कर्नाटक

डियाजियो की यूनिट पर छापा 18 हजार पेटियां सीज

Ratna Netam
11 Aug 2026 2:30 PM IST
डियाजियो की यूनिट पर छापा 18 हजार पेटियां सीज
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बेंगलुरु : कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने शराब बनाने वाली कंपनी डियाजियो (Diageo) की यूनाइटेड स्पिरिट्स यूनिट पर बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने कंपनी की डिस्टिलरी से शराब की करीब 18 हजार पेटियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, 180 मिलीलीटर की कुछ शराब की बोतलों में रीसाइकिल किए गए प्लास्टिक यानी PET का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन बोतलों पर अनिवार्य रीसाइकिल्ड PET मार्किंग मौजूद नहीं थी। जब्त शराब और संबंधित प्लास्टिक सामग्री की कीमत करीब 1.6 मिलियन डॉलर बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने पिछले सप्ताह बेंगलुरु स्थित यूनाइटेड स्पिरिट्स की फैक्ट्री का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को छोटी बोतलों में इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक और उनकी लेबलिंग से संबंधित कथित खामी मिली। सरकारी मेमो में कहा गया है कि कंपनी 180 मिलीलीटर क्षमता वाली बोतलों के लिए रीसाइकिल्ड PET सामग्री का इस्तेमाल कर रही थी। हालांकि, इन बोतलों पर सरकार की ओर से निर्धारित रीसाइकिल्ड PET से जुड़ा जरूरी प्रतीक नहीं था।
अधिकारियों ने इस कमी को खाद्य सुरक्षा, मिसब्रांडिंग और उपभोक्ताओं को गुमराह करने से जुड़े नियमों के तहत गंभीर माना। रीसाइकिल्ड प्लास्टिक से संबंधित मार्किंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं और नियामक एजेंसियों को यह जानकारी देना है कि इस्तेमाल की गई सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप है और खाद्य या पेय पदार्थों के संपर्क में इस्तेमाल के लिए उपयुक्त है। अधिकारियों ने इसी आधार पर संबंधित स्टॉक को अपने कब्जे में लेकर आगे के आदेश तक क्वारंटाइन कर दिया है।
कार्रवाई की चपेट में डियाजियो के कई लोकप्रिय ब्रांडों की शराब आई है। जब्त किए गए स्टॉक में डीएसपी ब्लैक डीलक्स व्हिस्की, स्मिरनॉफ जेस्टी लाइम ट्रिपल डिस्टिल्ड फ्लेवर्ड वोडका और वैट 69 ब्लेंडेड स्कॉच व्हिस्की जैसे ब्रांड शामिल बताए गए हैं। हालांकि कंपनी की बड़ी बोतलों पर इस कार्रवाई का असर नहीं पड़ा है, क्योंकि इनमें आमतौर पर कांच की बोतलों का इस्तेमाल किया जाता है।
डियाजियो की भारतीय इकाई यूनाइटेड स्पिरिट्स ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए अपनी सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि उसके उत्पाद इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। कंपनी के मुताबिक, जिन रीसाइकिल्ड PET बोतलों का इस्तेमाल किया गया था, वे FSSAI से मान्यता प्राप्त रीसाइकलर से ली गई थीं। कंपनी ने यह भी कहा कि संबंधित सप्लायर्स की ओर से निर्धारित अनिवार्य टेस्टिंग की गई थी। यूनाइटेड स्पिरिट्स ने कहा कि वह आगे के दिशा-निर्देशों और मामले को स्पष्ट करने के लिए FSSAI के साथ बातचीत कर रही है।
फिलहाल अधिकारियों ने जब्त की गई बोतलों और शराब के स्टॉक को अलग रख दिया है। आगे की कार्रवाई जांच और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय की जाएगी। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डियाजियो भारत में शराब बाजार की प्रमुख कंपनियों में से एक है और उसके कई बड़े ब्रांड देश में बिकते हैं।
डियाजियो पहले से ही खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की निगरानी में है। हाल के दिनों में कंपनी के उत्पादों की लेबलिंग, फ्लेवरिंग और विभिन्न दावों को लेकर नियामक स्तर पर सवाल उठे हैं। 20 जुलाई के एक नोटिस में FSSAI ने कंपनी की एक प्रमुख व्हिस्की के लेबल पर ‘अमेरिकन ओक कास्क में मैच्योर’ किए जाने के दावे को लेकर आपत्ति जताई थी। नियामक ने इस दावे को भ्रामक बताया था और उत्पाद में इस्तेमाल स्पिरिट से जुड़े विवरण पर सवाल उठाए थे।
इसके अलावा आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग से जुड़े आरोपों को लेकर मध्य प्रदेश में निर्मित डियाजियो के रॉयल चैलेंज और एंटीक्विटी ब्लू जैसे ब्रांडों पर भी कुछ राज्यों में नियामकीय कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में कंपनी के उत्पादों की संरचना और लेबल पर दिए गए दावों को लेकर जांच की गई थी।
FSSAI की ओर से कंपनी के लेबल पर ‘स्कॉच’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। नियामक की ओर से यह देखा जा रहा है कि उत्पादों के लेबल पर इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द और दावे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में स्पष्ट जानकारी देते हैं या नहीं।
भारत डियाजियो के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में कंपनी ने भारत में करीब तीन अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया था। ऐसे में बेंगलुरु यूनिट में हजारों पेटियों की जब्ती कंपनी के लिए महत्वपूर्ण नियामकीय चुनौती मानी जा रही है। अब कंपनी और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के बीच होने वाली आगे की बातचीत से यह स्पष्ट होगा कि जब्त स्टॉक को लेकर अंतिम फैसला क्या होता है और कथित लेबलिंग खामी पर कंपनी को किस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
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