कर्नाटक

सिद्धारमैया की नाराजगी की अटकलों पर डिप्टी सीएम ने लगाया विराम कहा अध्याय अब खत्म

Kavita2
11 Sept 2026 2:46 PM IST
सिद्धारमैया की नाराजगी की अटकलों पर डिप्टी सीएम ने लगाया विराम कहा अध्याय अब खत्म
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बेंगलुरु। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के एक सरकारी कार्यक्रम से अचानक चले जाने और इसके बाद दिल्ली रवाना होने को लेकर शुरू हुई राजनीतिक चर्चाओं पर उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया के कार्यक्रम से जल्दी निकलने और दिल्ली जाने का कांग्रेस के अंदर किसी तरह की नाराजगी या असंतोष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद से जुड़ा मामला अब समाप्त हो चुका है और उस पर बार-बार चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है।

पत्रकारों से बातचीत में डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि सिद्धारमैया पहले ही सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर चुके थे कि वे कांग्रेस आलाकमान के निर्णय को स्वीकार करेंगे। पार्टी नेतृत्व के फैसले के अनुसार ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। ऐसे में यह मानना उचित नहीं है कि वे नेतृत्व परिवर्तन या नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर नाराज हैं। परमेश्वर ने कहा कि यदि सिद्धारमैया वास्तव में नाराज होते तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा ही नहीं देते।

परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जो भी निर्णय लिया गया वह पार्टी के स्तर पर हुआ और सिद्धारमैया ने उसे स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को अब बंद अध्याय की तरह देखा जाना चाहिए। बार-बार इसी विषय को उठाने से अनावश्यक भ्रम पैदा होता है और पार्टी के अंदर असंतोष होने की गलत धारणा बनती है। कांग्रेस नेताओं का ध्यान अब सरकार के कामकाज और प्रदेश के विकास पर है।

सिद्धारमैया गुरुवार को विधान सौधा के बैंक्वेट हॉल में आयोजित “मजबूत कर्नाटक का संकल्प” कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम शुरू होने के कुछ समय बाद सिद्धारमैया वहां से निकल गए। उनके अचानक चले जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

कुछ लोगों ने सिद्धारमैया के कार्यक्रम से जल्दी निकलने को कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और सत्ता परिवर्तन से जोड़कर देखा। इसके बाद उनके दिल्ली जाने की जानकारी सामने आने पर अटकलों ने और जोर पकड़ लिया। राजनीतिक हलकों में सवाल उठाया जाने लगा कि क्या नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि डिप्टी सीएम परमेश्वर ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन घटनाओं को पार्टी के अंदर किसी प्रकार की नाराजगी से जोड़ना सही नहीं है।

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन और सत्ता के समीकरण लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहे हैं। सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार दोनों प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं से जुड़ी हर सार्वजनिक गतिविधि और बयान का राजनीतिक अर्थ निकाला जाता है। कार्यक्रम से किसी नेता का जल्दी जाना या दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से संभावित मुलाकात भी तुरंत सियासी अटकलों का कारण बन जाती है।

डॉ. जी. परमेश्वर ने इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस के अंदर किसी विवाद की बात को नकारा। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया ने आलाकमान के फैसले का सम्मान किया और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। उनके अनुसार यह तथ्य ही इस बात का प्रमाण है कि पूर्व मुख्यमंत्री पार्टी के निर्णय के साथ हैं। यदि उनके मन में किसी तरह का असंतोष होता तो वह नेतृत्व के फैसले को स्वीकार नहीं करते।

परमेश्वर की टिप्पणी को कांग्रेस के भीतर एकजुटता का संदेश देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम से सिद्धारमैया के अचानक निकलने की घटना राजनीतिक विवाद में बदल जाए। सरकार अपने कामकाज और उपलब्धियों को जनता के सामने रखने का प्रयास कर रही है। ऐसे समय में आंतरिक मतभेद की चर्चा से उसके संदेश पर असर पड़ सकता है।

सिद्धारमैया का दिल्ली जाना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है लेकिन परमेश्वर ने इसे असंतोष से जोड़ने से इनकार किया है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पूर्व मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे का विस्तृत कार्यक्रम क्या है। इसके बावजूद उन्होंने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि इस यात्रा को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक अनुमान सही नहीं हैं।

डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार के 100 दिनों का कार्यक्रम नए प्रशासन की राजनीतिक दिशा और प्राथमिकताओं को प्रदर्शित करने का अवसर था। “मजबूत कर्नाटक का संकल्प” नाम से आयोजित कार्यक्रम में सरकार ने राज्य के विकास और जनता से किए गए वादों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताने का प्रयास किया। लेकिन सिद्धारमैया के जल्दी चले जाने से कार्यक्रम की उपलब्धियों के बजाय कांग्रेस की आंतरिक राजनीति चर्चा के केंद्र में आ गई।

प्रदेश की राजनीति में सिद्धारमैया का प्रभाव अब भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बावजूद कांग्रेस संगठन और विधायकों के बीच उनकी मजबूत पकड़ होने की चर्चा होती रही है। इसी कारण उनकी गतिविधियों पर राजनीतिक दलों और मीडिया की नजर रहती है। उनके किसी कार्यक्रम में शामिल होने या वहां से अचानक निकलने जैसी सामान्य घटना को भी सत्ता के समीकरणों से जोड़कर देखा जाता है।

दूसरी ओर डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार अपने शुरुआती कार्यकाल की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय का संदेश देना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है ताकि विपक्ष को आंतरिक मतभेद का मुद्दा न मिले।

परमेश्वर ने साफ शब्दों में कहा कि सिद्धारमैया की कथित नाराजगी से जुड़ी चर्चा का अब कोई आधार नहीं है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस मामले को बार-बार उठाने की जरूरत नहीं है। उनके बयान का मुख्य उद्देश्य यह बताना था कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा आलाकमान के फैसले के अनुरूप हुआ और सिद्धारमैया ने इसे स्वीकार किया।

हालांकि डिप्टी सीएम की सफाई के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से अचानक निकलने के कारणों को लेकर राजनीतिक चर्चा पूरी तरह थमेगी या नहीं यह देखना होगा। विपक्ष इस घटनाक्रम को कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान से जोड़ सकता है। वहीं कांग्रेस के नेता इसे सामान्य घटनाक्रम बताकर सरकार और पार्टी में एकजुटता का दावा कर रहे हैं।

फिलहाल डॉ. जी. परमेश्वर ने स्पष्ट कर दिया है कि सिद्धारमैया की नाराजगी का सवाल अब समाप्त हो चुका है। कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन के विवाद को पीछे छोड़कर सरकार के कामकाज पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। सिद्धारमैया की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई नई प्रतिक्रिया सामने आने पर राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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