
कर्नाटक : धारवाड़ में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसीलदार सच्चिदानंद कुचनूर को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तहसीलदार ने करोड़ों रुपये की कीमत वाली एक खराब हालत वाली जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव करने के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद योजना बनाकर कार्रवाई की गई और तहसीलदार को रिश्वत लेते समय पकड़ा गया। फिलहाल आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर मामले की जांच की जा रही है।
जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव का आरोप
मामला धारवाड़ और कलाघटगी के बीच स्थित यारिकोप्पा गांव की जमीन से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, यहां करीब 33 एकड़ जमीन थी, जिसमें से लगभग 13 एकड़ जमीन खराब स्थिति वाली बताई जा रही थी।
आरोप है कि तहसीलदार सच्चिदानंद कुचनूर ने जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव करने और करीब 2 एकड़ जमीन से जुड़े दस्तावेजों में सुधार के लिए रिश्वत की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने इस मामले की जानकारी लोकायुक्त अधिकारियों को दी, जिसके बाद जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
लोकायुक्त टीम ने की छापेमारी
लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाया। लोकायुक्त एसपी सिद्दालिंगप्पा के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की।
इस टीम में डीएसपी रवींद्र कुरुबागट्टी, इंस्पेक्टर प्रसाद, करुनेशा गौड़ा, प्रसाद पानेकर सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता भी टीम के साथ मौजूद थे।
लोकायुक्त अधिकारियों के मुताबिक, तहसीदार को बुधवार रात कर्नाटक कॉलेज परिसर में रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ा गया।
शिकायतकर्ता ने की थी शिकायत
बताया जा रहा है कि बागलकोट निवासी मंजूनाथ अरालिकट्टी ने यारिकोप्पा क्षेत्र में जमीन खरीदी थी। आरोप है कि जमीन के टाइटल और रिकॉर्ड से जुड़ी समस्या को ठीक कराने के लिए तहसीलदार से संपर्क किया गया था।
शिकायत के अनुसार, इसी प्रक्रिया के दौरान रिश्वत की मांग की गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त से संपर्क किया और पूरी जानकारी दी।
अधिकारी को हिरासत में लिया गया
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद तहसीलदार सच्चिदानंद कुचनूर को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में केवल एक अधिकारी की भूमिका थी या फिर इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।
दस्तावेज और लेन-देन की जांच
भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में लोकायुक्त अधिकारी आमतौर पर दस्तावेजों, रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच करते हैं। इस मामले में भी जमीन से जुड़े दस्तावेजों और कथित रिश्वत लेन-देन की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकेगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई
सरकारी अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर लोकायुक्त समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है। ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना और रिश्वतखोरी पर रोक लगाना है।
धारवाड़ की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी
फिलहाल लोकायुक्त पुलिस मामले की जांच में जुटी है। तहसीलदार के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
लोकायुक्त अधिकारियों की टीम जमीन रिकॉर्ड, रिश्वत की रकम और पूरे घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों को जुटा रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।





