कर्नाटक

देवराज उर्स कॉर्पोरेशन पर टेंडर घोटाले के आरोप

Kavita2
7 July 2026 1:36 PM IST
देवराज उर्स कॉर्पोरेशन पर टेंडर घोटाले के आरोप
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कर्नाटक: कर्नाटक में सरकारी विकास निगमों से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के बाद अब देवराज उर्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले को लेकर राज्य की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश के पास एक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें सिलाई मशीनों की खरीद प्रक्रिया में अनियमितता और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि सिलाई मशीनों की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडर में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और बाजार मूल्य से काफी अधिक कीमत पर मशीनें खरीदने की तैयारी की गई। शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

सिलाई मशीन खरीद में गड़बड़ी का आरोप

शिकायतकर्ता परमेश के अनुसार, देवराज उर्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की ओर से सिलाई मशीनों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी। आरोप है कि जिन सिलाई मशीनों की बाजार कीमत करीब 10 हजार रुपये थी, उन्हें लगभग 17 हजार रुपये की दर से खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया।

शिकायत में कहा गया है कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और नियमों की अनदेखी करते हुए एक विशेष व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में कथित तौर पर करीब 5 से 6 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है।

टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि टेंडर जारी करने से लेकर अंतिम चयन तक कई स्तरों पर अनियमितताएं हुईं। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि प्रक्रिया में सभी योग्य विक्रेताओं को समान अवसर नहीं दिया गया और नियमों का उल्लंघन करते हुए टेंडर आवंटित किया गया।

आरोप यह भी लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल कुछ लोगों ने कथित रूप से निजी लाभ के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए निगमों में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

BJP ने सरकार पर साधा निशाना

मामला सामने आने के बाद विपक्षी दल बीजेपी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी निगमों में लगातार भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं और सरकार इन पर नियंत्रण करने में विफल रही है।

बीजेपी ने मांग की है कि आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

विपक्ष का कहना है कि सरकारी धन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और किसी भी तरह की अनियमितता की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

वाल्मीकि निगम मामले के बाद बढ़ी निगाहें

देवराज उर्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से जुड़े आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब राज्य में वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला पहले से चर्चा में है।

इसके बाद अन्य सरकारी निगमों की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं।

सरकार की ओर से अभी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि शिकायत की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

विकास निगमों की भूमिका महत्वपूर्ण

देवराज उर्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन जैसे निगम सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विकास के लिए योजनाएं संचालित करते हैं। इनके माध्यम से रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाएं लागू की जाती हैं।

ऐसे में यदि किसी निगम में वित्तीय अनियमितता होती है तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है, जिनके लिए ये योजनाएं बनाई जाती हैं।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल पूरा मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। सरकार और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है।

देवराज उर्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में कथित टेंडर घोटाले का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और जांच के नतीजों पर है।

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