारपीट के दौरान दोनों पक्षों की ओर से क्या-क्या हुआ और किन लोगों की भूमिका रही।
डिजिटल सर्विस सेंटर में तकनीकी खराबी के कारण दस्तावेज खराब होने का मुद्दा इस विवाद की मुख्य वजह बताया जा रहा है। ऐसे केंद्रों पर आम लोगों के पहचान संबंधी दस्तावेज, आवेदन और अन्य महत्वपूर्ण कागजात तैयार या प्रिंट किए जाते हैं। इसलिए दस्तावेज खराब होने पर संबंधित व्यक्ति को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी मामले में समाधान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद खड़ा हुआ।
पुलिस ने मामले में शामिल लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है, ताकि विवाद के दौरान हुई घटनाओं का क्रम स्पष्ट हो सके। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या घटना से संबंधित कोई वीडियो फुटेज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध हैं।
तीन अलग-अलग मामले दर्ज होने से स्पष्ट है कि पुलिस ने घटना के विभिन्न पहलुओं को अलग-अलग शिकायतों के आधार पर जांच के दायरे में लिया है। मारपीट और धमकी के आरोपों के साथ-साथ पुलिस की ड्यूटी में बाधा डालने का आरोप भी जांच का हिस्सा है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद डार्बे इलाके में डिजिटल सर्विस सेंटर पर हुए इस विवाद को लेकर चर्चा बनी हुई है। दस्तावेजों से जुड़ी समस्या को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और मामला अदालत तक पहुंच गया।
फिलहाल सुदर्शन पाई न्यायिक हिरासत में है। पुलिस तीनों मामलों की जांच कर रही है और अन्य आरोपों तथा संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किसकी क्या भूमिका थी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि दस्तावेजों या अन्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान कानून अपने हाथ में लेने के बजाय संबंधित अधिकारियों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए।





