कर्नाटक

750 किलो की अंबारी उठाने की दौड़ में धनंजय आगे

Kavita2
8 Oct 2026 11:06 AM IST
750 किलो की अंबारी उठाने की दौड़ में धनंजय आगे
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मैसूर। कर्नाटक के विश्वप्रसिद्ध मैसूर दशहरा महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार जंबो सवारी में सोने की अंबारी उठाने वाले हाथी के चयन को लेकर श्रद्धालुओं और पर्यटकों में विशेष उत्सुकता बनी हुई है। पिछले कई वर्षों से यह जिम्मेदारी निभाने वाले अभिमन्यु को उम्र के कारण इस कार्य से सेवानिवृत्त कर दिया गया है। ऐसे में वन विभाग नए हाथी के चयन की प्रक्रिया में जुटा है। अंबारी उठाने के लिए धनंजय, महेंद्र, एकलव्य और सुग्रीव को प्रमुख दावेदारों में शामिल किया गया है। इनमें धनंजय फिलहाल सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, वन विभाग ने अभी अंतिम नाम की घोषणा नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में अंबारी उठाने वाले हाथी के नाम का ऐलान किया जा सकता है।

धनंजय सबसे मजबूत दावेदार

इस साल मैसूर दशहरा की जंबो सवारी में धनंजय हाथी को सोने की अंबारी उठाने की जिम्मेदारी मिलने की संभावना सबसे अधिक जताई जा रही है।

वन विभाग के अधिकारी धनंजय के शारीरिक स्वास्थ्य, चलने की क्षमता, प्रशिक्षण और व्यवहार का आकलन कर रहे हैं। हाथी को भारी अंबारी के साथ लंबे रास्ते पर चलना होता है। ऐसे में उसकी क्षमता और प्रशिक्षण का विशेष महत्व है।

धनंजय के अलावा महेंद्र, एकलव्य और सुग्रीव भी इस जिम्मेदारी के लिए दावेदार हैं। इन सभी हाथियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम चयन प्रशिक्षण के परिणाम और हाथियों की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

अभिमन्यु को 60 साल की उम्र में मिली सेवानिवृत्ति

मैसूर दशहरा की जंबो सवारी में पिछले वर्षों के दौरान अभिमन्यु हाथी प्रमुख आकर्षण रहा है। वह सोने की अंबारी उठाकर महल से बन्नीमंटप तक निकलने वाली शोभायात्रा का नेतृत्व करता था।

लेकिन अब अभिमन्यु की उम्र करीब 60 वर्ष हो चुकी है। इसी वजह से वन विभाग ने उसे अंबारी उठाने की जिम्मेदारी से सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया है।

अभिमन्यु ने लंबे समय तक दशहरा आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसकी जगह नया हाथी चुनना वन विभाग के लिए एक अहम जिम्मेदारी बन गया है।

नए हाथी को न केवल भारी अंबारी उठानी होगी, बल्कि हजारों लोगों की मौजूदगी में शांतिपूर्वक शोभायात्रा पूरी करनी होगी।

पांच हाथियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

वन विभाग धनंजय, महेंद्र, प्रशांत, एकलव्य और सुग्रीव को विशेष प्रशिक्षण दे रहा है।

इन हाथियों को मैसूर महल परिसर और जंबो सवारी के निर्धारित मार्ग पर अभ्यास कराया जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की चाल, शारीरिक सहनशक्ति और निर्देशों का पालन करने की क्षमता पर ध्यान दिया जा रहा है।

अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम रूप से चुना गया हाथी उत्सव के दौरान बिना किसी परेशानी के अपनी जिम्मेदारी निभा सके।

वन विभाग हाथियों की देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर भी ध्यान दे रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी क्षमता का आकलन करके अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

750 किलो वजनी है सोने की अंबारी

मैसूर दशहरा की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में सोने की अंबारी शामिल है। यह अंबारी करीब 750 किलोग्राम वजनी है।

इसमें लकड़ी के ढांचे पर लगभग 80 किलोग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया है। जंबो सवारी के दौरान इस अंबारी में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

चयनित हाथी अंबारी को अपनी पीठ पर लेकर महल परिसर से बन्नीमंटप तक निकलने वाली भव्य शोभायात्रा में शामिल होता है।

यह शोभायात्रा मैसूर दशहरा महोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण मानी जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इसे देखने के लिए पहुंचते हैं।

21 अक्टूबर को निकलेगी भव्य जंबो सवारी

मैसूर दशहरा महोत्सव इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। महोत्सव की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगी।

21 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर भव्य जंबो सवारी निकाली जाएगी।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर 1 बजकर 36 मिनट से 1 बजकर 56 मिनट के बीच नंदी ध्वज पूजा करेंगे।

इसके बाद शाम 4 बजकर 10 मिनट से 4 बजकर 35 मिनट के बीच देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए जाएंगे।

शाम करीब 4 बजकर 35 मिनट पर जंबो सवारी मैसूर महल से बन्नीमंटप के लिए प्रस्थान करेगी।

मैसूर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा

मैसूर दशहरा कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इसे राज्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

इस महोत्सव की परंपरा कई सदियों पुरानी है। मैसूर के शाही परिवार ने दशहरा उत्सव को विशेष पहचान दी थी।

उत्सव के दौरान मैसूर महल को रोशनी से सजाया जाता है। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान और विभिन्न प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं।

दशहरा महोत्सव के अंतिम दिन निकलने वाली जंबो सवारी में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को सोने की अंबारी में स्थापित किया जाता है।

हाथियों की भव्य शोभायात्रा इस उत्सव की पहचान बन चुकी है।

पर्यटकों में बढ़ी उत्सुकता

मैसूर दशहरा देखने के लिए देश और विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

इस बार सोने की अंबारी उठाने वाले हाथी के चयन को लेकर लोगों में विशेष रुचि दिखाई दे रही है।

अभिमन्यु की सेवानिवृत्ति के बाद पहली बार किसी नए हाथी को यह प्रमुख जिम्मेदारी मिलने वाली है।

इसी वजह से धनंजय, महेंद्र, एकलव्य और सुग्रीव के नाम चर्चा में हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद चयनित हाथी को शोभायात्रा की मुख्य जिम्मेदारी के लिए तैयार किया जाएगा।

वन विभाग की घोषणा पर टिकी नजर

फिलहाल धनंजय सोने की अंबारी उठाने की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय वन विभाग की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

विभाग हाथियों के प्रशिक्षण और स्वास्थ्य से जुड़े सभी पहलुओं का आकलन कर रहा है।

मैसूर दशहरा की भव्य जंबो सवारी में इस बार कौन सा हाथी देवी चामुंडेश्वरी की सोने की अंबारी लेकर चलेगा, इसका फैसला अगले कुछ दिनों में सामने आने की उम्मीद है।

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