
कर्नाटक : डी.के. शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने राज्य के लंबे समय से लंबित बकाया धन का मुद्दा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने उठाया। बातचीत के दौरान उन्हें कुछ सकारात्मक जानकारी मिली है, जिसे उन्होंने ‘अच्छी खबर’ बताया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि केंद्र सरकार की ओर से किस राशि या किस मद में भुगतान को लेकर सहमति बनी है।
नई दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद पत्रकारों ने जब उनसे इस संभावित राहत के बारे में विस्तार से बताने को कहा, तो उन्होंने कहा कि वह अभी इस संबंध में कुछ नहीं कहना चाहते और बाद में जानकारी साझा करेंगे। उनके इस बयान के बाद अब यह चर्चा है कि राज्य को किस तरह की वित्तीय राहत मिल सकती है। लेकिन जब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक बकाया राशि, भुगतान की समयसीमा और संभावित लाभ के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना संभव नहीं है।
जीएसटी काउंसिल की बैठक को बताया सकारात्मक
शिवकुमार ने बैठक के अनुभव को सकारात्मक बताते हुए कहा कि कर्नाटक की ओर से रखे गए सुझावों को सदस्यों ने स्वीकार किया। उनके अनुसार, बैठक में राज्य की चिंताओं और प्रस्तावों पर चर्चा हुई और उन्हें समर्थन मिला।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। परिषद ने जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड और कर संबंधी विवादों के निपटारे की प्रक्रिया में सुधार से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार किया।
बैठक का उद्देश्य करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाना और जीएसटी व्यवस्था के अनुपालन को अधिक सुगम बनाना भी था। शिवकुमार ने कर्नाटक के सुझावों को स्वीकार किए जाने की बात कही, हालांकि उन्होंने सभी प्रस्तावों का अलग-अलग विवरण नहीं दिया।
जीएसटी वसूली और गिरफ्तारी के मुद्दे पर भी चर्चा
बैठक में जीएसटी का भुगतान नहीं करने वाले कारोबारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने और गिरफ्तारी जैसे कदमों पर भी चर्चा हुई। शिवकुमार ने कहा कि कर बकाया की वसूली के लिए कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और कारोबारियों को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार करने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, इस विषय पर चर्चा के दौरान राज्यों ने भी अपनी राय रखी।
यह मुद्दा कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जीएसटी नियमों के उल्लंघन और बकाया कर की वसूली से संबंधित कार्रवाई का सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि, बैठक में हुई चर्चा और परिषद की ओर से की गई औपचारिक सिफारिशों के बीच अंतर होता है। इसलिए किसी प्रस्ताव को अंतिम नियम मानने से पहले आधिकारिक निर्णय देखना जरूरी है।
अब आधिकारिक घोषणा का इंतजार
कर्नाटक के लंबित बकाये को लेकर शिवकुमार के बयान ने राज्य को संभावित राहत मिलने की उम्मीद बढ़ाई है। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वित्त मंत्री ने किस तरह का आश्वासन दिया है, कितनी राशि मिलने की संभावना है या भुगतान कब तक हो सकता है।
फिलहाल, मुख्यमंत्री ने इतना ही कहा है कि उन्हें अच्छी खबर मिली है और वह इसके बारे में बाद में जानकारी देंगे। राज्य सरकार की ओर से भी इस संबंध में किसी विशिष्ट राशि या भुगतान कार्यक्रम का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि शिवकुमार कब इस विषय पर अधिक जानकारी साझा करते हैं और केंद्र सरकार की ओर से कर्नाटक के बकाये को लेकर क्या आधिकारिक फैसला सामने आता है। यदि किसी भुगतान या राहत की घोषणा होती है, तो उससे राज्य के वित्तीय संसाधनों और लंबित देनदारियों के प्रबंधन को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद कर्नाटक के लंबित बकाये पर सकारात्मक संकेत मिलने का दावा शिवकुमार ने किया है, लेकिन बकाये की राशि, भुगतान की समयसीमा और राहत के स्वरूप का खुलासा अभी नहीं हुआ है।





