
हासन। कर्नाटक के हासन जिले में विकास कार्यों में देरी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। हासन विधानसभा क्षेत्र के विधायक स्वरूप प्रकाश ने जिला प्रभारी मंत्री के.एम. शिवलिंगेगौड़ा के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री जिले के अधिकारियों पर नियंत्रण रखने में विफल रहे हैं, जिसके कारण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से 185 करोड़ रुपये की महात्मा गांधी योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों में देरी को लेकर विधायक ने नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि अभी तक योजना का एक्शन प्लान तैयार नहीं हुआ है और टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है। विधायक ने मंत्री के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक वार्ड का दौरा करने से पूरे जिले का विकास संभव नहीं है।
मंत्री के दौरे में अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी
विधायक स्वरूप प्रकाश ने बताया कि जब जिला प्रभारी मंत्री के.एम. शिवलिंगेगौड़ा दोड्डामंडिगनाहल्ली गांव पहुंचे, तब संबंधित विभागों के अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे।
उन्होंने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि मंत्री के दौरे के दौरान आवश्यक अधिकारियों की अनुपस्थिति प्रशासनिक समन्वय की कमी को दर्शाती है।
विधायक का आरोप है कि जिला प्रभारी मंत्री अधिकारियों से प्रभावी तरीके से काम नहीं करा पा रहे हैं। इसके कारण आम जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिकारी मंत्री के कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होते, तो आम नागरिकों की शिकायतों और विकास कार्यों की समीक्षा किस तरह की जाएगी।
185 करोड़ की योजना पर उठाए गंभीर सवाल
विवाद का प्रमुख कारण 185 करोड़ रुपये की महात्मा गांधी योजना के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों में कथित देरी है।
स्वरूप प्रकाश ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी राशि की योजना होने के बावजूद संबंधित विभागों ने अभी तक विस्तृत कार्ययोजना तैयार नहीं की है।
उनके अनुसार, योजना के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यों को शुरू करने के लिए आवश्यक टेंडर प्रक्रिया भी लंबित है।
विधायक ने कहा कि विकास योजनाओं की घोषणा करना ही पर्याप्त नहीं है। उनका समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
उन्होंने जिला प्रशासन और मंत्री से सवाल किया कि जब बजट से संबंधित योजना सामने आ चुकी है, तो उसके कार्यान्वयन में इतनी देरी क्यों हो रही है।
हालांकि योजना की प्रशासनिक स्वीकृति, धनराशि जारी होने की स्थिति और टेंडर में देरी के आधिकारिक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जनता की समस्याएं सुनने के बजाय अधिकारियों पर नाराज होने का आरोप
विधायक स्वरूप प्रकाश ने जिला प्रभारी मंत्री की कार्यशैली की भी आलोचना की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक बैठकों में मंत्री लोगों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनने के बजाय अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करते हैं।
विधायक का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों को डांटने या उनकी आलोचना करने से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
उनके अनुसार, मंत्री को संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्यों की प्रगति सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल अधिकारियों से जवाब मांगना नहीं, बल्कि लोगों की शिकायतों का प्रभावी समाधान कराना भी है।
एक वार्ड का दौरा करने से नहीं होगा विकास
स्वरूप प्रकाश ने मंत्री के क्षेत्रीय दौरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल एक वार्ड का निरीक्षण करने से पूरे हासन का विकास संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिले के अलग-अलग इलाकों में लोगों की समस्याएं अलग हैं। ऐसे में प्रशासन को सभी क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों की योजना बनानी चाहिए।
विधायक के अनुसार, स्थानीय जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रभारी मंत्री की कार्यशैली में प्रभावी योजना और प्रशासनिक समन्वय की कमी दिखाई दे रही है।
विधायक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए यहां तक कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हासन को ऐसा जिला प्रभारी मंत्री मिला है।
प्रशासनिक कार्यशैली पहले भी रही चर्चा में
जिला प्रभारी मंत्री के.एम. शिवलिंगेगौड़ा की कार्यशैली पहले भी सार्वजनिक विवादों में रही है।
सितंबर 2026 में हासन में आयोजित एक जनशिकायत कार्यक्रम के दौरान सरकारी अधिकारियों को काम पूरा करने पर सम्मानस्वरूप कुछ देने संबंधी उनकी टिप्पणी पर विवाद हुआ था।
इस बयान की आलोचना के बाद मंत्री ने स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य रिश्वत को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की बात कहना था।
उन्होंने कहा था कि किसी भी नागरिक को सरकारी काम कराने के लिए रिश्वत देने की जरूरत नहीं है।
विकास कार्यों में देरी से जनता पर पड़ सकता है असर
185 करोड़ रुपये की योजना का कार्यान्वयन समय पर नहीं होने के आरोपों ने स्थानीय विकास से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसी भी सरकारी परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए विस्तृत कार्ययोजना, तकनीकी स्वीकृति, बजटीय व्यवस्था और निविदा प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
इनमें देरी होने पर परियोजनाओं की शुरुआत प्रभावित हो सकती है। इससे स्थानीय लोगों को प्रस्तावित सुविधाओं का लाभ मिलने में भी अधिक समय लग सकता है।
हालांकि संबंधित योजना के तहत किन-किन कार्यों को मंजूरी दी जानी है, इसकी प्रमाणित विस्तृत सूची फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 185 करोड़ रुपये की राशि से किन क्षेत्रों में कौन-से विकास कार्य प्रस्तावित हैं।
मंत्री के जवाब पर बनी हुई है नजर
विधायक स्वरूप प्रकाश की ओर से लगाए गए आरोपों पर जिला प्रभारी मंत्री के.एम. शिवलिंगेगौड़ा की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
मामले में यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि योजना की कार्ययोजना तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की जिम्मेदारी किन विभागों को सौंपी गई है।
प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने पर ही पता चल सकेगा कि योजनाओं में देरी तकनीकी, वित्तीय या प्रशासनिक कारणों से हो रही है।
इसके अलावा मंत्री के गांव दौरे के दौरान अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारणों की भी पुष्टि आवश्यक है।
हासन की राजनीति में बढ़ी हलचल
हासन जिले की राजनीति में जनप्रतिनिधियों के बीच इस तरह की बयानबाजी ने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
स्वरूप प्रकाश हासन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि के.एम. शिवलिंगेगौड़ा राज्य सरकार में मंत्री होने के साथ जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं।
दोनों जनप्रतिनिधियों के बीच सामने आए मतभेदों के बाद अब प्रशासनिक व्यवस्था और लंबित विकास परियोजनाओं की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल 185 करोड़ रुपये की महात्मा गांधी योजना के क्रियान्वयन में देरी का आरोप इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन कब तक कार्ययोजना तैयार करता है, टेंडर प्रक्रिया कब शुरू होती है और मंत्री की ओर से विधायक के आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।





